भारत से निकलता था यह इकलौता चीनी अखबार, 50 साल के बेहतरीन इतिहास से वाकिफ हैं आप?

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शाल्मली दास और सिद्धार्थ सरकार/कोलकाताः दो मेजें, दो कंप्यूटर, दो लैंडलाइन फोन, चाय के दो प्याले और कुछ कुर्सियां… अब सब कुछ खाली, वीरान. हालांकि पहले भी फोन कम ही बजते थे, कुर्सियां कम ही आबाद होती थीं पर कागजों के सरसराने और एक शख्स के लगातार सुबह 8 बजे आ जाने से एक जिंदगी तो थी. अब यहां सियाही के सड़ने की बदबू, जाले और हवा में एक मायूसी, दुख-सा महसूस होता है. यह दृश्य है उस छोटी-सी प्रेस का, जो भारत के इकलौते चीनी अखबार के बंद हो जाने के बाद अपने आप में घुट रही है.

आपको पता है भारत से निकलने वाला चीनी अखबार कौन-सा था? इसका नाम था सिओंग पाॅ, जिसका मतलब हुआ ‘ओवरसीज चाइनीज काॅमर्स ऑफ इंडिया’. भारत में पिछले पांच दशकों से लगातार छप रहा यह अखबार कोविड-19 की भेंट चढ़ गया है. अखबार कोई भी हो, एक लंबे सफर के बाद अगर बंद हो जाता है, तो दस्तावेज और इतिहास का एक बड़ा पुलिंदा छोड़ ही जाता है.

किसका जुनून था यह न्यूजपेपर?

दिनोदिन घुट-घुटकर चल रहे इस चीनी अखबार को निकालते रहने का जज्बा इसके संपादक कुओ-त्साई चांग ने आखिरी सांस तक दिखाया. रोज सुबह नियम से 8 बजे दफ्तर आकर खबरें और लेख आदि छांटना, संपादन करना और उनकी छपाई करवाना यह उनका रूटीन था, जो बिला नागा चलता रहा. लाॅकडाउन से पहले ही इस अखबार की काॅपियां सिर्फ 200 ही छप पा रही थीं और एक न्यूजपेपर सिर्फ 2.50 रुपये में मिलता था.

महामारी से पहले सोमवार से शनिवार रोज सुबह 4 घंटे के लिए यह दफ्तर खुला करता था. केटी चांग चीनी भाषा के इस अखबार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे, जो 2020 की जुलाई में दुनिया को अलविदा कह गए. बस तभी से यह अखबार सिर्फ नाम और याद बनकर रह गया. लेकिन अब इसके भविष्य के लिए चीनी समुदाय चिंता करता हुआ तो दिख रहा है.

क्या फिर शुरू होगा सिओंग पाॅ?

कोलकाता में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के काॅंसुलेट जनरल जहा लियोउ ने कहा, ‘कोलकाता के टांगड़ा और तिरेटा बाजार में चीनी समुदाय की जो आबादी रहती है, वह इस अखबार को फिर शुरू करने के बारे में सोच रही है. हालांकि इसमें चुनौतियां कम नहीं हैं. लेकिन यह हमेशा के लिए बंद हो गया बड़ा नुकसान और दुखद होगा.’ इस अखबार के कुछ यादगार फैक्ट्स आपको रुचेंगे.

  • सिओंग पाॅ नहीं] 1935 में ‘द चाइनीज जर्नल ऑफ इंडिया’ भारत में पहला चीनी न्यूजपेपर था.
  • सिओंग पाॅ 1969 में चीनी समुदाय के नेता ली यून चिन ने शुरू किया था.
  • पहले-पहल यह अखबार बिजनेस संबंधी खबरों को तवज्जो देता था.
  • कोलकाता के चीनी समुदाय के गौरव की तरह इसकी ख्याति थी.
  • अपने शुरूआती दिनों में यह 4 पेज का अखबार हस्तलिखित भी रहा.
  • बाद में, एक चीनी डीटीपी मशीन के जरिये इसका प्रकाशन होने लगा.

एक शानदार यात्रा अफसोसनाक ढंग से खत्म हुई. 1990 के दशक में इस अखबार की 900 करीब काॅपियां छपा करती थीं, जो 2017 में सिर्फ 190 तक सिमट गई थीं. पहले यह अखबार दिल्ली व मुंबई तक भेजा जाता था और आखिरी समय में कोई पहुंच नहीं बची. इस अखबार के दफ्तर में 2020 से जो फर्नीचर, बिखरे पड़े कागज और अखबार की कतरनें थीं, उन्हें समेटकर तालाबंद कर दिया गया है. यह जवाब भविष्य के पास ही है कि इसका क्या होगा!

Tags: China india, COVID-19 INDIA

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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