पेयजल संकट से जूझ रहा पिथौरागढ़, ग्रामीण इलाकों से शुरू हुआ पलायन, जानिए पूरी खबर

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हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आज भी तमाम पेयजल योजना चलने के बाद भी शहर की आधी आबादी अभी भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर ही निर्भर है. शहर के ऐसे कई इलाके हैं, जहां गर्मियों में लोग जल संकट से जूझ रहे हैं और पानी के लिए उन्हें दूर जाकर नौलों-धारों से ही पानी लाना पड़ रहा है. बात अगर जिले के ग्रामीण इलाकों की करें तो कई इलाकों में जल संकट काफी गहरा गया है और लोग गांव छोड़ने को भी मजबूर हो रहे हैं.

बरसात होते ही नलों में दूषित जल आ रहा है, तो वहीं गर्मियों में तीन दिन में एक बार ही पानी की सप्लाई लोगों को मिल पाती है. जो पेयजल आपूर्ति के लिए काफी नहीं है. पिथौरागढ़ में आए दिन लोग जिलाधिकारी कार्यालय में पानी की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं.लेकिन स्थिति अभी नहीं सुधर पाई है. आज भी पहाड़ों में लोग नौले धारों पर ही निर्भर हैं और कई इलाकों के तो प्राकृतिक स्रोत भी सूख चुके हैं.

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पेयजल योजना
पानी की समस्या पर पिथौरागढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता भगवान रावत ने इसका जिम्मेदार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके अधिकारियों को बताया है. उनका कहना है कि अरबों रुपये की पेयजल योजनाएं जिले में होने के बाद भी आबादी की प्यास नहीं बुझ रही है और जो हर घर जल योजना सरकार की है. उसमें उन्होंने बड़े पैमाने पर घोटाला होने का आरोप लगाया है.

प्राकृतिक जल स्रोतों को करना होगा संरक्षित
पेयजल आपूर्ति की समस्या को लेकर पिथौरागढ़ जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सुरेश जोशी को अवगत कराया गया, जिनका कहना है कि शहर में पानी सप्लाई सिस्टम को बेहतर करने के लिए प्लान बनाये जा रहे हैं. जिसके बाद पानी की दिक्कत वाले इलाकों में भविष्य में लोगों को दिक्कत नहीं उठानी पड़ेगी.गौरतलब है कि पहाड़ों में आज प्राकृतिक नौले और धारे ही लोगों को प्यास बुझा रहे हैं. ऐसे में इन प्राकृतिक जल स्रोतों की महत्ता को समझ इन्हें संरक्षित करने की काफी जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ी को इस तरह जल संकट से न जूझना पड़े.

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FIRST PUBLISHED : June 08, 2023, 23:14 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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