
कृष्ण कुमार/नागौर. कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले भगवान शिव की चमत्कारिक शक्तियों से सभी परिचित हैं. राजस्थान के नागौर की भूमि भी इससे अछूती नहीं है. मान्यता है यहां पर भोलेनाथ ने स्वयं आकर भक्तों को दर्शन दिये थे. नागौर स्थित शीलगांव का पंचमुखी महादेव ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि महादेव ने यहां एक भक्त को दर्शन दिए थे. यह बात विक्रम संवत 1682 की है जब शीलगांव के रहने वाले एक दिव्यांग व्यक्ति जो जाति से खाती था, भगवान शिव ने स्वयं उसके घर आकर पीने के लिए पानी मांगा. तब भक्त ने ईश्वर से कहा था कि मैं तो विकंलाग हूं, आप वहां पर पानी से भरी हुई मटकी है, उसमें से पानी पी लें. तब भगवान ने कहा कि आप जाओ और पानी लेकर आओ. इसके बाद, भक्त जैसे ही उठा तो उसके पैर ठीक हो गए. भक्त खुशी-खुशी पानी लेकर आया, लेकिन तक महादेव अंतर्ध्यान हो गये थे.
भक्त ने दर्शन के लिए पुन: भगवान से प्रार्थना की. जिसके बाद शिव जी ने सपने में आकर कहा कि गुच्चों के खेत में मेरी मूर्ति जमीन के नीचे दफन है. वो मूर्ति निकाल कर दर्शन कर लो, तो भक्त ने कहा कि मुझे कैसे पता चलेगा कि आपकी मूर्ति वहां पर है. तब भगवान शिव ने कहा जहां पर जाकर बैल रुकेंगे, वहीं मेरी मूर्ति है. इस प्रकार, इस स्थान पर आकर बैल रुक गए और खेत की जमीन से मूर्ति निकली. जहां यह पंचमुखी महादेव का मंदिर बनाया गया.
ग्रामीणों का पंचमुखी मंदिर को लेकर मानना है कि इस गांव में कोई भी व्यक्ति गोल झोपड़ा नहीं बना सकता. अगर बना भी लेता है तो वो झोपड़ा जल जाता है. इस मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा पर जो जल चढ़ाते हैं, वो कहां जाता है किसी को पता नहीं चलता है. गांववालों का मानना है कि यहां बहुत बड़ी बावड़ी है जो प्रतिमा के नीचे बनी हुई है.
इसके अलावा, अगर गांव में बारिश नहीं होती है तो ग्रामीण सभी मिलकर महादेव से अरदास करते हैं तो बारिश हो जाती है. इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बड़ले (वट) का पेड़ लगा हुआ है जो एकदम हरा-भरा है. लोगों का मानना है कि यहां हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है.
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FIRST PUBLISHED : May 30, 2023, 12:47 IST








