
ट्रांसमिशन लाइन को तो सभी ने कभी न कभी देखा ही होगा. अगर नहीं तो कहीं टीवी पर या चित्र तो ज़रूर देखा होगा. ट्रांसमिशन लाइन लाइट को ट्रांसमिट करती है, और ये लाखों वोल्ट के साथ काम करता है. ट्रांसमिशन लाइन को देख कर आपके मन में कभी न कभी तो ये ख्याल आया होगा कि अगर ये टूट जाए तो इससे क्या होगा.
सबसे पहले ये जानना ज़रूरी है कि नॉर्मल कंडीशन में ट्रांसमिशन लाइन का टूटना लगभग नामुमकिन है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये एलमिनियम कंडक्टर स्टील-रिइंफोर्सड (ACSR) से बना होता है. एलूमिनियम के कंडक्टर में बीच में स्टील दी जाती है जो इसको ज़्यादा मज़बूत बनाने में मदद करता है.
किसी ट्रांसमिशन लाइन का टूटना तभी संभव है जब कोई प्राकृतिक आपदाएं हो जाएं. अगर कोई व्यक्ति टूटे हुए वायर के आस पास हो तब क्या होगा. अगर हाई वोल्टेज वायर टूट कर गिरा हुआ है तो उसके क्षेत्र में हाई वोल्टेज करंट फैल जाता है.
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जहां ये तार गिरता है, वहां ये आसपास ये फैल जाता है. उदाहरण के तौर पर अगर कंडक्टर 1 लाख पावर को ट्रांसमिट रहा था तो जहां भी ये गिरा है तो उसके थोड़ी दूर पर ये 80,000 वोल्ट होगा, थोड़ा और आगे जाने पर 60,000 वोल्ट होगा, और ऐसे ये कम होता जाएगा. जहां तक पावर है, उसके कॉन्टैक्ट में आने पर व्यक्ति को जोर का झटका के साथ साथ मौत भी हो सकती है.
कंडक्टर के गिरने पर तीन बातें हो सकती हैं. पहला ये कि जो कंडक्टर गिरा है, वह दूसरे कंडक्टर पर गिर जाए. ऐसा होना मुमकिन है क्योंकि साथ ही कई कंडक्टर होते हैं, और अगर ऐसा होता है तो इसके टेक्नीकल भाषा में ‘लाइन टू लाइन’ फॉल्ट कहा जाता है.
Line to Ground Fault क्या होता है?
दूसरा अगर ये कंडक्टर जमीन पर गिर जाए तो इसे ‘लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट’ कहा जाता है. इसके अलावा अगर ये कंडक्टर किसी टावर पर टच हो रहा है तब भी उसे ‘लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट’ ही कहा जाता है.
अगर कंडक्टर जमीन पर गिरा है, या फिर दूसरी लाइन पर गिर गया है तो वह सप्लाई स्टेशन से बहुत ज़्यादा करंट डिमांड करता है. यानी कि कंडक्टर में बहुत ज़्यादा करंट फ्लो होने लगता है. ऐसे स्थिति में आपका कॉपर लॉस होने लगेगा. सिस्टम में गड़बड़ी होने लगेगी और इलेक्ट्रिक डिवाइस के खराब होने का खतरा भी हो जाएगा.
हमने सुना है कि करंट फ्लो होने के लिए एक क्लोज पाथ का होना जरूरी है. अगर क्लोज पाथ कहीं से ब्रेक है तो करंट का फ्लो रुक जाएगा.
वायर टूटने से सर्किट ब्रेक नहीं होता क्योंकि वो ट्रांस फार्मर जहां से करंट सप्लाई किया जाता है वह 3 फेज में भेज रहा होता है और न्यूट्रल वायर को ग्राउंड कर दिया जाता है, यानि की सर्किट वहीं पर पूरा हो चुका है. जैसे ही वायर टूट कर ग्राउंड से टच होगा उसे न्यूट्रल मिल जाएगा और तेजी से करेंट फ्लो होना शुरू हो जाएगा.
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FIRST PUBLISHED : May 29, 2023, 14:40 IST








