World Environment Day: पेड़ों के लिए जबरदस्त दीवाने हैं राजस्थान के लोग, लगा देते हैं जान की बाजी

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हाइलाइट्स

राजसमंद जिले में गांव पिपलांत्री में हर लड़की के पैदा होने पर 111 पौधे लगाना बेहद जरूरी
धौलपुर के धनौरा गांव में हरे-भरे पेड़, साफ-सुथरी सड़कें, सोलर स्ट्रीट लाइट, रंगों से चित्रित ईटों से बने घर
इस गांव के लोग शराब-मांस कभी नहीं छूते, अपराध क्या आज तक चोरी भी नहीं हुई

(एच. मलिक)

जोधपुर/राजसमंद. आज विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य हरियाली बढ़ाकर हमारे वातावरण को स्वच्छ और शुद्ध रखना है. ताकि, बढ़ते प्रदूषण (Pollution) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के दुष्प्रभावों से लोगों को बचाया जा सके. वृक्षों का संरक्षण (Tree Conversation) राजस्थान के लोगों की परंपरा है. यहां तक कि प्रदेश के कई गांव पेड़-पौधों को लगाने, संरक्षित करने, प्रकृति (Nature) को स्वच्छ रखने के लिए कई नवाचार (Innovation) कर रहे हैं. इससे ये गांव देश-प्रदेश में तो सुर्खियों में आ ही रहे हैं, औरों के लिए भी मिसाल बन रहे हैं.

गांव-कस्बों का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में अक्सर वही पतली गली, आसपास घूमती गाएं, छोटे-छोटे मकान और उन घरों में बनता चूल्हे वाला खाना याद आने लगता है. लेकिन मरुधरा के कई शहर जितने खूबसूरत हैं, उतने ही हसीन कुछ गांव भी हैं. पांच जून को पर्यावरण दिवस के मौके पर हम आपको राजस्थान के पांच ऐसे ही विशेष गांवों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने राष्ट्रपति और पीएम तक का ध्यान खींचा है.

आपके शहर से (जोधपुर)

पिपलांत्री गांव: हर लड़की के जन्म पर 111 पेड़ की परंपरा
बेटियों के जन्म पर कई तरह की परंपरा आपने सुनीं होंगी, लेकिन राजस्थान के इस गांव की परंपरा अनूठी ही है. गांव में लड़कियों के पैदा होने पर ढोल-नगाड़े तो बजते ही हैं, साथ ही गांव में हर लड़की के पैदा होने पर 111 पौधे लगाना बेहद जरूरी है. राजसमंद जिले के इस अनोखे गांव पिपलांत्री में लोग इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि जैसे-जैसे लड़कियां बड़ी होती हैं, वैसे-वैसे पेड़ों का भी विकास हो. इस पहल को करीब डेढ़ दशक पहले मुख्य रूप से दो अहम सामाजिक मुद्दों, यानी वन्य जीवन और लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए शुरू किया गया. बेटियों के जन्म पर पेड़ लगाने की मुहिम का ही सुपरिणाम है कि आज गांव में लगभग चार लाख से ज्यादा पेड़ लहलहा रहे हैं और इसका श्रेय पदमश्री श्याम सुंदर पालीवाल को भी जाता हैं. लोग यहां इस गांव को देखने प्रदेश से ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से लोग भी आते हैं.


धनौरा गांव: प्रदेश का पहला स्मार्ट गांव औरों के लिए बना मिसाल
चंबल के किनारे धौलपुर जिले में भले ही बीहड़ ने पहचान बनाई हो, लेकिन जिले का गांव धौला स्मार्ट विलेज के नाम से चर्चित है. धनौरा प्रदेश का पहला स्मार्ट गांव है, जो अपने एडवांस विकास के लिए प्रसिद्ध है. पर्यावरण को बढ़ावा देते जगह-जगह पर लगे हरे-भरे पेड़, साफ-सुथरी सड़कें, सोलर स्ट्रीट लाइट, खूबसूरत रंग में चित्रित ईटों से बने घर, स्किल्ड डेवलपमेंट सेंटर, मेडिटेशन सेंटर और पब्लिक लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी यहां मौजूद हैं. धनौरा गांव जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी की दूरी पर दो हजार का आबादी वाला गांव है. इस धनौरा गांव को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं. धनौरा गांव मॉडल को राज्य और देश की ग्राम पंचायतों ने एक विकास मॉडल के रूप में अपनाया है. इसे पीएम मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं. यहां करीब ढाई किमी लंबी एक नहर भी बनाई गई है, जिसे सभी खेतों से जोड़ा गया है.

खेरूणा गांव: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिया राष्ट्रीय स्वच्छता अवॉर्ड
बूंदी जिले से 13 किमी दूर खेरूणा गांव उस वक्त एकाएक देशभर में सुर्खियों में आ गया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस गांव को राष्ट्रीय स्वच्छता अवॉर्ड देकर सम्मानित किया. स्वच्छ भारत मिशन के प्रथम मॉडल ओडीएफ प्लस में 6 बिंदुओं पर इसे सम्मान मिला. सबसे सुखद यह कि ग्रामीणों ने लगन, मेहनत और जुनून से तीन महीने में गांव को सुर्खियों में ला दिया था. पहले रामगढ़ पंचायत के इस गांव का कहीं जिक्र तक नहीं होता था, अब आदर्श गांव वेडिंग डेस्टिनेशन भी बनने लगा है. इसकी वजह भी है, मोटिवेशन के बाद गांववालों ने अतिक्रमण खुद हटा लिए. सभी रास्तों के दोनों तरफ एल्यूमिनियम-लोहे की जालियां लगी हैं. डोर टू डोर गीला-सूखा कचरा कलेक्शन होता है, प्लास्टिक थैलियां, कचरा नहीं है. गंदे पानी के लिए शॉकपिट, मैजिक पिट हैं. कहीं आवारा पशु नहीं मिलेंगे, गायें भी गोशाला पहुंचा दी गई हैं. गांव में 8 पार्क हैं, जिनमें पॉम ट्री, बादाम, अशोक, गुलाब सहित कई किस्म के पौधे हैं. आदर्श ग्राम पंचायत खेरूणा में बाल उद्यान, पार्कों में झूले, पनघट, चौपाल एवं आवास व्यवस्थाएं, स्वच्छता और ग्राम विकास की संकल्पना साकार हुई है.

देवमाली गांव: प्रकृति का सम्मान, कभी नहीं हुई चोरी
प्रदेश के इस गांव के नाम में ही देव समाहित हैं. अजमेर जिले के देवमाली गांव में कलयुग में सतयुग-सी अनुभूति होती है. सौ फीसदी शुद्ध शाकाहारी लोगों के इस गांव में आज तक चोरी नहीं हुई. गांव में केरोसिन के जलाने पर रोक है. नीम और पीपल के पेड़ों का बहुत सम्मान होता है. ग्रामीण सुबह-सुबह गांव की पूरी पहाड़ी के चारों तरफ नंगे पैर परिक्रमा करते हैं. इस पहाड़ी पर भगवान देवनारायण का मंदिर है. जिसमें लोगों की गहरी आस्था है. किवदंती है कि देवनारायण जब यहां आये तो ग्रामीणों की सेवा भावना से बहुत खुश हुए. उन्होंने जाते-जाते खुशी का मंत्र दिया कि सुकून से रहना है तो पक्की छत का मकान मत बनाना. प्रकृति का सम्मान करना. सदियां गुजर गई, लेकिन देवमाली गांव में पक्की छत का एक भी मकान नहीं है. ग्रामीण सीमेंट-चूने का इस्तेमाल नहीं करते. न ही गांव के लोग शराब, मांस और अंडे को छूते हैं.

सनेट गांव: हर घर के बाहर कचरा पात्र, चमचमाती हैं सड़कें
कहते हैं मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो हर असंभव से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है. कभी करौली से 28 किलोमीटर की दूर स्थित सनेट गांव गंदगी के ढेरों से घिरा रहता था. लेकिन आज इस गांव का स्वरूप इतना बदल चुका है कि स्वच्छता के मामले में यह गांव बड़े-बड़े शहरों को मात दे रहा है. यह जिले की सभी ग्राम पंचायतों में स्वच्छता का मॉडल बन चुका है. लोगों की स्वच्छता के प्रति दीवानगी ऐसी है कि एक कागज का टुकड़ा भी उनको नजर आ जाता है तो सबसे पहले अपने काम को छोड़कर उस टुकड़े को कचरे पात्र में डालते हैं. पांच हजार से ज्यादा की आबादी वाला यह गांव सुंदर स्वरूप से स्वच्छता के प्रति मिसाल बनकर उभरा है. ग्राम पंचायत के मध्य स्थित गौरव पथ जिले की सड़कों को भी स्वच्छता और सुंदरता के मामले में मात देता है.

Tags: Air pollution, Environment, Environment news, Global warming, Jodhpur News, News 18, Rajasthan news in hindi, World environment day

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Author: Up Head Line

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