
हाइलाइट्स
ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 3 जून शनिवार को सुबह 11 बजकर 16 मिनट से शुरू हो रही है.
इस दिन सुबह से ही शिव योग का निर्माण हो रहा है.
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रखते हैं. वट सावित्री पूर्णिमा व्रत को वट पूर्णिमा भी कहते हैं. यह व्रत महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में रखा जाता है. उत्तर भारत में वट सावित्री पूर्णिमा व्रत से 15 दिन पूर्व वट सावित्री अमावस्या व्रत रखा जाता है. उस दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है. उत्तर भारत के राज्यों में वट सावित्री अमावस्या का व्रत इस साल 19 मई को था. इस बार वट सावित्री पूर्णिमा पर 3 शुभ योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन पूजा पाठ के लिए सुबह और दोपहर में मुहूर्त है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि वट सावित्री पूर्णिमा व्रत कब है और पूजा का मुहूर्त क्या है?
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2023 तिथि
पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 3 जून शनिवार को सुबह 11 बजकर 16 मिनट से शुरू हो रही है. यह तिथि अगले दिन 4 जून रविवार को सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत 3 जून शनिवार को रखा जाएगा. इस दिन वट वृक्ष, सावित्री और सत्यवान की पूजा होगी.
वट सावित्री पूर्णिमा पर 3 शुभ योग
3 जून को वट सावित्री पूर्णिमा के दिन 3 शुभ योग बने हैं. इस दिन सुबह से ही शिव योग का निर्माण हो रहा है, जो दोपहर 02 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. शिव योग तप, साधना के लिए उत्तम माना जाता है. उसके बाद से सिद्धि योग शुरू हो जाएगा. यह दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से पूरी रात तक है.
इन दोनों योग के अलावा उस दिन रवि योग भी बना है, हालांकि यह योग 1 घंटे से कम समय तक रहेगा. रवि योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 06 बजकर 16 मिनट तक है. वट सावित्री पूर्णिमा के दिन विशाखा नक्षत्र सुबह 06 बजकर 16 मिनट तक है और उसके बाद से अनुराधा नक्षत्र है, जो अगली सुबह 05 बजकर 03 मिनट तक है.
वट सावित्री पूर्णिमा 2023 पूजा मुहूर्त
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत के पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह में 07 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 51 मिनट तक है, यह शुभ उत्तम मुहूर्त है. इसके बाद दोपहर में पूजा का मुहूर्त 12 बजकर 19 मिनट से शाम 05 बजकर 31 मिनट तक है. इसमें भी लाभ-उन्नति मुहूर्त 02:03 बजे से 03:47 बजे तक है. अमृत-सर्वोत्तम 03:47 बजे से शाम 05:31 बजे तक है.
वट सावित्री पूर्णिमा पर स्वर्ग की भद्रा
3 जून को वट सावित्री पूर्णिमा वाले दिन भद्रा लग रही है, जो सुबह 11 बजकर 16 मिनट से रात 10 बजकर 17 मिनट तक है. इस भद्रा का वास स्वर्ग में है, इसलिए इसका दुष्प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं होता है.
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत का महत्व
वट सावित्री अमावस्या की तरह ही वट सावित्री पूर्णिमा व्रत करने से भी अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है. इस दिन सुहागन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष, सावित्री और सत्यवान की पूजा करती हैं, जिससे पति की आयु लंबी होती है. दांपत्य जीवन खुशहाल होता है.
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Tags: Dharma Aastha, Vat Savitri Vrat
FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 06:48 IST








