MP News: ये है राजा-महाराजाओं का बाउंसिंग डांसिंग फ्लोर, जहां विदेशी मेहमान भी लगाते थे ठुमके

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 राहुल दवे/इंदौर: वैसे तो आप सभी ने लालबाग देखा होगा और इसके बारे में सुना भी होगा. होलकर रियासत में बनाया गया लाल बाग 72 एकड़ में फैला है , जो अपनी भव्यता, कलात्मकता, सुंदरता का नायब उदाहरण है.  कुछ ही लोगों को पता होगा की परिसर में एक डांस फ्लोर भी बना है, जो अपने आप में एक अलग और अनुठा है. इसके चलते यहां पर विदेशी राज्य के राजा और राज दरबारी अपनी रानी के साथ डांस का आनंद लेने आते थे.इंदौर ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में इसके जैसा डांस फ्लोअर अभी तक नहीं बना है.इसके निमार्ण में रोमन शैली, पेरिस के राजमहलों वाली सजावट, बेल्जियम की कांच कला, कालत्मक झाड़ फानुस, कसारा संगमरमर के स्तंभ है. हॉल में छतों पर निहायत ही खूबसूरत पेंटिंग देखी जा सकती है. इसके अलावा कीमती कलात्मक फर्नीचर और गलीचों से इसकी साज-सज्जा रात में अलग सी दिखाई देती है.

हाईटेक युग को भी छोड़ा पीछे
वैसे तो हाईटेक युग में डांस फ्लोर कई तरह की लाइट, साउंड और इंटीरियल के कारण अपने आप में अलग पहचान रखता है. इंदौर का लालबाग भव्यता, कलात्मकता, सुंदरता, लाइट, साउंड के साथ बाउंसिंग के लिए अपने आप में पहचाना जाता है.

वुडन के साथ स्प्रिंग का तालमेल
डांस फ्लोर वुडन का बना है और फ्लोर के नीचे स्प्रिंग लगी हुई है.वहीं स्प्रिंग के नीचे कॉलम खड़े किए गए है. यहां लगा वुडन और स्प्रिंग काफी मजबूत हैं. 18 इस्वी से अब तक वुडन और कॉलम के बिच स्प्रिंग का तालमेल और मजबूती आज भी वैसे ही है जो शुरुआत में थी.यही स्प्रिंग इसे बाउंसिंग करने में सहयोग करता है. इसके चलते डांस करने वालों को अलग ही आनंद की अनुभूती मिलती थी.आर्कषण लाइट, साउंड के साथ डांसिग में बाउंसिंग का एक अलग ही संयोग की डिजाइन की कल्पना उस समय की थी जब इस बारे में ज्यादातर लोगों को पता नहीं हुआ करता था. छत पर लगा लगा विशाल झुमर आकर्षक का केंद्र है.

एक बार में 60 से 70 कपल उठाते थे आनंद
फ्लोर की लंम्बाई और चौड़ाई इतनी है कि एक बार में करीब 80 कपल इसमें डांस करते सकते हैं. वहीं जब इतने कपल एक साथ यहां पर डांस करते हैं तो यह फ्लोर बाउंस होता है, जिसके चलते डांस के आनंद अपने आप में अनुठा हो जाता है. यहीं कारण से लाल बाग में रात को लगने वाली महफील की शान होती थी. इसके लिए कई राजा महाराज इंदौर के लालबाग में पहुंचने के बाद यहां शाम को सजने वाली महफील का इंतजार करते थे.

एक नजर इधर भी
लालबाग को बनाने की योजना तुकोजीराव द्वितीय के शासन काल में 1877 में राज्य के इंजीनियर मिस्टर केरी ने की थी. इसका निर्माण युवराज शिवाजीराव होलकर के निवास के लिए किया गया था. 1884 तक महल बनकर तैयार हो गया. 1911 तक लालबाग पैलेस को यूरोपीय स्वरूप दिया गया. 1992 में महल की साज-सज्जा फिर की गई और इसके परिसर में 1936 से लेकर 1938 के बीच 1600 प्रजातियों के गुलाब लगाए गए थे.

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FIRST PUBLISHED : May 29, 2023, 17:31 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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