
रायपुर. कड़क चेहरा, जानदार पर्सनैलिटी और चेहरे पर शान से सजी रौबदार मूंछ…, हवलदार से लेकर पुलिस के बड़े-बड़े अफसरों तक के ऐसे चेहरे आपको याद होंगे. लेकिन छत्तीसगढ़ में रहने वाले लोगों को अब ऐसे चेहरे शायद ही कहीं नजर आते होंगे, क्योंकि रौबदार मूंछें रखने वाले पुलिस के जवान या अधिकारी अब नहीं दिखते. अब छत्तीसगढ़ पुलिस को मूंछों पर ताव देने के नाम पर मिलने वाला भत्ता नहीं मिलता है. सरकार ने यह सुविधा बंद कर रखी है.
एक वक्त था जब पुलिसवालों को कड़क मूंछ सहेजने के पैसे मिला करते थे. लेकिन अब पुलिस मुख्यालय हो या थाना चौकी, कहीं भी कड़क मूंछों वाले अफसर या जवान नजर नहीं आते. हर जगह क्लीन-शेव यानी स्मार्ट पुलिस ही आपको दिखेगी. गुंडों-बदमाशों के बीच खौफ पैदा करने से शुरू हुआ कड़क मूंछें रखने का चलन अब ओल्ड-फैशन हो चुका है. इन्हीं कड़क मूंछों के लिए सरकार की ओर से पुलिसवालों को भत्ता दिया जाता था. मगर अब दिन बदल गए हैं. छत्तीसगढ़ में सरकार की ओर से पुलिसवालों को मूंछें संवारने के नाम पर पहले 50 रुपए प्रति माह भत्ता दिया जाता था. बाद के दिनों में इसे बढ़ाकर 120 रुपए कर दिया गया. लेकिन पिछले कुछ समय से सरकार ने यह भत्ता देना बंद कर दिया है.
बिना मूंछों की पुलिस
हट्टे-कट्टे और रौबदार चेहरे वाली पुलिस को देख कर कभी अपराधियों के हौसले पस्त हो जाया करते थे. मगर अब पुलिस का सौम्य और सोशल-फ्रेंडली चेहरा नजर आता है. अधिकांश पुलिसवालों के चेहरे से तो मूंछें ही गायब मिलती हैं. पुलिस के अधिकारी हों या नए-नवेले जवान, शायद ही कोई रौबदार मूंछें रखता है.
मप्र में जारी, छग में बंद है भत्ता
पुलिस विभाग में मूंछ-भत्ता का चलन रहा है. देशभर में पुलिसवालों को रौबदार मूंछों के लिए भत्ता दिया जाता रहा है. जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश की पुलिस को अभी भी मूंछों को सहेजने के लिए भत्ता मिलता है. लेकिन छत्तीसगढ़ में लगभग 20 साल पहले ही यह भत्ता देना सरकार ने बंद कर दिया था. राजधानी रायपुर या प्रदेश के अन्य शहरों में इक्का-दुक्का पुलिस अधिकारी ही रौबदार मूंछों में दिखते हैं. बाकी स्मार्ट पुलिस आपको हर जगह नजर आ जाएगी.









