
निखिल स्वामी/बीकानेर. बीकानेरी नमकीन पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान व स्वाद के लिए मशहूर है. यहां की भुजिया तो विश्व प्रसिद्ध है ही. भुजिया के अलावा यहां के सूखे समोसे और कचौरी भी काफी प्रसिद्ध है. बीकानेर के लोग सूखे समोसे और कचौरी को ड्राई फ्रूट्स के साथ बड़े चाव से खाते हैं, खासकर त्योहारों के सीजन में. इन सूखे समोसे व कचौरी की डिमांड विदेशों तक रहती है. कई लोग तो इसे विदेशों में बैठे अपने रिश्तेदारों को यहां से ये स्पेशल समोसे व कचौरी भेजते है. इतना ही नहीं इस सूखे समोसा और कचौरी का हर साल करोड़ो का कारोबार होता है.
दो महीनों तक रहते हैं फ्रेश
दुकानदार गणेश अग्रवाल ने बताया कि इसकी खासियत है की यह कई माह तक खराब नहीं होती है. यह साइज में नॉर्मल समोसा और कचौरी की तुलना में काफी छोटी होती है और आधा इंच के समोसा और कचौरी होती है. इनको लोग अपने मेहमानों की आवभगत करने के लिए ड्राई फ्रूट्स के साथ ज्यादा उपयोग लेते हैं. होली और दीपावली और अन्य बड़े त्योहार पर इसकी ज्यादा डिमांड रहती है. हर घर में आपको छोटी कचौरी और समोसा मिल जाएगा.
100 साल पुरानी दुकान पर बनते हैं
गणेश ने बताया कि उनकी बीकानेर के सट्टा बाजार में 100 साल पुरानी दुकान है. उनकी दुकान पर मोगर और बेसन का मसाला डालकर समोसा और कचौरी बनाई जाती है जो की सूखा मसाला होता है. वे बताते हैं रोजाना 30 किलो समोसा और कचौरी निकल जाती हैं. यहां समोसा और कचौरी 200 रुपए किलो है और एक समोसा और एक कचौरी ढाई रुपए से कम कीमत पर पड़ता है
सूखे मसालों के साथ होता है फ्राई
ये स्पेशल कचौरी व समोसे बनाने के लिए मैदा, मोगर और बेसन का सूखा मसाला उपयोग में लिया जाता है. इसके बाद घी और तेल में फ्राई किया जाता है. करीब आधे घंटे के बाद ये तैयार हो जाते हैं. इनकी खासियत है की यह गर्मा गर्म नहीं बल्कि ठंडी और कई दिन सुखाने के बाद ज्यादा स्वादिष्ट लगती हैं.गणेश बताते हैं इस दुकान में अब तीसरी पीढ़ी यह सूखे मेवे और नमकीन बेच रहे हैं. इससे पहले मेरे दादाजी, फिर पिताजी और अब मैं स्वयं नमकीन बेच रहे है.
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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 22:13 IST








