…जब गाजियाबाद के एक वकील के कारण रुक गई पूरी कचहरी, जानिए पूरा माजरा

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रिपोर्ट: विशाल झा

गाजियाबाद: ‘साहब हम अधिवक्ता है, अगर हम ही सलाखों के पीछे बंद रहेंगे; तो जनता न्याय की उम्मीद किससेरखेगी ‘… ये शब्द है गाजियाबाद के तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक कुमार वर्मा के. दरअसल इन दिनों गाजियाबाद के अधिवक्ता कचहरी में नहीं बल्कि सड़क पर है. कचहरी में किसी भी तरीके का न्यायिक कार्य भी नहीं हो रहा है. इसके पीछे की वजह है अधिवक्ता को जेल. जी, हां News 18 Local आज आपको बताएगा गाजियाबाद की कचहरी के ठप होने के पीछे की वजह.

शांति भंग करने के संदेह के मामले में 14 मई को भनेड़ा गांव में रहने वाले अधिवक्ता पवन त्यागी को पुलिस ने जेल भेज दिया था. जिस पर विवाद बढ़ता चला गया. 15 मई को अधिवक्ता पुलिस पर भड़क गए और धरना प्रदर्शन पर उतर आए. 16 मई को अधिवक्ता पवन त्यागी की रिहाई और अन्य मांगों के लिए अधिवक्ताओं ने 8 घंटे तक सड़क को जाम किया. जिसके बाद पुलिस ने अधिवक्ता पवन त्यागी को जमानत पर रिहा कर दिया था. इस बीच 2 से 3 दिन पूरी कचहरी प्रभावित रही. सिर्फ छोटे-मोटे कार्य को छोड़कर बाकी सभी काम बाधित हुए और कचहरी में आने वाली आम जनता को निराशा के साथ लौटना पड़ा.

क्या अधिवक्ताओं को सड़क जाम करना चाहिए ?

News 18 Local ने इस पूरे मामले में तहसील बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट अशोक कुमार वर्मा थे सीधी बात की.

सवाल :- क्या अधिवक्ताओं को सड़क जाम करना चाहिए था ?

जवाब :- हम जानते हैं कि लोगों की समस्या हुई है और ये तरीका गलत है पर इसके अलावा सरकार सुन भी तो नहीं रही थी. हम सारे अधिवक्ता पुलिस से मिलने भी पहुंचे लेकिन किसी ने हमारी बात सुनी ही नहीं. जब भी सरकार को संदेश दिया जाता है तो ऐसे ही सड़क जाम करके दिया जाता है.

इसके अलावा वकीलों ने मौजूदा कमिश्नरेट सिस्टम पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया. वकीलों ने कहा कि अब से पहले मजिस्ट्रेट के सामने ये मामले सुलझ जाते थे लेकिन कमिश्नर प्राणाली में ऐसा नहीं हो पा रहा है.

दरअसल अधिवक्ता समाज का एक पढ़ा-लिखा तबका है और उस पर एक आम नागरिक विश्वास करता है. न्याय के लिए सबसे पहले आम आदमी अधिवक्ता के पास ही आता है. अगर ऐसे में अधिवक्ता खुद ही जेल के पीछे बंद रहेंगे तो जनता कैसे विश्वास करेगी.

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक ने बताया कि देश भर के अधिवक्ता एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहें है. ये एक्ट इसलिए है क्योंकि वकील जो है वो क्रिमिनल के खिलाफ केस लड़ता है. आमजन को न्याय दिलाता है इसमें यह है कि जो पक्ष जेल जाता है वो वकील का दुश्मन हो जाता है. क्योंकि क्लाइंट की जगह वहां पर अधिवक्ता मौजूद होता है, सजा अधिवक्ता दिलाता है और इसलिए अधिवक्ता ही निशाने पर आ जाता है. ऐसे में अधिवक्ताओं को बचाने के लिए यह एक्ट जरूरी है.

निष्पक्ष जांच के आधार पर कार्रवाई करने का आश्वासन
अधिवक्ताओं ने जिले के पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्रा से मुलाकात की और 2 मांगे रखी. पहली मांग की पतला चौकी प्रभारी गौरव सिंह व निवाड़ी थाने के प्रभारी सुरेंद्र सिंह पर कार्रवाई की जाए और दूसरी मांग ये थी कि अधिवक्ता पवन त्यागी पर जो केस दर्ज है उसे खारिज किया जाए. जिसमें आयुक्त ने चौकी इंचार्ज को हटाने और बाकी मांगों पर निष्पक्ष जांच के आधार पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. अधिवक्ताओं और पुलिस आयुक्त में चली लंबी बातचीत के बाद सुलह का रास्ता निकाला गया. इसके बाद बार संघ अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक ने बताया कि पुलिस आयुक्त ने मांगे मान ली है, इसलिए उन्होंने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की.

कचहरी में क्या हुआ नुकसान
दर्शन अधिवक्ताओं के हड़ताल पर जाने से गाजियाबाद कचहरी का न्यायिक कार्य पूरी तरीके से प्रभावित हुआ. लगभग 8 हजार मामलों में सुनवाई टल गई और आगे की तारीख लग गई. पांच दिवसीय इस हड़ताल के कारण 40 हजारसे ज्यादा मामलों में सिर्फ तारीख लगाई गई है. जिनमें से कुछ प्रमुख मामले गाजियाबाद के नजारत घोटाला, ग्रेटर नोएडा का भूमि अधिग्रहण में रिश्वत लेने का केस, एनआरएचएम घोटाले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा का मुकदमा, नोएडा के बैंक ऋण घोटाले का केस और बिसेल के अधिकारियों के रिश्वत लेने का मुकदमा शामिल है.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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