( _समग्र हिन्दी-व्याकरण-कौमुदी_ )
शिक्षक व लेखक रण विजय निषाद की कलम से….
*पाठ्य-क्रम*
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*१– भाषा-परिचय :*
मातृभाषा, राष्ट्रभाषा, राजभाषा, भाषा का विकास ( कालखण्ड ), संस्कृत (SAMSKRIT) भाषा, पाली भाषा, प्राकृत भाषा, अपभ्रंश भाषा, हिन्दी भाषा।
*२– ध्वनि-विचार :*
आहत और अनाहत नाद, संयुक्ताक्षरों का उच्चारण ( संयुक्त, सम्पृक्त, युग्मक ध्वनि ) भाषा, लिपि।
*३– वर्ण-विचार :*
वर्ण, स्वरवर्ण ( ह्रस्व, दीर्घ, संयुक्त और अयोगवाह), व्यञ्जनवर्ण ( स्पर्श, अंतःस्थ, ऊष्म, संयुक्त, मिश्र, द्विगुण अथवा उत्क्षिप्त व्यञ्जन ), अक्षर, मिश्र व्यञ्जन; स्वरों के उच्चारण में मुखाकृति, मूल स्वर, सन्धि स्वर, मान स्वर; अघोष अक्षर, घोष अक्षर, अल्पप्राण वर्ण, महाप्राण वर्ण, अक्षरों का उच्चारण-स्थल, पाई वाले व्यञ्जन, घुण्डी वाले व्यञ्जन, गोलाकार व्यञ्जन; वर्ण-विच्छेद, स्वरवर्णों के मात्रा चिह्न; स्वर : एक दृष्टि में, व्यञ्जन : एक दृष्टि में।
*४– चिह्नों की पाठशाला :*
अल्पविराम-चिह्न ( , ), अर्द्धविराम-चिह्न ( ; ), उपविराम-चिह्न ( : ), पूर्णविराम-चिह्न ( । ), योजक-चिह्न ( – ), निर्देशक-चिह्न ( — ), विवरण-चिह्न ( :–), प्रश्नवाचक-चिह्न ( ? ), विस्मयादिबोधक-चिह्न ( ! ), उद्धरण-चिह्न ( ‘—-‘ अथवा “—-” ), कोष्ठक-चिह्न ‘( ), { }, [ ]’, लोप-चिह्न ( ×××× ), लाघव-चिह्न ( ० ), समानता/तुलनात्मक-चिह्न ( = ), हंसपद-चिह्न ( ^ ), तारक/पादटिप्पणी-चिह्न ( ****, || ), प्लुतस्वर-चिह्न ( कूूँ३ — कूँूूू ू ू या रे३ — रे े े े )।
*५– शुद्ध-अशुद्ध शब्द।*
*६– वर्ण और मात्रा सम्बन्धी दोष-निवारण:*
‘ये’ और ‘ए’, ‘यी’ और ‘ई’, ‘ट’ और ‘ठ’, ‘ड़’ और ‘ढ़’, ‘क्ष’ और ‘छ’, ‘ऋ’ और ‘र’, ‘श’, ‘ष’ और ‘स’, ‘ड़’ और ‘ण’ के उच्चारण और लेखन-कौशल, चन्द्रबिन्दु ( ँ ) और अनुस्वार ( ं ) का प्रयोग।
‘र’ के रूप अनेक, नासिक्य व्यञ्जन ‘म्’, अंतःस्थ व्यञ्जन ( य्, र्, ल्, व् ) के अन्य रूप; अर्द्धस्वर (य्, र्, ल्, व् ), प्रकम्पित व्यञ्जन ( र् ), पार्श्विक व्यञ्जन ( ल् ), नासिक्य व्यञ्जन ( ङ्, ञ, ण्, न्, म् )।
*७– बलाघात :*
शब्द-बलाघात, वाक्य-बलाघात।
*८– शब्द-ज्ञान-गङ्गा :*
सार्थक-शब्द, निरर्थक-शब्द, तत्सम-शब्द, तद्भव-शब्द, देशज-शब्द, विदेशज-शब्द, संकर-शब्द, रूढ़-शब्द, यौगिक-शब्द, योगरूढ़-शब्द; अभिधा, लक्षणा, व्यञ्जना, विकारी-अविकारी-शब्द।
*९– पञ्चमाक्षर का नियम ।*
*१०– ‘और’, ‘एवं’, ‘तथा’, ‘आदि’, ‘इत्यादि’ का प्रयोग।*
*११– ‘त्व’ और ‘त्त्व’ वाले शब्द-प्रयोग।*
*१२– उपसर्ग :*
संस्कृत (Samskrit)-उपसर्ग, हिन्दी-उपसर्ग, अभारतीय ( अंगरेज़ी )-उपसर्ग।
*१३– प्रत्यय :* कृत् प्रत्यय, तद्धित प्रत्यय।
*१४– वाक्य-गठन :*
उत्तम-वाक्य की विशेषताएँ, शब्द-क्रम, वाक्य के भेद — साधारण, संयुक्त और मिश्रित-वाक्य, वाक्य-संश्लेषण, वाक्यांश ( उद्देश्य और विधेय )।
*१५– अलंकार-परिचय :*
परिचय, अलंकार के भेद, शब्दालंकार ( अनुप्रास, यमक, श्लेष और वक्रोक्ति ), अर्थालंकार ( उपमा, रूपक, प्रतीप, उत्प्रेक्षा, व्यतिरेक, भ्रान्तिमान, सन्देह, अन्योक्ति, अतिशयोक्ति ); भ्रान्तिमान और सन्देह में अन्तर।
*१६– संज्ञा-विचार :*
परिभाषा, संज्ञा के भेद, लिंग-परिचय, वाक्यों में लिंग-निर्धारण, प्रत्यय से बनने वाले स्त्रीलिंग-शब्द, पुंल्लिंग-शब्दों की परख, स्त्रीलिंग-शब्दों की परख, पुंल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम।
*१७– वचन-परिचय :*
परिभाषा एकवचन, बहुवचन, वचन-रूपान्तरण-नियम, उर्दूभाषा के प्रचलित शब्दों के बहुवचन।
*१८– कारक-परिचय :*
परिभाषा, कारक, विभक्तियाँ एवं चिह्न और सम्बन्ध; कर्त्ताकारक, कर्मकारक, करणकारक, सम्प्रदानकारक, अपादानकारक, सम्बन्धकारक, अधिकरणकारक, सम्बोधनकारक।
*१९– सर्वनाम-विचार :*
परिभाषा, प्रासंगिकता, सर्वनाम के भेद ( पुरुषवाचक, निजवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, सम्बन्धवाचक, प्रश्नवाचक ), सर्वनामों का रूपान्तरण।
*२०– विशेषण-विचार :*
परिभाषा, विशेषण के भेद ( गुणवाचक, परिमाणवाचक, संख्यावाचक, सार्वनामिक )।
*२१– क्रिया-विचार :*
परिभाषा, धातु, क्रिया के भेद ( सकर्मक, अकर्मक ), क्रियाओं का रूपान्तरण।
*२२– वाच्य :*
परिचय, वाच्य के प्रकार :- कर्त्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य।
*२३– अनुतान :*
परिभाषा, शब्द-सुर-लहर।
*२४– निपात :*
परिचय, निपात के रूप।
*२५– सन्धि-विच्छेद :*
परिचय, सन्धि के भेद :– १• स्वर सन्धि ( दीर्घ स्वर सन्धि, गुण स्वर सन्धि, यण् स्वर सन्धि, वृद्धि स्वर सन्धि, अयादि स्वर सन्धि ), २• व्यञ्जन सन्धि, ३• विसर्ग सन्धि।
*२६– समास-विग्रह :*
परिभाषा, विशेषताएँ, समास के भेद :– अव्ययीभाव समास, तत्पुरुष समास ( कर्मधारय समास और द्विगु समास ), द्वंद्व समास, बहुव्रीहि समास।
*२७– रस-परिचय :*
परिभाषा, रस के भेद ( शृंगार रस, हास्य रस, करुण रस, रौद्र रस, वीर रस, भयानक रस, बीभत्स रस, अद्भुत रस, शान्त रस, वात्सल्य रस, भक्ति रस ), रस के स्थाई भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव; आलम्बन और उद्दीपन।
*२८– पत्रलेखन-कौशल :*
परिचय, महत्त्व, अच्छे पत्र की विशेषताएँ, पत्रों के प्रकार, वाक्य-गठन, वाक्यगत प्रयोग ( ‘द्वारा’, ‘पर’, ‘ऊपर’, ‘बाद’, और ‘पीछे’ शब्द के समुचित प्रयोग और उनके नियम)।
*२९– पर्यायवाची शब्द।*
*३०– एकार्थ शब्द।*
*३१– अनेकार्थ शब्द।*
*३२– विलोम शब्द।*
*३३– युग्मक शब्द।*
*३४– अनेक शब्दों के लिए एक शब्द।*
*३५– लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे।*
*३६– सूक्ष्मान्तर वाले शब्द एवं उनकी विस्तृत व्याख्या:*
जैसे — १• आरम्भ, प्रारम्भ, समारम्भ, परिरम्भ; २• आमन्त्रण, निमन्त्रण; ३• आवास, निवास, प्रवास, अधिवास; ४• अनादर, निरादर; ५• आरोपी, आरोपित; ६• आग्रह, अनुरोध; ७• अनुलेख, आलेख, अभिलेख, सुलेख; ८• अक्षर, वर्ण; ९• आदि, इत्यादि; १०• अस्त्र, शस्त्र; ११• अनुकरण, अनुसरण; १२• अनजान, अज्ञान; १३• असामान्य, असाधारण; १४• अमूल्य, बहुमूल्य; १५• आयु, अवस्था; १६• आकार, रूप; १७• अभिज्ञता, बहुदर्शिता; १८• अध्यक्ष, सभापति; १९• अर्चना, पूजा; २०• अगम, दुर्गम; २१• अनिवार्य, आवश्यक, अपरिहार्य; २२• आधि, व्याधि; २३• अबला, निर्बला; २४• आवृत्ति, पुनरावृत्ति; २५• आवेदन, प्रतिवेदन; २६• अन्तःकरण, आत्मा; २७• अपराध, पाप; २८• अंस, अंश; २९• अन्त, अन्त्य; ३०• अन्न, अन्य; ३१• अनल, अनिल; ३२• अभिवादन, आशीर्वाद, नमस्कार, प्रणाम; ३३• आक्कलन, मूल्यांकन; ३४• अद्वितीय, अनुपम; ३५• अनुप्रयोग, प्रयोग; ३६• आदरणीय, पूजनीय; ३७• अभिलाषा, इच्छा; ३८• आशंका, शंका; ३९• आलोचना, समालोचना; ४०• अधिकतर, अधिकांश; ४१• अन्तर्राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय; ४२• अम्बुज, अम्बुद; ४३• अपेक्षा, उपेक्षा; ४४• अधिकार, जन्मसिद्ध अधिकार, विशेषाधिकार; ४५• अनबन, खटपट, बिगाड़; ४६• अपमान, अवमान, अवज्ञा, अवहेलना; ४७• अभियोजन, परिवाद, उपालम्भ; ४८• अभिमान, अहं, आत्मश्लाघा, घमण्ड, मद, गर्व; ४९• अर्पण, समर्पण, भेंट, उपहार, घूस, उपायन; ५०• अस्त,अस्तु; ५१• अविरल, सैलाब, अविराम, अभिराम; ५२• आचार, व्यवहार; ५३• अभियान, भ्रमण, यात्रा, पर्यटन, पिकनिक, विहार, सैर; ५४• उपयोग, उपभोग; ५५• विविध, विभिन्न; ५६• कार्रवाई, कार्यवाही; ५७• यश, कीर्ति; ५८• स्वजन, परिजन; ५९• निधन, मृत्यु; ६०• मूर्ख, मूढ़; ६१• मान, सम्मान; ६२• ऋषि, मुनि; ६३• शूर, वीर; ६४• सम्राट, राजा; ६५• सेवा, शुश्रूषा; ६६• कर्मठ, कुशल, दक्ष, निपुण, पारंगत; ६७• पत्नी, महिला, औरत; ६८• जन्मतिथि, जन्मदिन; ६९• स्वायत्तता, स्वतन्त्रता; ७०• स्वजन, श्वजन; ७१• उन्नति, प्रगति; ७२• राजभाषा, राष्ट्रभाषा; ७३• विज्ञता, पारंगत; ७४• ज्ञान, बुद्धि; ७५• सरल, सुगम; ७६• भ्रम, भ्रान्ति; ७७• परीक्षा, परिक्षा, परिच्छा; अंश, अंस; सुधी, सुधि; सामान, समान; व्यंग, व्यंग्य; उपज, उत्पत्ति; ७८• पत्र, प्रपत्र; ७९• प्रेषित, सप्रेषित; ८०• वृद्धि, विकास; ८१• पूर्व, भूतपूर्व; ८२• मुख्य, प्रमुख; ८३• नियम, सिद्धान्त; ८४• निकट, पास; ८५• खेद, शोक; ८६• मन, चित्त; ८७• जल, पानी; ८८• निर्माण, रचना, शब्द, भण्डार, कोश, कोष, निधि; ८९• वाह्य, बाह्य; ९०• प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा; ९१• पद्य, गद्य; ९२• निरीक्षण, परीक्षण; ९३• वक्ता/वक्त्री, प्रवक्ता; ९४• स्थावर, जंगम; ९५• राष्ट्र, जगत्, विश्व, संसार; ९६• भोग, उपभोग, उपयोग; ९७• मार्ग, पथ; ९८• वृष्टि, अनावृष्टि, आवृष्टि, अतिवृष्टि; ९९• बृहद्, विशद्; १००• पुस्तकालय, वाचनालय; १०१• कक्षा, कक्ष; १०२• तृप्ति, परितृप्ति; १०३• घटना, दुर्घटना; १०४• बीड़ा, वीड़ा; १०५• जड़, चेतन; १०६• उपस्थित, उपस्थिति; १०७• पर्वत, पहाड़; १०८• आभार, कृतज्ञता, धन्यवाद, साधुवाद; १०९• संवृत, विवृत; ११०• निश्छल, निश्चल; १११• संघटन, समिति, संस्था, समूह, संगठन; ११२• और, एवं, अथवा, तथा; ११३• धकेलना, ढकेलना; ११४• गुरुजन, गुरुजनों; ११५• उद्यम, उद्योग; ११६• जिजीविषा, जिगीषा; ११७• निर्वाण, निर्माण; ११८• अनुकृति, निरुद्ध; ११९• बिस्तर, विस्तर; १२०• नैसर्गिक, नैष्ठिक; १२१• टप, टप; १२२• निदेशक, निर्देशक; १२३• मात, मात्र, मातृ।








