मनुष्य के पाप-पुण्य का साक्षी कौन, अपने भी नहीं बांटते दुख, जन्म मृत्यु से जुड़ा है इसका संबंध

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हाइलाइट्स

मनुष्य जन्म-मृत्यु के च्रक में अकेला ही फंसता है.
पाप-पुण्य का फल भी अकेला ही भोगता है.

Paap Punya ka Bhagi koun : धार्मिक ग्रंथों में मनुष्य के कर्मों का विशेष महत्व बताया गया है. शरीर एक दिन नष्ट हो जाएगा परंतु हमारे बीच उसके अच्छे कर्मों की वजह से ही वह जिंदा रहेगा या फिर जाना जाएगा. पृथ्वी पर मनुष्य अच्छे और बुरे दोनों तरह के कर्म करता है. अच्छे कर्मों को पुण्य और बुरे कर्मों को पाप के रूप में जाना जाता है. वेद पुराणों में इस विषय को धर्म और अधर्म से जोड़कर बताया गया. धर्म का मतलब पुण्य से और अधर्म का मतलब पाप से जोड़ा गया है. कोई मनुष्य अपने पूरे जीवन काल में, 1 वर्ष में, 1 दिन में या 1 क्षण में जो भी पाप या पुण्य करता है उसे उसका फल जीवित रहते हुए या मृत्यु के बाद भुगतना ही पड़ता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

चाणक्य नीति के पांचवें अध्याय में इस बात का उल्लेख है कि-
जन्ममृत्यु हि यात्येको भुनक्त्येकः शुभाशुभम्।
नरकेषु पतत्येक एको याति परां गतिम्॥

अर्थात – मनुष्य जन्म-मृत्यु के च्रक में अकेला ही फंसता है. पाप-पुण्य का फल भी अकेला ही भोगता है. वो खुद अकेला कई प्रकार के कष्ट भी झेलता है. यहां तक कि मोक्ष की प्रप्ति भी अकेले को ही होती है. क्योंकि इस दुख को उसके माता-पिता, भाई-बंधु, सगे-संबंधी कोई नहीं बांट सकते.

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आपके पाप-पुण्य का साक्षी कौन है

वेद पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति इस दुनिया में अकेला जन्म लेता है मृत्यु के बाद वह अकेला ही परलोक सिधारता है. उसके अपने परिजन मुक्तिधाम जाने से पहले ही छूट जाते हैं. मुक्तिधाम पहुंचने के बाद उसके शरीर का दाह संस्कार कर दिया जाता है. परंतु उस व्यक्ति के पाप और पुण्य कर्म ही उसके साथ जाते हैं जो वह अकेला ही भोग रहा होता है. यहां आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि जब व्यक्ति को इस संसार में अकेले ही आना है और जाना भी अकेले ही है या अगर वह कोई बुरे काम छिपकर करता है तो फिर उसके बुरे कर्मों के यानी पाप और पुण्य के साक्षी आखिर कौन माने जाते हैं.

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14 साक्षी होते हैं पाप-पुण्य कर्म के

शास्त्रों के अनुसार जिस तरह चंद्रमा दिन में और सूरज रात में नहीं दिखाई देता. परंतु दोनों में से कोई एक हर समय जरूर रहता है. वहीं जिस तरह अग्नि लगातार नहीं जलती है. ऐसे ही संसार में कुछ तो ऐसा है जो हमेशा व्यक्ति के साथ मौजूद रहता है. यही कारण है कि जब मनुष्य कोई बुरा कर्म करता है तो उसकी सूचना धर्मदेव देते हैं और उस प्राणी को उसके कुकर्म का दंड जरूर मिलता है. शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अच्छे या बुरे काम करता है तो उसके 14 साक्षी मानें जाते हैं. जिनमें से कोई ना कोई हर समय मनुष्य के साथ मौजूद रहता है. मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्म के 14 साक्षी कौन हैं आइए जानते हैं. दिन, रात, सूर्य, चंद्रमा, अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु, दिशाएं, धर्म, काल, संध्या, आकाश और इंद्रियां.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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Author: Up Head Line

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