
बलौदा बाजार. राम नारायण यदु ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन पर्यावरण के लिए ही समर्पित कर दिया है. जंगल बचाने की उनकी लगन को आप ऐसे समझ सकते हैं कि पेड़ काटने वालों पर उनकी हर वक्त नजर रहती है. यही वजह है कि कुछ साल पहले रामनारायण ने सिर्फ एक साल के भीतर अवैध रूप से जंगल काटने वालों से 3000 से ज्यादा कुल्हाड़ी जब्त कर ली थी. पर्यावरण संरक्षण के लिए राम नारायण की मुहिम को प्रशासन और सरकार ने भी सराहा है. आज जब पूरा देश विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा है, छत्तीसगढ़ के जंगल-मैन कहे जाने वाले रामनारायण की कहानी प्रेरणादायक है.
जिले के ग्राम धमनी के रहने वाले राम नारायण जब अपने गांव के आसपास लगे जंगल को कटते हुए देखते थे तो उन्हें बड़ा दर्द होता था. बचपन से उन्हें जंगलों से ऐसा लगाव रहा कि उन्होंने अपने मन में जंगल बचाने का संकल्प ले लिया. अपने गांव में 15-20 युवाओं की टीम बनाकर जंगल बचाने का काम शुरू किया. ग्रामीण बताते हैं कि आसपास के गांव से लोग धमनी जंगल में लकड़ी काटने आया करते थे और बड़े पैमाने पर जंगलों का विनाश कर रहे थे.
एक साल में 3000 कुल्हाड़ी जब्त
जंगल को तहस-नहस होता देखकर रामनारायण यादव की टीम ने लोगों को लकड़ी काटने से रोकना मना शुरू किया. उनकी टीम लगातार काम करती रही इससे लकड़ी काटने वाले लोगों ने परेशान होकर जंगल काटना कम कर दिया. उनका यह काम निरंतर चलता रहा इसी दौरान 4 जनवरी 1998 को वन विभाग के अधिकारी राकेश चतुर्वेदी का धमनी आना हुआ. वह उनका कार्य देखकर काफी प्रभावित हुए और उनकी सेवा को देखते हुए गांव वालों की आम सहमति से उन्हें वन समिति का अध्यक्ष बना दिया. वर्ष 2008-09 में राम नारायण के नेतृत्व में अवैध रूप से जंगल काटने वाले तस्करों से करीब 3000 कुल्हाड़ी जब्त की गई.
धान कूटने के लिए लगवा दी मशीन
राम नारायण ने वन समिति का अध्यक्ष बनने के बाद गांव की समस्या को देखते हुए समिति की तरफ से गांव में डीजल चलित हालर मील लगवा दी. उस समय तक गांव में बिजली नहीं पहुंची थी. हालर मील लगने से गांव वालों को काफी सुविधा हुई और ढेकी से धान कूट कर चावल निकालने के बजाय हालर मील का चावल लोगों को मिलने लगा. यह गांव में आई खुशहाली का एक नया दौर था.
छत्तीसगढ़ के लिए जीता प्रथम पुरस्कार
जंगल काटने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया. इसके लिए वे लगातार क्षेत्रवासियों को जागरूक करते रहे. वे बिना झगड़ा किए लोगों को जंगल काटने से मना करते थे और उनकी बात नहीं मानने वालों के सामने पहाड़ की तरह खड़े हो जाते थे. उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें वन विभाग द्वारा कोलकाता में आयोजित वन प्रबंधन संबंधित कार्यशाला में भेजा गया. कार्यशाला में शामिल होकर राम नारायण यादव छत्तीसगढ़ के लिए प्रथम पुरस्कार जीतकर लाए.
62 साल की उम्र में भी हैं चौकीदार
आज भी 62 साल की उम्र में वह चौकीदार के पद पर ही हैं लेकिन उन्हें कोई नियमित वेतन नहीं मिलता. राम नारायण ने ‘जंगल तोर महिमा अपार’ एक पुस्तक भी लिखी है जिसकी एक लाख प्रतियां छापी गईं. वे हजारों कविताएं जंगल के लिए लिखते आ रहे हैं. जंगल के ऐसे निस्वार्थ सिपाही को आज तक ऐसी कोई उपलब्धि हासिल नहीं हुई जो वन विभाग में कुछ वर्षों की सेवा करने के बाद लोगों को दे दी जाती हैं. रामनारायण यदु प्रदेश स्तरीय वन संरक्षण पुरस्कार के असली हकदार हैं.
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Tags: CG News, World environment day
FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 16:36 IST








