
शक्ति सिंह/ कोटा. भैरव महाराज की पूजा करने से मनोकामनाएं तो पूर्ण होती ही हैं वहीं ये भी माना जाता है कि इससे भक्त की उम्र भी बढ़ती है. ऐसे में भैरव जयंती पर अलग-अलग भैरव मंदिरों में विशेष आयोजन हो रहा है. कंसुआ में कर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर स्थित भैरव मंदिर में विशेष श्रृंगार किया गया. भैरव बाबा का 251 रजत वर्क से श्रृंगार किया गया. बड़ी संख्या में श्रद्धालु भैरव बाबा के दर्शन करने पहुंचे. मंदिर जयकारों से गूंजायमान होते रहे.
पुजारी अनिल गिरी गोस्वामी ने बताया कि सुबह मंत्रों की गूंज के साथ 21 लीटर दूध से भगवान का अभिषेक किया गया और भैरव बाबा का विशेष श्रृंगार कर फूलों से बाबा की झांकी सजाई गई. भैरव मंदिर में मौजूद माताजी की प्रतिमा का भी विशेष श्रंगार किया गया. दोपहर महाआरती होगी उससे पहले पहले हवन में श्रद्धालुओं ने खुशहाली की कामना करते हुए आहुतियां दीं जाएगी. भगवान को 500 किलो हलवा, 50 किलो चने, 501 कचौरियों का भोग लगाया. महाआरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया.
कर्णश्वर महादेव मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में हुआ था, लेकिन आज भी ये पहले जैसा ही है. यहां भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ विराजे हुए हैं. इस मंदिर में शंकर भगवान की पुत्री अशोकासुंदरी और उनकी पहली पत्नी देवी सती भी मौजूद हैं. करीब 1500 साल पहले मौर्य शासन में 738 वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है.








