
खूंटी. एक ओर शहर के लोग आरओ और टंकी का पानी पीते हैं. सरकार द्वार शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए कई तरह की सुविधाएं दी हैं तो वहीं दूसरी एक बाल्टी पानी के लिए एक किलोमीटर चलना होता है. पूरा गांव गंदा पानी पीने को है मजबूर है. शहर के लोग साफ पानी को भी नलियों में बहा देते हैं वहीं राजधानी रांची से मात्र चालीस किलो मीटर की दूरी पर पहाड़ों को तलहटी में बसे गांव के लोगों के लिए पीने का साफ पानी तक मयस्सर नहीं और ये लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.
खूंटी जिला मुख्यालय से मात्र 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ों के बीच में स्थित है सिमरापारी गांव. चालीस पचास घर का यह गांव खेती बारी पर निर्भर है. गरीबी का आलम ऐसा कि बेटी की शादी कर्ज लेकर करते हैं. वहीं महीने का खर्च भेड़ बकरी, मुर्गी और गाय से जीवन यापन होता है.
स्थानीय ग्रामीण ने बताया 35 से 40 घर की यह गांव है. यहां पीने का एकमात्र जरिया यही चुवां है. इसी चुवां से निकलने वाला गंदा पानी पीते हैं. इसी पानी से घर का खाना भी बनता है. मजबूरी में ये लोग यहीं का पानी कई सालों से पी रहे हैं. कई बार इनलोगों ने शिकायत भी की है लेकिन अभी तक इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक बात नहीं पहुंची है.








