
हाइलाइट्स
जातिगत आंकड़े बढ़ने के कारण प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर सकती है
राहुल गांधी ने जाति जनगणना के आंकड़े नहीं बताने का मुद्दा ओबीसी के अपमान से जोड़कर उठाया
कांग्रेस को रिपीट करने के लिए लोकप्रिय योजनाओं के प्रचार के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग भी जरूरी
एच. मलिक
जयपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कई समाजों/जातियों की ओर से किए जा रहे महापड़ावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना कराने की मांग को लेकर चिट्ठी लिखकर गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है. दरअसल, कांग्रेस विधानसभा चुनाव में जातिगत जनगणना (Caste Census) को मुद्दा बनाने की पूरी तैयारी में है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इसे ही मुद्दा बनाकर बीजेपी के अन्य पिछड़ा वर्ग वोट बैंक में सेंध लगाई है. इसी दिशा में चलते हुए प्रदेश की गहलोत सरकार भी ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर सकती है.
कर्नाटक चुनाव परिणाम बताते हैं कि कांग्रेस को वहां पूर्ण बहुमत दिलाने में ओबीसी के तीन बड़े समुदाय लिंगायत, कुरूबा और वोक्कालिगा का अहम रोल रहा. इससे उत्साहित होकर कांग्रेस इस फार्मूले पर अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है.
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जाति जनगणना को ओबीसी के अपमान से जोड़ा
कर्नाटक में राहुल गांधी ने जाति जनगणना के आंकड़े नहीं बताने का मुद्दा ओबीसी के अपमान से जोड़कर उठाया. उधर, बीजेपी ने मोदी सरनेम मामले में राहुल की टिप्पणी को ओबीसी का अपमान बताकर कांग्रेस को घेरा, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं हुआ. राजस्थान में लोकसभा की भी 25 सीटें हैं. इनमें से 11 सांसद ओबीसी वर्ग से हैं. हालांकि, यहां से 24 लोकसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी से हैं. राजस्थान की बात करें तो यहां कुल 200 विधानसभा सीट हैं. इनमें से एक चौथाई से अधिक यानी करीब तीस प्रतिशत विधायक ओबीसी समुदाय से हैं.
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ओबीसी कमीशन के रिव्यू के बाद होगा फैसला
दरअसल, राजस्थान में राज्य की सरकारी नौकरियों में ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. इस आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग की जा रही है. सीएम गहलोत ने ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग का आरक्षण बढ़ाने का दांव चल दिया है. हालांकि, यह काफी चुनौती भरा काम होगा. इसे पहले ओबीसी कमीशन पूरा रिव्यू करेगा. इसके बाद फैसला होगा. ऐसे में लोगों को दोनों ही पार्टियों के घोषणापत्र का इंतजार है कि इस मुद्दे को वे किस तरह देखती हैं. मुख्यमंत्री गहलोत ने पहल करते हुए इसीलिए जातिगत जनगणना कराने की चिठ्ठी पीएम को भेजकर इस मुद्दे को अपने पाले में डालने की कोशिश कर दी है.
राजस्थान में ओबीसी वर्ग से करीब 55 फीसदी वोटर
राजस्थान में करीब 55 फीसदी वोटर ओबीसी वर्ग से आते हैं. पूरे देश के साथ ही राजस्थान की सियासत में भी ओबीसी वोटर एक बड़ा मुद्दा माना जाता है. विधानसभा चुनावों के दौरान हर पार्टी इस वर्ग को साधने की कोशिश में रहती है. क्योंकि ओबीसी मतदाताओं का प्रभाव प्रदेश की कई सीटों पर है. राजनीतिक दल ऐसे प्रत्याशियों को टिकट देने का प्रयास करते हैं, जो उस सीट के जातीय समीकरण पर फिट बैठता हो, ताकि चुनावी वैतरणी आसानी से पार कर सके.
ओबीसी, आदिवासी और अल्पसंख्यकों की सोशल इंजीनियरिंग
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि इसी साल राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में चुनाव हैं. इनमें से दो जगह कांग्रेस की सरकार है. ऐसे में यहां कांग्रेस को रिपीट करने के लिए सरकार की लोकप्रिय योजनाओं के प्रचार के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग भी जरूरी है. यही वजह है कि पार्टी ओबीसी, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यकों को एकजुट करने की रणनीति पर जोर दे रही है. इसमें कांग्रेस के गारंटी प्रोग्राम सोने पर सुहागा का काम कर सकते हैं.
जातिगत गणना का कांग्रेस को कितना फायदा?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक जातिगत जनगणना कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं है, बल्कि एक बड़े वर्ग को प्रभावित करता है. कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस नेताओं ने जाति जनगणना का मुद्दा उठाया. इसका उसे फायदा भी मिला. यदि कांग्रेस इसे राजस्थान में चुनावी मुद्दा बनाएगी तो बीजेपी को भी कुछ न कुछ तोड़ निकालना होगा. हालांकि द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाए जाने पर तर्क दिया गया कि आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए यह बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक है, लेकिन चुनाव में इसका ज्यादा फायदा होता नहीं दिखा.
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Tags: Ashok Gehlot Government, Assembly election, Jaipur news
FIRST PUBLISHED : May 23, 2023, 06:43 IST








