कुछ रेलवे स्टेशन के आसपास कम होते हैं घर मकान, बेहद ही खास है वजह, आप भी बनाने से पहले रखें ध्यान

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हाइलाइट्स

समुद्र तल से ऊंचाई को Mean Sea Level कहा जाता है.
दुनियाभर में समुद्र का लेवल एक समान होता है.
यह जानकारी ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड के लिए होती है.

नई दिल्ली. रेल्वे स्टेशन तो बहुत देखें होंगे, साथ ही आपने रेलवे स्टेशन के बोर्ड भी देखें होंगे, जहां उस स्टेशन का नाम लिखा होता है. लेकिन क्या कभी आपने इस बोर्ड पर गौर किया है. रेलवे स्टेशन का बोर्ड हमेशा पीले रंग का ही होता है जिस पर काले रंग से स्टेशन का नाम लिखा होता है. रेलवे के प्लेटफॉर्म पर लगे पीले रंग के बोर्ड पर तीन भाषाओं- अंग्रेजी, हिन्दी और स्थानीय भाषा में उस स्टेशन का नाम बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है.

स्टेशन के नाम के ठीक नीचे उस जगह की समुद्र तल से ऊंचाई से संबंधित जानकारी भी लिखी होती है. क्या आपने सोचा है रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर इस सूचना का क्या काम है? क्या ये बस जानकारी मात्र के लिए लिखा होता है या इसका कोई खास मतलब होता है. अगर आप इस बारे में नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं इसके पीछे क्या कारण है.

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क्यों लिखी होती है समुद्र तल से ऊंचाई
समुद्र तल से ऊंचाई को Mean Sea Level कहा जाता है. दुनियाभर में समुद्र का लेवल एक समान होता है, इसलिए Altitude यानी ऊंचाई को सटीक तरीके से नापने के लिए समुद्र तल को आधार माना जाता है. समुद्र तल से रेलवे स्टेशन की ऊंचाई से जुड़ी जानकारी यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड के लिए होती है. दरअसल, इससे उन्हें ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने या कम करने से जुड़ा फैसला लेने में मदद मिलती है.

घर-मकान बनाने से पहले इसे देखना है बेहद जरूरी
भविष्य में किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए ये बेहद जरूरी है. समुद्र से ऊंचाई की जानकारी के आधार पर ही संबंधित रेलवे स्टेशन के आस-पास भवन आदि के निर्माण को प्लान किया जाता था ताकि कोई हादसा ना हो. ऐसे में अगर आप भी किसी रेलवे स्टेशन के आसपास घर बनाने वाले हैं तो इसे देखने के बाद उस हिसाब से ही अपना प्रोजेक्ट तैयार करवाएं.

ट्रेन की स्पीड में भी मिलती है मदद
शुरुआत में भारतीय रेल के स्टेशन बन रहे थे, तब समुद्र तल से ऊंचाई की जानकारी रेलवे स्टेशन बनाने और रेल लाइन बिछाने में सहायक होती थीं. इस जानकारी के आधार पर निर्माण से बाढ़ और हाई टाइड की संभावना कम की जाती थी. इस जानकारी की मदद से ट्रेन ड्राइवर आसानी से यह निर्णय ले सकता है कि इतनी अधिक चढ़ाई को चढ़ने के लिए उसे इंजन को कितनी पॉवर देनी पड़ेगी. वहीं, जब नीचे की ओर जाएगी तो ड्राइवर को पता चल जाता है कि कितना फ्रिक्शन लगाना होगा और कितनी स्पीड रखने की जरूरत है.

Tags: Indian Railways, Railway Board, Railway Knowledge, Railway Station

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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