चमोली में किसान फूलों से कर रहे कमाई, लीलियम की खेती से बदली किस्‍मत, सरकार देती है 80% सब्सिडी

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सोनिया मिश्रा/चमोली. उत्तराखंड का चमोली जिला अब धीरे धीरे आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है. दरअसल जिले के युवा मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, सब्जी उत्पादन के साथ साथ फूलों की खेती को भी अपना रहे हैं. चमोली के युवाओं को संबंधित विभाग पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं. इन दिनों चमोली जिले के किसान सजावट के लिए सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले फूल लीलियम की खेती से अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं. जनपद में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए और उद्यान विभाग द्वारा लीलियम की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए जिले के 20 किसानों के 1200 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस के अंतर्गत लगभग 25 हजार लीलियम बल्बों का रोपण किया किया था, जिनसे अब उत्पादन शुरू हो गया है. साथ ही अभी शुरुआत में ही किसानों द्वारा करीब 3000 स्टिक तैयार कर बेच दी गई हैं. विभाग द्वारा इसकी मार्केटिंग की भी उचित व्यवस्था की गई है.

चमोली जिले के डॉ डिसूजा ने बताया कि लीलियम प्रायः औषधीय जड़ी बूटियों की सूची में से एक है, जिसे आमतौर पर हिमालयन लिली के रूप में जाना जाता है. चिकित्सा के प्राचीन विज्ञान, आयुर्वेद ने सामान्य दुर्बलता, गठिया, रक्तस्राव विकार, बुखार, ब्रोंकाइटिस और ऐसे अन्य रोगों के इलाज के लिए क्षीरककोली के बल्बों के उपयोग की सिफारिश की है, जो मुख्य रूप से वात और पित्त दोष से संबंधित हैं.

मैदानी क्षेत्रों में लीलियम के फूलों की मांग
उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह ने बताया कि लीलियम का पौधा और फूल सजावट के काम भी आते हैं. जबकि मैदानी क्षेत्रों में हमेशा मांग में भी रहता है. इसके लिए हमने किसानों को 80 फीसदी सब्सिडी के साथ लीलियम बल्बों का वितरण किया था. इसके बाद लगभग 60-70 दिनों बाद फूलों को किसानों ने बेचना भी शुरू कर दिया है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ ही रही है.

Tags: Chamoli News, Farming, Uttarakhand news

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Author: Up Head Line

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