
प्रदीप साहू/चरखी दादरी: 7 लाख रुपये के पैकेज की नौकरी नहीं की, लेफ्टिनेंट व असिस्टेंट कमांडर के पद पर चयन हुआ तब भी नौकरी नहीं की. IAS बनने के सपने को पूरा करने के लिए फोन और सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली. कोचिंग का सहारा भी नहीं लिया और तीसरी बार में यूपीएससी की परीक्षा में 77वीं रैंक हासिल कर ली.
सफलता की यह कहानी है चरखी दादरी के गांव झिझंर के सुनील फोगाट की है. सुनील की सफलता के बाद माता-पिता बहुत खुश हैं. गांव में खुशी का माहौल है. परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई. साथ ही ग्रामीणों ने सुनील के गांव लौटने पर सम्मान समारोह करने का निर्णय लिया. कहा कि उसका जमकर स्वागत होगा.
तीसरी बार में हासिल की सफलता
सुनील ने यूपीएससी की परीक्षा में देशभर में 77वीं रैंक हासिल की है, लेकिन यह इतना भी आसान नहीं था. सुनील ने तीसरी बार में इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की. पहली बार परीक्षा में नहीं बैठ पाए थे और दूसरी बार इंटरव्यू पास नहीं कर पाए. लेकिन कभी हर नहीं मानी और तीसरी बार में सफलता हुए.
गांव के बेटे ने नाम किया रोशन
वहीं सुनील की इस उपलब्धि पर गांव झिंझर में परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मिठाइयां बांटी और जश्न मनाया. सुनील के गांव लौटने पर उसको सम्मानित करने का निर्णय लिया. इस दौरान परिजनों व ग्रामीणों ने कहा कि गांव की बेटे ने क्षेत्र, जिला व प्रदेश का नाम रोशन किया है.
मां-बाप को गर्व
सुनीता के पिता सेना में सूबेदार मेजर के पद से रिटायर्ड हैं और मां गृहणी हैं. पिता ने बताया कि उन्हें बेटे की सफलता पर गर्व है. सुनील ने बिना कोचिंग के तीसरी बार में सफलता प्राप्त की है. सुनील ने लेफ्टिनेंट व असिस्टेंट कमांडर की नौकरी नहीं की, बीटेक करने के बाद 7 लाख रुपये का पैकेज भी ठुकरा दिया. वहीं माता अनिता देवी व दादा मायाराम ने कहा कि बेटे ने परिवार व गांव का नाम रोशन किया है. बेटे के आईएएस बनने से उन्हें खुशी है.
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FIRST PUBLISHED : May 24, 2023, 17:06 IST








