Railway Knowledge: रेल दुर्घटना के बाद क्या लोको पायलट पर लगता है आजीवन प्रतिबंध, कब मानी जाती है चालक की गलती?

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हाइलाइट्स

लोको पायलट सिग्नल के अनुसार ही ट्रेन चलाता है.
चालक द्वारा सिग्नल छोड़ना बेहद दुर्लभ है.
हालांकि, रेलवे की अधिकांश दुर्घटनाएं स्टाफ की गलती से ही होती हैं.

नई दिल्ली. ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार शाम एक बेहद भयानक रेल हादसा हुआ. इसमें अब तक 288 लोगों के मारे जाने की खबर है. वहीं, करीब 1000 से ज्यादा लोग घायल है. यह संख्या आगे और बढ़ सकती है. यह दुर्घटना 3 ट्रेनों के आपस में भिड़ने के कारण हुई. तमिलनाडु से हावड़ा तक चलने वाली कोरोमंडल एक्सप्रेस, यशवंतुपर-हावड़ा सुपरफास्ट और एक मालगाड़ी इस दुर्घटना में शामिल थीं. कोरोमंडल एक्सप्रेसवे पटरी से फिसलने के पास लूप ट्रैक पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई. फिर पटरी से उतरे यही डिब्बे यशवंतपुर हावड़ा सुपरफास्ट से भिड़ गए.

दुर्घटना में यशवंतपुर सुपरफास्ट के तीन जनरल डिब्बे चपेट में आए. वहीं, कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुल 13 डिब्बे दुर्घटनाग्रस्त हो गए जिसमें स्लीपर, एसी और जनरल डिब्बे शामिल हैं. इसकी उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे दिया गया है. एक आरटीआई के अनुसार, ट्रेनों की 57 फीसदी दुर्घटना रेलवे स्टाफ की गलतियों के कारण होती है. कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि ऐसी स्थिति में ट्रेन के चालक की कितनी गलती मानी जाती है. क्या वह दोषी होता है या नहीं. ऐसा बहुत कम ही होता है जब किसी चालक को दुर्घटना के लिए दोषी ठहराया जाए. बेशक पूर्व में ऐसा हो चुका है लेकिन यह बहुत कम बार होता है. लेकिन अगर गलती निकल जाए तब क्या होगा?

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क्या कभी गलत नहीं होते लोको पायलट
ऐसा होना काफी मुश्किल है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोको पायलट सिग्नल के हिसाब से ट्रेन चलाते हैं. उन्हें अगर सिग्नल ग्रीन मिल रहा है तो वह आगे चलेंगे वरना लाल सिग्नल पर गाड़ी रोक देंगे. लोको पायलट सिग्नल लगभग कभी नहीं छोड़ते. लेकिन ट्रेन के पटरी से उतरने के मामले में कई बार लोको पायलट दोषी पाये जाते हैं. ट्रेन अगर निर्धारित गति सीमा से अधिक की स्पीड पर चलती है तो उसके पटरी से उतरने की आशंका बढ़ जाती है. 2022 में दादर-पुद्दुचेरी एक्सप्रेस के 3 डिब्बे पटरी से उतरे थे और इसके लिए चालक की गलती मानी गई थी. लोको पायलट की एक गलती 2011 में भी सामने आई थी. जब चेन्नई बीच-वेल्लौर मीमू के ड्राइवर ने फोन पर बात करते हुए ट्रेन ले जाकर एक खड़ी ट्रेन के डिब्बों में टक्कर मार दी थी. इसमें 12 लोगों की मौत हुई थी. चालक को इस मामले में 10 साल की सजा हुई थी. हालांकि, यह अपनी तरह का अनोखा मामला था, आमतौर पर बात कोर्ट तक नहीं जाती है.

गलती पाए जाए तो?
इस संबंध में न्यूज18 के विशेष संवाददाता शरद पांडेय ने नाम न बताने की शर्त पर रेलवे के एक अधिकारी से बात की. रेलवे अधिकारी ने कहा कि लोको पायलट को जांच शुरू होने से पहले तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाएगा. इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा. कमीशन ऑफ रेलवे सेफ्टी यानी सीआरएस की जांच के सामने उपस्थित होकर उन्हें अपनी सफाई पेश करनी होगी. अगर वह अपने पक्ष में ठीक दलीलें नहीं दे पाए और यह साबित हो गया कि दुर्घटना उनकी लापरवाही के कारण हुई है तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा. इसके बाद वह कभी लोको पायलट के तौर पर काम नहीं कर पाएंगे.

क्या जेल भी होगी
जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि लोको पायलट को जेल होना बेहद दुर्लभ है. विशेष संवाददाता शरद पांडेय के अनुसार, “चालक को सर्विस मैन्युअल के तहत बर्खास्त कर दिया जाएगा. हालांकि, रेलवे कोर्ट नहीं जाएगा क्योंकि अधिकांश रेल दुर्घटनाएं जानबूझकर नहीं की जाती. यह हत्या का मामला नहीं होता है. यह अधिक-से-अधिक मानवीय भूल होती है जिसके लिए वह बर्खास्त कर दिये जाते हैं.” गौरतलब है कि रेलवे की बर्खास्तगी के खिलाफ लोको पायलट कोर्ट में जा सकते हैं.

Tags: Business news in hindi, Indian railway, Railways, Train accident

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Author: Up Head Line

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