आवासीय हो सकते हैं हमारी गैलेक्सी के एक तिहाई ग्रह

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बहुत पहले से ही यह माना जाता रहा है कि जितना विशाल हमारी हमारा ब्रह्माण्ड और गैलेक्सी तक है यह मानना गलत होगा कि मिल्की वे में पृथ्वी के अलावा कोई और आवासीय ग्रह हो ही नहीं सकता है. हमारी अपनी गैलेक्सी मिल्की वे में बहुत सारे तारे हमारे गर्म पीले सूर्य की तुलना में छोटे और ठंडे हैं और इनका भार भी सूर्य से करीब आधा ही है. ऐसे तारों के चक्कर लगाने वाले ग्रहों की संख्या अरबों में है. ऐसे में नए अध्ययन ने इस बात की पड़ताल की है कि इनमें से कितने ग्रह आवासीय हो सकते हैं. पाया गया है कि अधिकांश ग्रह अपने तारे के पास होने के कारण बहुत ही ज्यादा गर्म हैं या जल गए हैं, लेकिन एक तिहाई आवासीय हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

मिल्की वे के इन अरबों ग्रहों के आवासीय होने के लिए उन्हें अपने छोटे तारों के पास होगा, लेकिन इससे उन्हें बहुत ही ज्यादा ज्वारीय बल का सामना करना होगा. यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरीडा के खगोलविदों की अगुआई में शोधकर्ताओं की एक टीम ने नासा के केप्लर और ईसा के गाइया टेलीस्कोप के द्वारा जमा किए आंकड़ों के उपयोग से अध्ययन कर पाया है कि मिल्की वे के छोटे तारों का चक्कर लगाने वाले दो तिहाई ग्रह ज्वारीय बलों के कारण इतने जल गए हैं कि वे आवासीय नहीं हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock) लेकिन इन ग्रहों की संख्या में एक तिहाई यानि करीब 10 करोड़ ग्रह हमारी गैलेक्सी में ऐसे हैं जिन्हें तथाकथित गोल्डीलॉक कक्षा में स्थित पाया जाना माना जा सकता है. यानि ये ग्रह इतने ठंडे नहीं हैं कि इनमें तरल पानी बर्फ में जम जाए और इतने गर्म नहीं होने चाहिए कि पानी भाप में बदल जाए. इसलिए ये ग्रह जीवन के लिए बहुत ही अनुकूल हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock) अध्ययन की प्रमुख लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरीडा में एस्ट्रोनॉमी की डॉक्टोरल छात्रा शीला सेजियर का माना है कि यह नतीजा अगले दशक के बाह्यग्रहों की खोज के लिए बहुत अहम होगा क्योंकि अब शोधकर्ताओं का ध्यान तारों की जनसंख्या के इसी हिस्से पर होगा जिनके छोटे ग्रह ऐसी स्थतियों में हैं और ग्रहों के आवासीय होने की संभावना ज्यादा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock) विशेषज्ञों ने इन एम श्रेणी के बौनों का चक्कर लगा रहे करीब एक 150 से ज्यादा ग्रहों की उत्केंद्रता का मापन किया जिनका आकार लगभग गुरु ग्रह की तरह था. ग्रहों की कक्षा जितनी ज्यादा अंडाकार होगी उनकी उत्केंद्रता उतनी ही ज्यादा मानी जाती है. जब ग्रह तारे के पास रह कर उसका चक्कर लगाता है, तो उत्केंद्रता वाली कक्षा में ज्वारीय गर्मी की प्रक्रिया हो जाती है. अनियमित कक्षा के कारण गुरुत्व के बल में विविधता आ जाती है जिससे ग्रह में खिंचाव और आकार में विकृति देखने को मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) उत्केंद्रता और अंडाकार कक्षा से इस तरह की स्थितियों में तापमान में इजाफा होने लगता है और इससे होता यह है कि ग्रह बहुत ही ज्यादा गर्म हो जाता है और पानी की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाती है. ऐसा केवल इन्हीं छोटे तारों में होता है कि आवासीय क्षेत्र इतना पास होता है जिससे ज्वारीय बल प्रभावी हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock) पड़ताल से खुलासा हुआ कि बहुल ग्रह वाले तारों के की कक्षाएं वृत्ताकार हो सकती हैं. ऐसे में उनमें तरल पानी होने की संभावना अधिक होती है. वहीं अगर ऐसे तरे का एक ही ग्रह तो वह चरम ज्वारी प्रभाव झेलता है जिससे वहां तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है. चूंकि एक तिहाई ग्रहों में ऐसी कक्षा होती है जिससे वहं तरल पानी हो सकता है, ऐसे करोड़ों ग्रह हो सकते हैं जहां जीवन विकसित हो सकता है. अध्ययन PNAS जर्नल में प्रकाशित हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

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Author: Up Head Line

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