
साइंस काफी तरक्की कर चुका है. लगभग हर बीमारी की दवा है. लेकिन आज भी दुनिया में कई ऐसे पारंपरिक तरीके हैं, जिनपर लोग भरोसा करते हैं. कंबो इनमें से एक है. इसमें मरीजों को मेंढक का जहर दिया जाता है. हाल ही में 2 मरीजों की मौत तक हो गई. इसके बावजूद लोग इससे अपना इलाज करवा रहे हैं. अमेजन के देशों में एक प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में मशहूर इस प्रथा से माना जाता है कि कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं. दावा तो यहां तक किया जाता है कि इससे कैंसर, बांझपन, डिप्रेशन और अल्जाइमर जैसे रोग तुरंत ठीक हो जाते हैं.आइए जानते हैं इस प्रथा के बारे में.
शुरुआत में मरीज को एक लीटर पानी या कसावा सूप पिलाते हैं. कुछ देर बाद आग में धधकती हुई एक रॉड से कंधे के पास छेद किया जाता है. जैसे ही रॉड लगाते हैं फफोला पड़ जाता है, और वहां बैठा शख्स उसे नोच देता है. इसके बाद मेंढक का जहर उस घाव में भरा जाता है. जहर के मांस के संपर्क में आते ही आदमी पागल की तरह हो जाता है. क्योंकि यह खून के माध्यम से उसके पूरे शरीर में चला जाता है. उल्टी-दस्त होने लगती है. बार-बार यूरिन डिस्चार्ज, चक्कर आना, हाई ब्लड प्रेशर और पेट में तेज दर्द होने लगता है. वैसे तो 5 से 30 मिनट के लिए ही ऐसा होता है, लेकिन कई बार घंटों लोग परेशान रहते हैं.
अमेरिका को छोड़ कई देशों में प्रतिबंधित
फिर शरीर से जहर को बाहर निकलाने के लिए पानी या चाय पिलाई जाती है. लोगों को घंटों पास की नदी में लेटने को कहा जाता है ताकि शरीर ठंडा रहे. इसके बावजूद लोग बेहाल रहते हैं. कई बार तो बेहोश तक हो जाते हैं. दरअसल, कंबो मूल रूप से जहर है, इसलिए कुछ देशों में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है, लेकिन अमेरिका में यह कानूनी तौर पर मान्य है. हालांकि, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अभी इसे रेगुलराइज नहीं किया है. यह कितना कारगर है, इस पर अभी तक कोई शोध नहीं हुआ है, लेकिन हजारों लोग आज भी इस पद्धति से अपना इलाज करा रहे हैं. इनमें कई अमीर लोग भी शामिल हैं.
कंबो लगाते ही 2 लोगों की मौत
यह इतना खतरनाक है कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में 2 लोगों की मौत हो गई. नताशा लेचनर नाम की एक महिला को पीठ में काफी दिनों से दर्द था. दवाओं से ठीक नहीं हो पा रहा था. किसी ने उन्हें इस पद्धति से इलाज कराने की सलाह दी. उन्होंने घर पर बुलाकर इलाज कराया, लेकिन कंबो लगाने के कुछ सेकेंड के भीतर वह बेहोश हो गईं और कुछ मिनटों बाद उनकी मौत हो गई. इसी तरह 46 वर्षीय जराड एंटोनोविच इलाज के बाद बीमार हो गए. उनका चेहरा फूल गया और दूसरे ही दिन उनकी मौत हो गई.
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FIRST PUBLISHED : May 20, 2023, 11:35 IST








