
जुगल कलाल/ डूंगरपुर. कहते हैं कि आदिवासी बच्चों के खून में तीरंदाजी की सटीकता और दक्षता होती है. आदिवासी प्रतिभाओं ने तीरंदाजी में देश दुनिया में अपने नाम का लोहा मनाया है. लेकिन, तीरंदाजों को तीर, धनुष और अन्य औजारों की जरूरत पड़ती है. मगर गरीब आदिवासी के पहुंच से महंगे तीरंदाजी की सामग्री लेना उनके बस का नही होता है. इसी को लेकर डूंगरपुर के एक शख्स अनुठी पहल की है और बाजारों में महंगे बिकने वाले है धनुष को हाथों से बनाकर सस्ते दामों में बेच रहा है. इस शख्स का नाम है नारायण लाल मोडिया.
बाजार में कीमत 15 हज़ार मोड़िया देते है 2 हजार में
तीरंदाजी के खिलाड़ियों के लिए एक धनुष खरीदने पर 5 हजार से 15 हजार तक चुकाने पड़ते है. वहीं, कुछ स्पेशल धनुषो की कीमत तो लाखों रूपये में भी होती है. इस समस्या को दूर कर कम दामों के सस्ता और टिकाऊ धनुष खिलाडियों को देने का बीड़ा नारायण लाल मोडिया ने उठाया है. मोडिया जो धनुष बाजार में 5 हजार से 15 हजार मिलता है उसी धनुष को मोडिया2 हजार रुपए में खिलाडियों को उपलब्ध करवा रहे हैं. मोडियाधनुष के साथ तीर भी देते है. मोडियाके तीर कमान ना सिर्फ़ तीरंदाजों के काम आ रहे हैं बल्कि खेतों में से जंगली जानवर भागने में भी काम में लिए जा रहे है.
बचपन से था तीर कमान चलाने का शौक
नारायण लाल मोडियाबिछीवाड़ा के देवपुरा गांव के रहने वाले है और पेशे है एक वकील भी है. मोडियाबताते है कि, बचपन में उन्हें तीर कमान खूब चलाया है. लेकिन उन्होंने वहीं तीर कमान चलाया जो जुगाड से बना हुआ था. अच्छा तीर कमान खरीदना था मगर उसके लिए पैसे नहीं थे. इसलिए सोचा कि क्यों ना यहां के गरीब बच्चों के लिए सस्ता और टिकाऊ तीर कमान बनाया जाए. ताकि उनकी निखरती हुई प्रतिभा में कोई कमी नहीं आए. मोडिया धनुष बनाने के लिए इमली के पेड़, गोदी के पेड़ और बांस के पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं लोकल बाज़ार से नाइलोन की रस्सी ली और भी चीज़े ख़रीदी जो कि धनुष को बनाने में इस्तेमाल में ली जाती हैं. जिसके बाद धनुष बनाने के लिए देशी औजार का इस्तेमाल करते है.
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FIRST PUBLISHED : June 04, 2023, 16:58 IST








