भोपाल. इतिहास गवाह है कि मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में सत्ता चाहे किसी भी दल की रही हो, लेकिन इन राज्यों के सियासी फलक में सहोदर भाई या बहन यानी एक ही पिता की संतानों का जलवा हमेशा बरकरार रहा है. अविभाजित मध्यप्रदेश में राजनीति की धुरी रहे श्यामाचरण-विद्याचरण को कौन भूल सकता है. इसी तरह राघोगढ़ रियासत के दो सगे भाई दिग्विजय सिंह-लक्ष्मण सिंह की जोड़ी आज भी सियासत की पिच पर धमाल मचाए हुए है. सिंधिया राजघराने से स्व. माधवराव सिंधिया रहें हो या उनकी सगी बहनों वसुंधरा-यशोधरा का जिक्र हो, राजनीति के केन्द्र में रहीं इन जोड़ियों को दरकिनार कर कोई भी फैसला करना किसी भी राजनीतिक दल बूते की बात कभी नहीं रही है.
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े हैं. यहां चंद महीनों बाद चुनाव होने हैं. ऐसे में इतिहास के आईने में झांकें तो बरबस ही भाईयों और उन बहनों की याद आ जाती हैं, जिन्होंने अपने रसूख के दम पर राजनीति में अपनी जगह बनाई और आज भी विधानसभा हो या लोकसभा, राज्य हों या दल, सभी जगह अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं.
श्यामा भैया-विद्या भैया की जोड़ी
पं. श्यामाचरण शुक्ल और विद्याचरण शुक्ल मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल की संतान थे. दोनों भाई पिता की ऊंची-पूरी कद-काठी वाले दिखते थे. बड़े भाई श्यामाचरण शुक्ल अविभाजित मध्यप्रदेश के 3 बार मुख्यमंत्री रहे, जबकि विद्याचरण 9 बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले ऐसे सांसद थे, जो कई बार केन्द्र में महत्वपूर्ण विभागों के मंंत्री रहे. इंदिरा गांधी के करीबी, संजय गांधी के दोस्त के रूप में उनकी पहचान थी, लेकिन हमेशा अपने तेवरों के चलते इंदिराजी, राजीव गांधी से लेकर मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह, छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी तक से अक्सर पंगे लेते रहे और कांग्रेस छोड़ते और जनमोर्चा, एनसीपी, भाजपा जैसे दलों में घूम फिर कर कांग्रेस में लौटते रहे. राजनीति में ग्लैमरस नेता के छवि वाले दोनों नेताओं को इनके समर्थक श्यामा भैया-विद्या भैया के नाम से पुकारते थे. एक भाई मध्यप्रदेश में सियासी बैटिंग करता था, तो दूसरा भाई केन्द्र में. शुक्ल बंधुओं के कद पर उनका रूतबा इतना भारी था कि कई ‘महंतों’ और नौसिखियों ने इनके ‘चरणों’ में बैठकर सियासत का क ख ग घ सीखा. दोनों भाई जब तक रहे सत्ता केन्द्र में रहे और राजनीति की धुरी बने रहे. दोनों भाईयों की खास बात यह थी कि यह मीडिया से ‘ऑन रिकार्ड’ बहुत कम, बल्कि ‘ऑफ द रिकार्ड’ ही ज्यादा बात करते थे.
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किशोर कुमार के गाने बैन कर दिए थे
विद्याचरण बहुत तुनकमिजाज और सख्त तेवरों वाले नेता थे, जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान सरकार के समर्थन में गीत गाने से मना करने पर मशहूर सिंगर किशोर कुमार के गाने बैन कर दिए थे. 2013 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सली हमले में विद्याचरण शुक्ल की मृत्यु हो गई थी.
मप्र की सियासत में राजा साहेब, छोटे साहब का जलवा बरकरार
आजादी के बाद राघोगढ़ रियासत तो खत्म हो गई, लेकिन राजा बलभद्र सिंह की दो संतानों दिग्विजय सिंह और लक्ष्मण का सियासत में जलवा लगातार बरकरार है. कांग्रेस के महासचिव और मध्यप्रदेश में दो बार मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को राघोगढ़ की जनता दिग्गी राजा, राजा साहेब या हुकुम के संबोधन से पुकारती है . राघोगढ़ गुना जिले की विधानसभा सीट है, जहां से वर्तमान में दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह विधायक है. राघोगढ़ सीट हमेशा से इसी परिवार के पास रही है. छोटे भाई लक्ष्मण सिंह को छोटे साहेब कहकर संबोधित किया जाता है. वह भी तीन बार मध्यप्रदेश विधायक और कई बार सांसद रह चुके हैं. इन्होंने अपनी राजनीतिक निष्ठा भी बदली. पहले यह भाजपा में शामिल हो गए थे, लेकिन फिर कांग्रेस में लौट आए. राहुल गांधी की भारत छोड़ो यात्रा को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाले लक्ष्मण सिंह को इन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस में नहीं होने की कमी खल रही है. दिग्विजय सिंह हों या लक्ष्मण सिंह दोनों ही मध्यप्रदेश की सक्रिय राजनीति में हैं. दिग्विजय सिंह राज्य में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीतिक और मैदानी तैयारियों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.
राजनीति की धुरी सिंधिया भाई-बहन की तिकड़ी
मध्यप्रदेश, राजस्थान और देश की राजनीति में हमेशा जगमग रहने वाले भाई-बहनों की एक तिकड़ी सिंधिया परिवार से रही है. माधवराव सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया ग्वालियर के अंतिम शासक की संतान के रूप में जन्में. भाई माधवराव सिंधिया कांग्रेस में शामिल हो गए. जबकि बहनों ने अलग राह चुनते हुए भाजपा का दामन थामा. राजस्थान के राजघराने में ब्याही वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं और यशोधरा मप्र की शिवराज सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री है. बता दें कि माधवराव का 22 साल पहले 2001 में एक कार हादसे में निधन हो गया था. उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहले कांग्रेस में थे, लेकिन 2020 में मतभेदों के चलते भाजपा में चले गए थे, आजकल मोदी सरकार में केन्द्र में सिविल एविएशन मिनिस्टर हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 01, 2023, 14:59 IST









