सस्पेंस, थ्रिलर और रोमांच से भरपूर वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास एक बार फिर नए रूप में

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Hindi Literature News: हिन्द पॉकेट बुक्स से एक बड़े से गत्ते के डब्बे में किताबें भर कर आईं. डब्बे को खोला तो उसमें वेद प्रकाश शर्मा के एक-दो नहीं पूरे 6 उपन्यास थे. इन उपन्यासों को देखकर बचपन के दिन याद आ गए.

हापुड़ में मेरे बड़े भाई श्याम बिहारी शर्मा को बचपन से ही अखबार, कॉमिक्स बुक पढ़ने का शौक था. उनकी देखा-देखी मुझे भी कॉमिक्स पढ़ने की लत लग गई. उस समय 50 पैसे किराये पर कॉमिक्स मिलती थी. मेरा भाई कॉमिक्स ऐसे पढ़ता जैसे रजनीकांत की फिल्म रोबोट में डॉक्टर वसी का बनाया रोबोट चिट्टी मोटी से मोटी किताब को एक नजर देखकर ही पढ़ और याद कर लेता है.

भाई का यह पढ़ने का शौक कॉमिक्स से होता हुआ मोटो-मोटो नॉवेल तक जा पहुंचा. हालांकि, इस शौक के चलते मम्मी-पापा से अक्सर डांट सुनने को मिलती थी. पिताजी ने कई बार नॉवलों के ढेर को घर से निकालकर बाहर भी फेंक दिया. लेकिन भाई की नॉवेल पढ़ने की आदत ताउम्र बरकरार रही. उनका एक दोस्त पंकज (भोलू) भी ये नॉवेल पढ़ता था. मैं भोलू से अक्सर पूछा करता- ‘यार, इन मोटो-मोटो उपन्यासों को कैसे पढ़ लेते हो?’

भोलू ने मुझे भी ये नॉवेल पढ़ने के लिए उकसाया और ‘लल्लू’ नाम के मोटा सा उपन्यास मेरे हाथ में थमा दिया. बड़ी हिम्मत करके ‘लल्लू’ को पढ़ना शुरू किया. ‘लल्लू’ पढ़ना शुरू क्या किया कि बस पढ़ता ही गया. हाथ से छूटे ही नहीं. हालांकि, उसे पढ़ने में मुझे 5-6 दिन लगे. जबकि, भाई एक दिन में एक नॉवेल निपटा देता था. इसके बाद तो ऐसा चस्का लगा कि ‘वर्दी वाला गुंडा’ और ‘केशव पंडित’ पढ़े. लेकिन तब तक मेरी पढ़ने की स्पीड भी काफी बढ़ चुकी थी. वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यासों के मुख्य किरदारों के नाम विजय, विकास और केशव पंडित आज भी याद हैं.

यह भी पढ़ें- ल्हासा का लहू: तिब्बती बहुत थक गया है उसे थोड़ी नींद चाहिए और एक सपना

एक बार फिर से वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यासों को देखकर पुराने दिन याद आने लगे. लुग्दी साहित्य में तहलका मचाने वाले वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास एक बार पाठकों के हाथ में आ रहे हैं, लेकिन एक नए रूप-रंग में. इस बार उपन्यास उतने मोटे नहीं हैं जितने हमारे समय में हुआ करते थे. हिन्द पॉकेट बुक्स ने वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यासों की लगातार मांग को देखते हुए उनके 6 उपन्यासों को नए डिजाइन के में पेश किया है.

हिन्द पॉकेट बुक्स ने वेद प्रकाश शर्मा के बेहद चर्चित उपन्यास ‘बहू मांगे इंसाफ’, ‘साढ़े तीन घंटे’, ‘कैदी नं. 100’, ‘कारीगर’, ‘हत्या एक सुहागिन की’ और ‘पैंतरा’ के नए संस्करण प्रकाशित किए हैं.

वेद प्रकाश शर्मा के 6 उपन्यासों के गुलदस्ते में एक है ‘बहू मांगे इंसाफ’. दहेज, दानवता और षड़यंत्र पर आधारित यह उपन्यास ‘बहू मांगे इंसाफ’ कविता नामक एक ऐसी युवती की कहानी है जिसका विवाह दहेज लोभी परिवार में हो जाता है. जब दहेज की मांग पूरी नहीं हो पाती है तो सुसराल पक्ष के लोग कविता की हत्या कर देते हैं. उपन्यास में सस्पेंस उस समय पैदा होता है जब कविता की लाश एक-एक करके अपने सभी हत्यारों को मार डालती है. पाठक इसी उलझन में उलझे रहते हैं कि कविता जिंदा है या मुर्दा.

यह भी पढ़ें- इब्न-ए-इंशा की कविता ‘हम घूम चुके बस्ती-वन में’

‘बहू मांगे इंसाफ’ के अंश में पढ़ें-
‘मधु सो गई?’
‘हां!’ कमरे में दाखिल होते ही मनजीत ने कहा- ‘मैंने उन्हें नींद की इंजेक्शन दे दिया है और अब वे सुबह के सात बजे से पहले नहीं उठेंगी.’
‘ठीक किया उसके सामने खुलकर बात भी तो नहरीं कर सकते.’
‘पता नहीं ये सब क्या हो रहा है?’ कमरे में पड़ी एक खाली कुरसी पर बैठते हुए मनजीत ने कहा- ‘वह कौन था जो मुझे मारने आया और फिर अलार्म खुद ही क्यों बज उठा. मैं तो पस्त हो चुका हूं डैडी कविता की मौत के बाद से एक के बाद एक ऐसी खतरनाक, रहस्यमय और अजीब-अजीब सी घटनाएं हो रही हैं कि दिमाग काबू में नहीं रहा है.’

Ved Prakash Sharma News, Indian writer Ved Prakash Sharma, Meerut News, Uttar Pradesh News, Hindi novelist Ved Prakash Sharma, Hindi fiction writer Ved Prakash Sharma, Ved Prakash Sharma novels, वेद प्रकाश शर्मा, वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास, हिन्द पॉकेट बुक्स, Hind Pocket Books News, Penguin Random House India, तुलसी पॉकेट बुक्स, हिंदी साहित्य न्यूज, हिंदी लिटरेचर न्यूजच, Hindi Sahitya News, Hindi Literature News, Best Hindi Novel, Vardi Wala Gunda

उपन्यास ‘बहू मांगे इंसाफ’ पर शशिलाल नायर के निर्देशन में ‘बहू की आवाज’ (Bahu Ki Awaaz) फिल्म बनी थी. 1985 में बनी इस फिल्म में राकेश रोशन, सुप्रिया पाठक, स्वरूप संपत, अरुणा ईरानी, ओम पुरी, नसीरूद्दीन शाहर जैसे कलाकारों ने काम किया था.

दूसरा उपन्यास ‘साढ़े तीन घंटे’ रहस्य, रोमांच और मर्डर की पहेली से भरपूर है. ‘साढ़े तीन घंटे’ में किस्सा है एक औद्योगिक नगर जिन्दल पुरम् में जिन्दल परिवार के मुखिया अनूप जिन्दल खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर लेते हैं. इसके बाद पूरी नगरी में एक के बाद एक हत्याओं का सिलसिला शुरू होता है और हरेक हत्या के पीछे साढ़े तीन घंटे की रहस्य छिपा हुआ होता है.

‘साढ़े तीन घंटे’ के अंश में पढ़ें- सबसे ज्यादा रहस्यमय तो सुधा पटेल का चरित्र ही हो गया है. समझ में नहीं आता कि वह क्या है. जब सेफ में से उसके पत्र मिले थे तो मुझे उससे सहानुभूति हुई थी, कुर्बानी कर देने वाली एक आदर्श प्रेमिका लगी थी वह मुझे. उसके बाद फोन करने फ्लैट पर बुलाया जाना, वहां की हालत, तुम्हारे इस अनुमान ने मुझे उलझा दिया कि अपहरण का ड्रामा खुद उसका रचाया हुआ था और अब, जोगा या इकबाल के कमरे में मिले सुबूतों तथा कालू के बयान ने तो उसके चरित्र को बिल्कुल बदल दिया है.

वेद प्रकाश का एक और उपन्यास है ‘कैदी नं. 100.’ इसमें आप पढ़ेंगे – ”कल रात पागलखाने से नीलम नाम की एक पागल औरत भाग निकली है. भागते वक्त न केवल गार्ड को बेहोश करके उसने एक हंटर और रिवॉल्वर अपने कब्जे में कर लिए बल्कि एक अन्य गार्ड को शूट भी कर दिया. याद रहे वह पागल है, खतरनाक है, सोना नामक महिला की हत्या के जुर्म में उसे अदालत फांसी की सजा सुना चुकी है. पागलपन में भी वह सुरेश नामक अपने पति को कत्ल करने के लिए उतावली रहती थी. रिवॉल्वर की मौजूदगी में तो वह बेहद खतरनाक है.”

रेडियो पर खास खबर प्रसारित करने वाली आवाज़ सांस लेने के लिए रुकी.

आगे कहा गया- ”पहचान के लिए हुलिया नोट कर लें. सत्ताईस के आस-पास की उम्र वाली वह एक खूब गोरी स्त्री है. नीली आंखें उसकी पहचान हैं.तन पर पागलखाने की वर्दी पहने है. बाजू पर पागलखाने का बिल्ला लगा है, जिस पर नंबर लिखा है-”100.”
”जी हां. उसे कैदी नंबर 100 कहा जाता है!”
”चौकस रहने की प्रार्थना के साथ ही आप लोगों से अनुरोध है कि अगर वह कहीं चमके तो तुरंत नजदीक के पुलिस स्टेशन को सूचित करें अथवा इस फोन नंबर पर सूचना दें!”
नंबर बताने के बाद कहा गया-”विशेष सूचना समाप्त हुई!”

बता दें कि वेद प्रकाश शर्मा का 100वां उपन्यास है- कैदी नं. 100. इस उपन्यास की 2,50,000 प्रतियां छपी थीं.

वेद प्रकाश शर्मा (Hindi novelist Ved Prakash Sharma)
वेद प्रकाश शर्मा (Ved Prakash Sharma) हिंदी के लोकप्रिय उपन्यासकार रहे हैं. इन्होंने सस्ते और लोकप्रिय उपन्यासों की रचना की है. ‘वर्दी वाला गुंडा’ वेद प्रकाश शर्मा का सफलतम थ्रिलर उपन्यास है. इस उपन्यास की लगभग 8 करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं. इन्होंने अक्षय कुमार की ‘खिलाडी’ श्रृंखला की फिल्मों की पटकथाएं भी लिखीं. ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ फिल्म वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास ‘लल्लू’ पर आधारित थी.

यह भी पढ़ें- Book Review: कोरोजीविता से कोरोजयता की यात्रा है श्रीप्रकाश शुक्ल की ‘महामारी और कविता’

10 जून, 1955 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में जन्में वेद प्रकाश शर्मा ने एक से बढ़कर एक उपन्यास लिखे हैं. उनके 176 उपन्यास प्रकाशित हुए हैं. वेद प्रकाश एक बहन और सात भाइयों में सबसे छोटे थे. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि 1972 में जब उन्हें हाईस्कूल की पढ़ाई के बाद उनके पैतृक गांव बिहारा (मुजफ्फरनगर) भेजा गया. वे गर्मी की छुट्टियों में अपने साथ कई सारे उपन्यास लेकर गए. हर दो घंटों में वह एक उपन्यास पढ़कर खत्म कर देते थे. पढ़ने के साथ-साथ उन्हें लिखने का भी चस्का लग गया.

उपन्यास पढ़ने के शौक को लेकर पिताजी के हाथों उनकी खूबप पिटाई हुई. लेकिन जब उन्होंने वेद के लिखे उपन्यास को पढ़ा तो वे दंग रह गए. यह बात जब घर पर पिता जी पंडित मिश्री लाल शर्मा को पता चली, तो शाबाशी मिलने के बजाय पिटाई मिली. लेकिन इस बीच एक वाकया अच्छा हुआ कि पिता ने जब उनका लिखा हुआ उपन्यास पढ़ा, तो वे दंग रह गए. मिश्री लाल शर्मा उस उपन्यास को छपवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस में लेकर गए. वहां उनकी मुलाकात नामी उपन्यासकारों के नाम पर नकली उपन्यास छापने वाले जंग बहादुर से हुई. जंग बहादुर ने वेद का पहला उपन्यास नामचीन लेखक ‘वेद प्रकाश कंबोज’ के नाम से छापा था.

साल 1973 में आया उपन्यास ‘आग के बेटे’ उनके नाम से छापा था. साल 1985 में उन्होंने ‘तुलसी पॉकेट बुक्स’ के नाम से अपना खुद का पब्लिशिंग हाउस शुरू किया. यह पब्लिशिंग हाउस उन्होंने उस समय के एक और चर्चित उपन्यासकार रितुराज (सुरेश जैन) के साथ मिलकर शुरू किया था. हालांकि, बाद में रितुराज अलग हो गए और उन्होंने अपना नया पब्लिशिंग हाउस शुरू किया. वेद प्रकाश शर्मा के 176 उपन्यासों में से लगभग 70 तुलसी पॉकेट बुक्स ने छापे हैं.

उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1993 में वर्दी वाला गुंडा से मिली. बताते हैं कि इस उपन्यास की 15 लाख प्रतियां पहली बार छापी गई थीं. बाजार में आते ही इस उपन्यास ने तहलका मचा दिया. 17 फरवरी, 2017 में मेरठ के शास्त्रीनगर में स्थित अपने घर में उन्होंने आखिरी सांस ली. वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे.

Tags: Books, Hindi Literature, Hindi Writer, Literature, Literature and Art

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें