जेल में बंद इस कैदी की प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति भी कर चुके है तारीफ, आईपीसी धारा 302 के गंभीर अपराधों में है बंद

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विशाल झा / गाज़ियाबाद. आईपीसी की धारा 302 को गंभीर अपराधों में से एक माना गया है. ये धारा तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति पर जान से मारने के इरादे से हमला करता है, या ऐसी चोट देता है जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है. इस केस में अपराधी को बेल भी नहीं मिलती. लेकिन इसी गंभीर अपराध की धारा में बंद एक अपराधी ऐसा भी है जिसकी तारीफ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी कर चुके है.

डासना जेल में बंद कैदी अरुण राणा की कहानी. साल 2015 से ही अरुण राणा गाजियाबाद की जिला कारागार में बंद है. अपराधी बनने से पहले अरुण राणा मेरठ के एक निजी कॉलेज से बीसीए कर रहे थे. उनको पेंटिंग और आर्ट में कोई खास रुचि नहीं थी. जेल में एक और बंदी द्वारा स्केच और आर्ट वर्क धीरे-धीरे अरुण को आकर्षित करने लगा. शुरुआत में अरुण को थोड़ी बहुत मुश्किल आई लेकिन धीरे-धीरे उनको मजा आने लगा. कुछ ही सालों में अरुण बेहतरीन वॉल आर्ट और स्केच बनाने लगे.

जेल में 60 से अधिक वॉल पेंटिंग्स बनाई

अरुण राणा ने बताया कि उन्होंने जेल में अब तक 60 से अधिक वॉल पेंटिंग्स बनाई हैं. इसके साथ ही वह कैनवस आर्ट, वॉटर और ऑयल कलर से भी पेंटिंग तैयार करते हैं. इतना ही नहीं अरुण जेल में कैदियों को स्केचिंग सिखाते हैं. बकायदा जेल में वो स्केचिंग की क्लासेज देते हैं. डासना जेल प्रशासन द्वारा अरुण को आर्ट के लिए सभी सामान मुहैया कराया जाता है. उनका का सपना रिहा होने के बाद भारत का प्रसिद्ध चित्रकार बनने का है.

जेल प्रशासन का मिला पूरा सहयोग

कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग और कालांतर आर्ट फाउंडेशन द्वारा आयोजित की गई प्रतियोगिता में अरुण ने पुरस्कार हासिल किया है. अरुण राणा अपनी इस उपलब्धि का श्रेय जेल प्रशासन को देते हैं. उनका कहना है कि जेल में मौजूद अधिकारियों की मदद से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है. शुरुआत में अरुण को स्केच पोट्रेट बनाने में 2 से 3 दिन का वक्त लगता था. लेकिन अब वह महज तीन से चार घंटे में स्केच, पोट्रेट तैयार कर लेते हैं. हर दिन अपना अधिकतर वक़्त स्केचिंग और ड्राइंग करके बिताते हैं. अरुण को मॉडर्न आर्ट और फाइन आर्ट में ज्यादा रुचि है.

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी कर चुके है तारीफ

जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि जेल में मौजूद कैदियों को हुनरमंद बनाना है. जिससे कि वे रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सके और समाज में एक सम्मानित जीवन जी सकें. उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग और कालांतर आर्ट फाउंडेशन द्वारा आयोजित की गई 18 वर्ष से ऊपर की पेंटिंग प्रतियोगिता के फाइनल राउण्ड में नौ प्रतियोगियों में से पाँच प्रतियोगी जिला कारागार गाजियाबाद के थे. जिसमें बंदी अरुण राणा को खुशियों के रंग (कलर आफ ज्वाय) पर बनाई गई पेंटिंग पर विशेष कांसोलेशन पुरस्कार मिला है. उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग हाल ही में जेल मंत्री द्वारा पीएम मोदी को भी भेट की गई थी जिन्होंने इसकी तारीफ की थी. इसके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी पेंटिंग की सरहाना कर चुकी है.

Tags: Ghaziabad News, News18 uttar pradesh, Painting, Prime minister, Prisoners

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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