
हिमांशु अग्रवाल/छतरपुर: कभी देश से लेकर पाकिस्तान तक में लोगों की लबों की शान हुआ करता था छतरपुर के महाराजपुर का पान, लेकिन भारत-पाक के संबंध क्या बिगड़े महाराजपुर के पान किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. अब यह पान यहां से पाकिस्तान निर्यात नहीं किया जा रहा है. हालांकि देश में इस पहुंच कमजोर नहीं पड़ी है.
छतरपुर के महाराजपुर कस्बे में बड़ी संख्या में चौरसिया समाज के लोग पान की खेती करते हैं. महाराजपुर और गढ़ी मलहरा का देसी पान कभी पाकिस्तान के शौकीनों की पहली पसंद होता था. पान किसान बताते हैं कि न सिर्फ पाकिस्तान में महाराजपुर के पान की डिमांड थी, बल्कि उसके दाम भी अच्छे खासे मिलते थे.
वैसा मुनाफ अब नहीं
भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक संबंध बिगड़ने के बाद से महाराजपुर के पान किसानों को इस बात की टीस रहती है कि अब उन्हें वह मुनाफा नहीं मिल पाता जो कभी पाकिस्तान को पान बेचकर मिलता था. किसान बताते हैं कि आज भी पाकिस्तान के लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों में महाराजपुर के पान को याद किया जाता है और वहां आज भी यहां के पान की डिमांड है.
दिल्ली तक पान की पहुंच
रामस्वरूप चौरसिया बताते हैं कि यहां का पान पहले पाकिस्तान जाया करता था, लेकिन भारत और पाकिस्तान के संबंध खराब होने के बाद भारत सरकार ने फैसला लिया कि अब महाराजपुर का पान पाकिस्तान नहीं जाएगा. उसका किसानों ने भी समर्थन किया और अब किसानों का पान उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जाता है. यूपी के बदायूं, कासगंज, चंदौसी, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर सहित दिल्ली में महाराजपुर के पान की डिमांड है.
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FIRST PUBLISHED : June 08, 2023, 17:24 IST








