इंसानी दिमाग की संरचना को बदल देती है लंबी अंतरिक्ष यात्रा

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लंबे अंतरिक्ष अभियानों को लेकर अतरिक्षयात्रियों की सेहत पर बहुत सारे शोध हुए हैं.  इनमें अंतरिक्ष के इंसान की हड्डियों से लेकर मनोविज्ञान तक पर अध्ययन हुए हैं. पिछले 20 सालों में लगातार कोई ना कोई व्यक्ति इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जरूर रुका है. इसमें किसी यात्री द्वारा गुजारा गया सबसे लंबा समय एक साल से भी ज्यादा का समय है .अब तैयारी इंसान की मंगल यात्रा और चंद्रमा पर लंबे समय तक रुकने की हो रही है. इसलिए इस तरह के अनुसंधान जारी भी रहेंगे. नए अध्ययन में इस बात का खुलासा किया है कि लंबे  समय तक अंतरिक्ष मे रहने का इंसान के मस्तिष्क पर क्या असर होता है.

30 यात्रियों का स्कैन
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 30 अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष यात्रा के बाद मस्तिष्क के स्कैन लिए और उनमें आए बदलाव का विश्लेषण किया. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में या नासा के स्पेस शटल या छह महीने से ज्यादा बड़े अभियानों में गए अंतरिक्ष यात्रियों के सेरिब्रल वेन्ट्रिकल्स का खासा विस्तार देखा गया है.

क्या होता है सेरिब्रल वेन्ट्रिकल
सेरिब्रल वेन्ट्रिकल्स दिमाग के बीच में वह स्थान होता है जहां सेरिब्रोस्पाइनल द्रव्य रहता है. यह पानी जैसा रंगहीन द्रव्य दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड के बीच प्रवाहित होता है और दिमाग को बाहर के झटकों से बचाने का काम करता है. इसके अलावा इसका एक प्रमुख काम खराब पदार्थों को हटाने का भी रहता है. यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

ज्यादा समय ज्यादा विस्तार
अध्ययन में बताया गया है कि लंबे अभियानों का संबंध दायें लेट्रल और तीसरे वेन्ट्रिकल्स से होता है. जिसमें अधिकांश विस्तार अंतरिक्ष में पहले छह महीने के दौरान देखने को मिलता है. इस अध्ययन की प्रमुख लेखक रेचल सेडलर ने एक बयान में बताया कि शोधकर्ताओं ने पाया कि लोग अतंरिक्ष में जितना समय बिताते हैं उतना ही वेन्ट्रिकल में विस्तार होने लगता है.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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