
निशा राठौड़/उदयपुर. भारत विभिन्नताओं का देश है यहां हर धर्म और समाज की अलग-अलग परपंरा और रीति-रिवाज है. लेकिन हम आपको उदयपुर के एक ऐसे समाज के बारें में बताने जा रहे हैं जिसकी एक अनोखी परंपरा है. जी हां यह है श्रीमाली समाज, जहां विवाह में दुल्हा-दुल्हन के सात फेरे नहीं बल्कि आठ फेरे होते है. यहीं नहीं दूल्हा ये फेरे दुल्हन को गोद में उठाकर पूरे करता है. वर्षों से यह अनोखी परंपरा श्रीमाली समाज में चलती आ रही है.
श्रीमाली समाज के विवाह पंडित नरेश श्रीमाली ने बताया कि भारत में सामान्य रूप से दो विवाह पद्धति का प्रयोग किया जाता है. जिसमें पहली राम विवाह पद्धति और दूसरी कृष्ण विवाह पद्धति प्रचलित है. ऐसे में श्रीमाली समाज श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं इसी के चलते वह कृष्ण विवाह पद्धति के अनुसार ही विवाह की सभी रस्मों को निभाते हैं. मान्यता है कि जब श्री कृष्ण और रुक्मणी का विवाह हुआ था. तब रुकमणी के पैर में चोट लगने की वजह से श्री कृष्ण भगवान ने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया था. इसी के चलते दुल्हन को गोद में उठाकर फेरे लेने की रस्म अदा की जाती है.
क्यों निभाई जाती है ये परंपरा?
इसके अलावा यह भी दंत कथाएं प्रचलित है की जब रुक्मणी से श्री कृष्ण का विवाह हो रहा था तब रात के समय शिशुपाल उनसे युद्ध करने के लिए आए थे .और रात भर श्री कृष्ण और शिशुपाल के बीच युद्ध चलता रहा. इसके बाद सुबह विदाई के समय जब से कृष्ण पहुंचे. तब उन्होंने रुकमणी से 4 फेरे और लिए इसके बाद से ही श्रीमाली समाज में 8 फेरों की रस्म दुल्हन को गोद में उठाकर की जाती है.
क्या हो जब दुल्हन-दूल्हे से वजन में ज्यादा हो
पंडित नरेश श्रीमाली ने बताया कि अगर दुल्हन वजन में दूल्हे से अधिक हो तो भी सामान्य रूप से देखने में तो यही आता है कि दूल्हा उसे अपनी गोद में उठाकर फेरे ले लेता है. लेकिन अगर अत्यधिक है तो वह हाथ पकड़ कर भी इस रस्म को पूरा कर सकता है.
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FIRST PUBLISHED : June 06, 2023, 17:25 IST








