
निखिल स्वामी/बीकानेर. बीकानेर की पाटा संस्कृति पूरी दुनिया में विश्व प्रसिद्ध है. आमतौर पर बीकानेर में पाटे के पैर (पाये) चार होते है लेकिन बीकानेर के कोचरो के चौक ने इस पाटे के सात पैर हैं. ऐसे में इस पाटे पर एक साथ 25 लोग बैठ जाते हैं. यह पाटा काफी बड़ा है. शाम होते ही लोग इन पाटों पर बैठना शुरू कर देते है जो देर रात तक बैठे रहते है. यहां स्थानीय मुद्दों के अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दो पर भी चर्चा होती है.
कोचरों के चौक निवासी जितेंद्र कोचर में बताया की यह पाटा करीब 115 साल पुराना है. स्थानीय लोग इस पाटे को सप्त पद पाटा भी कहते है. पूरे बीकानेर में इस तरह का पाटा नहीं है. इस पाटे पर अनेक तरह के मनोरंजक कार्यक्रम होते है. इस पाटेको देखने के लिए देश विदेश से सैलानी आते है और इस पर बैठकर स्थानीय लोगों से बातचीत भी करते हैं.
मोहल्ले की प्रमुख बैठक होती है पाटा
जितेंद्र ने बताया कि चौक के निवासी सुबह से शाम तक अपनी दुकानों और ऑफिस का काम खत्म करके आते है और घर पर खाना खाने के बाद शाम को पाटे पर आकर बैठते है. जो देर रात तक बैठे रहते है. ऐसे में इस शहर को पूरी रात तक जागने वाला शहर भी कहा जाता है. इस पाटे पर बैठ कर वे पूरी दिन देश विदेश की घटनाओं का जिक्र करते है और सभी अपनी अपनी राय देते है. हाल ही शहर के पाटो पर 2000 के नोट को लेकर काफी चर्चा चल रही है. इसके अलावा कई मनोरंजन के खेल भी खेले जाते है.
लकड़ी का बना पाटा, करते है देखभाल
निवासी जितेंद्र ने बताया कि यह पाटा लकड़ी का बना हुआ है. यह चार से पांच फ़ीट ऊंचा है और 8 फ़ीट लंबा है. इस पाटे की देखभाल पूरे मोहल्ले के लोग मिलकर करते है. कुछ साल पहले मोहल्ले के लोगों ने मिलकर पाटा के 100 साल पूरा होने पर कार्यक्रम भी किया गया.
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FIRST PUBLISHED : May 25, 2023, 15:59 IST








