Rajasthan Politics: गहलोत-पायलट के बीच सीजफायर क्या राजनीतिक तूफान से पहले की शांति साबित होगा?

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हाइलाइट्स

सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच पहले भी आलाकमान द्वारा कराए गए युद्ध-विराम हो चुके हैं नाकाम
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का सुलह का दावा, लेकिन दोनों नेताओं ने अभी साध रखी है चुप्पी
यह भविष्य के गर्भ में कि दोनों नेताओं के चेहरों पर तो आई मुस्कुराहट रिश्तों में कितनी गर्माहट लाएगी ?

एच. मलिक

जयपुर. राजस्थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच दिल्ली में कथित युद्ध-विराम के बावजूद कई सवाल अभी भी जस के तस सुलग रहे हैं. क्या आलाकमान ने पायलट की तीनों मांगें मान ली हैं? क्या आलाकमान ने किसी मांग को ड्रॉप कर बीच का रास्ता निकाला है? क्या वाकई दोनों नेता विधानसभा चुनाव एकजुटता से लड़ेंगे? क्या जो मीटिंग के बाद दोनों के चेहरों पर मुस्कुराहट दिखी, उसके पीछे रिश्तों की गर्माहट भी है? और सबसे बड़ा सवाल यह भी कि यदि दोनों कद्दावर नेताओं के बीच सहमति हो गई है तो कांग्रेस आलाकमान ने सुलह के फार्मूले को सार्वजनिक क्यों नहीं किया?

गहलोत सरकार को दिया कांग्रेस नेता सचिन पायलट का अल्टीमेटम आज (30 मई) को खत्म हो रहा है. ऐसे में माना जा रहा था कि पायलट सरकार के खिलाफ कोई और कदम उठाएं इससे पहले ही हाईकमान ने इस मुद्दे पर निर्णायक हल जरूर निकालेगा.

आपके शहर से (जयपुर)

दोनों की चुप्पी और मुस्कुराहट का क्या है राज
दिल्ली में गहलोत-पायलट के विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस नेताओं की मैराथन बैठकें हुईं भी. ताकि विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेताओं के बीच चल रही तनातनी पर लगाम लगाई जा सके. पार्टी नेताओं का साफ मानना है कि इन दोनों नेताओं की सियासी अदावत यूं ही चलती रही तो चुनावों में कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसी को देखते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव केसी वेणुगोपाल और राहुल गांधी ने सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट से करीब 4 घंटे की मीटिंग की. इसके बाद मीडिया के सवालों पर सीएम गहलोत और पायलट दोनों चुप रहे और सिर्फ मुस्कुराते रहे. मीडिया में चर्चा रही कि यह चुप्पी और मुस्कुराहट राजस्थान में क्या गुल खिलाएगी?

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सुलह के फॉर्मूले को उजागर न करने पर सवाल
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सुलह का दावा किया है, लेकिन इसके बाद अभी कांग्रेस नेताओं का कोई बयान नहीं दिया है. खासकर अब पायलट के बयान का इंतजार है.क्योंकि किसी ठोस आश्वासन के बगैर पायलट मानने वाले नहीं हैं. पायलट की तीनों मांगों और सियासी मुद्दों पर फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना था. सुलह के फॉर्मूले को उजागर नहीं करके अभी केवल हाईकमान पर फैसला छोड़ने की बात कही है. ऐसे में पायलट और गहलोत की चुप्पी ने कई सियासी सवाल छोड़ दिए हैं.

पहले भी कई बाद युद्धविराम हो चुके हैं नाकाम
वैसे ऐसा पहली बार नहीं है कि कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं के मुस्कराते हुए चेहरों के साथ युद्ध-विराम की घोषणा की है. लेकिन कुछ समय के बाद ही दोनों नेता और उनके समर्थक एक-दूसरे का खिलाफ खुलकर बयानबाजी करने लगते हैं.

  • दिसंबर 2018 में जब विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में ‘कौन बनेगा सीएम’ की रेस हुई थी, तो इसे गहलोत ने जीता और फिर राहुल गांधी के साथ दोनों नेताओं की दिलखुश तस्वीर सामने आई.
  • अगस्त 2020 में मानेसर विद्रोह के समय जब पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने खुलेआम बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था. इसके बाद केसी वेणुगोपाल के साथ दोनों नेता तस्वीर में नजर आए.
  • राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान पहुंचने से पहले दोनों नेताओं के युद्धक मोर्चे पूरी तरह खुले थे. नवम्बर 2022 में राहुल के लिए फिर सीजफायर हुआ. कांग्रेस वॉर रूम में फिर वेणुगोपाल ने एक बार फिर दोनों नेताओं ने साथ मिलकर हाथ खड़े किए.
  • मई 2023 में फिर दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर के बाहर दोनों नेताओं के चेहरों पर तो मुस्कुराहट दिखी, लेकिन उनके रिश्तों में गर्माहट आई या नहीं, यह भविष्य के गर्भ में है?

पेपर लीक के प्रभावितों को मुआवजा अतार्किक-सीएम
काबिले गौर है कि सचिन पायलट ने बीजेपी राज के करप्शन और पेपर लीक के खिलाफ 11 मई से अजमेर से जयपुर के बीच पैदल यात्रा की थी. जयपुर में पदयात्रा के समापन पर महापुरा में की गई सभा में पायलट ने तीन मांगें रखकर 15 दिन में उन पर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया था. पायलट ने पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की सरकार के करप्शन पर हाईलेवल कमेटी बनाने, आरपीएससी को भंग कर पुनर्गठन करने और पेपर लीक से प्रभावित बेरोजगारों को मुआवजा देने की मांग रखी थी. तीनों मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी. गहलोत ने मुआवजा देने की बात को अतार्किक और उनके विधायकों ने तीनों ही मांगों को गैर जरूरी बताया था.

Tags: Ashok Gehlot Vs Sachin Pilot, Assembly election, Rajasthan Congress, Rajasthan news

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Author: Up Head Line

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