
आदित्य कृष्ण/अमेठी. राजनीति के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से अमेठी महत्वपूर्ण स्थान है. अमेठी में घूमने के लिए और दर्शन करने के लिए कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. इन्ही धार्मिक स्थलों में से एक है महामृत्युंजय धाम. इस धाम से लोगों की दिली आस्था जुड़ी है. दूर-दूर से यहां लोग दर्शन पूजन करने आते है. इसके साथ ही समय समय पर यहां अन्य धार्मिक आयोजन और पूजा पाठ भी होते हैं.
अमेठी जनपद के गौरीगंज तहसील के रोसी बुजुर्ग गांव में बने इस महामृत्युंजय धाम की महिमा अपार है. महामृत्युंजय धाम में 108 शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग के साथ पंचमुखी शिव प्रतिमा स्थापित है. इसके साथ ही यहां पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है. दूर-दूर से यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं.
इसके साथ ही महाशिवरात्रि का पर्व हो या फिर सावन का पर्व यह बड़े मेले का आयोजन भी किया जाता है. अमेठी जनपद के चारों तहसीलों में यह पहला धाम है. जहां एक साथ भोलेनाथ के इतने स्वरूपों के दर्शन किए जा सकते हैं. इसी कारण इस मंदिर की महत्वता और पौराणिकत और प्रसिद्ध है.
निर्माणाधीन है मंदिर मिलता है सुकुन
आपको बता दें कि महामृत्युंजय धाम अभी निर्माणाधीन है यहां पर मंदिर परिसर में ही बारादरी के साथ 100 फीट ऊंची प्राचीन भगवान शंकर की मूर्ति स्थापित करने का भी प्लान है और इसके लिए भी लगातार मंदिर प्रशासन की ओर से पहल की जा रही है. जंगलों में विराजमान मंदिर होने के बावजूद भी भक्तों की भीड़ यहां बड़ी संख्या में होती है. भक्तों का मानना है कि यहां पर आने पर परेशानियां और कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुकून मिलता है.
दूर-दूर से आते हैं भक्त
न्यूज 18 लोकल से खास बातचीत में पुजारी रूद्रकांत मिश्र ने बताया कि पूरे अमेठी-जिले में ऐसा धाम कही नहीं है दूर-दूर से यहां भक्त दर्शन पूजन करने आते है. यहां पर 108 शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंग और पंचमुखी शिव मंदिर है. लोगों की मान्यता यहां पूरी होती है और दूर-दूर से यहां भक्त पूजा पाठ करने आते है.








