
अंकित कुमार सिंह/सीवान: जिले के एक ऐसे गांव की हम बात करने जा रहे हैं जहां जाने से पहले उत्तर प्रदेश का रुख करना पड़ता है. उत्तर प्रदेश का रुख करते हुए 70 किलोमीटर की सफर तय करने के बाद बिहार के सीवान जिले के एलासगढ़ गांव में पहुंचा जा सकता है. यह इलाका से सटा हुआ है. इस गांव में जाने के लिए बिहार को यूपी से जोड़ने वाले पीपा पुल का सहारा लिया जाता है. उसके बाद करीब 70 किलोमीटर दूरी तय करके यूपी के रास्ते बिहार इस गांव में जाना पड़ता है. इस गांव में लगभग दो हजार लोग रहते हैं.
सीवान जिले का यह एक ऐसा इलाका है.जो आज भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है. यहां के लोग पूरी तरह से यूपी पर ही निर्भर हैं. अपनी दिनचर्या का सारा काम यूपी में हीं करते हैं. सरकारी कार्यों से लेकर स्वास्थ्य सेवा और किसी भी योजना का लाभ लेने में इन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सीवान जिला मुख्यालय आने में लोगों को 4 से 5 घंटे का वक्त लग जाता है. सीवान एलासगढ़ गांव के बीचो-बीच सरयू नदी के रहने की वजह से उन्हें यूपी होकर बिहार आना पड़ता है. इस गांव में मूलभूत सुविधाओं में न तो सड़क है और न ही बिजली और पानी की व्यवस्था है.
65 से 70 किलोमीटर की दूरी करनी पड़ती है तय
यह इलाका आंदर प्रखंड के पतार पंचायत का वार्ड संख्या 15 और 16 हैं. जो आज एलासगढ़ गांव के नाम से जाना जाता है. यहां की स्थिति ऐसी है कि यहां एक भी चिकित्सीय व्यवस्था नहीं है. सीवान सदर अस्पताल या सीवान मुख्यालय पहुंचने में लोगों को दरौली पीपा पुल के सहारे 70 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करना पड़ता है. ऐसे में इस इलाके के लोग उत्तर प्रदेश इलाज करवाने के लिए जाते हैं. नदी के दूसरी छोड़ का इलाका रहने की वजह से इस इलाके के हजारों लोगों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है. एक पीपा पुल तो दूसरा तरफ रेतीला इलाका के चलते ग्रामीणों को आने-जाने में कठिनाई होती है.
सांसद ने मूलभूत सुविधाएं व्यवस्थित करने की कही बात
अपनी समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने सीवान सांसद कविता सिंह को अवगत कराया था.जिसके बाद सांसद ने बुनियादी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है. इस इलाके में सड़क, सामुदायिक भवन और स्वास्थ्य संबंधित व्यवस्था जल्द ही सुचारू रूप से संचालित कराने का भरोसा ग्रामीणों को दिलाया है. इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं. सांसद से आश्वासन मिलने के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद की एक किरण जगी है कि कहीं न कहीं इनके प्रयास से वर्षों से उपेक्षित गांव का विकास हो सके.
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FIRST PUBLISHED : June 03, 2023, 17:20 IST








