
आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण. दुर्लभ फसलों, फलों, पशुओं एवं जलीय जीवों की फार्मिंग में चम्पारण अपनी एक अलग पहचान बना रहा है. एक से बढ़कर एक दुर्लभ प्रजाति की मछलियों के साथ भारी भरकम दैत्याकार मछलियों की फार्मिंग को भी यहां बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में यहां के किसानों ने अब 7 इंच तक लंबे प्रॉन अर्थात झींगे की भी सफल फार्मिंग शुरू कर दी है. खास बात यह है कि आज तक चम्पारण ही नहीं बल्कि राज्य के अधिकांशतः जिलों में परंपरागत तरीके से ज्यादा से ज्यादा 1 इंच लम्बे झींगे की ही फार्मिंग होते आ रही थी.
7 इंच तक लंबे झींगे की फार्मिंग
जिले के लौरिया प्रखंड के साठी के सम्हौता गांव निवासी किसान आनंद कुछ इस प्रकार के जलीय जीवों की फार्मिंग कर रहे हैं, जो चम्पारण ही नहीं बल्कि पूरे सूबे के लिए आदर्श साबित हो रहा है. आनंद ने अपने छोटे से खेत में ही, कई छोटे-छोटे तालाबों का निर्माण कराया है. जिसमें वो इन्सानों के आकार की मछली से लेकर ब्रॉजन वर्गीय नस्ल को झींगे तक की सफल फार्मिंग कर रहे हैं.
जहां सूबे में ज्यादातर 1 इंच लंबे झींगे की फार्मिंग की जाती है, वहीं आनंद 6 से 7 इंच तक लंबे तथा 50 से 100 ग्राम तक वजनी झींगे की फार्मिंग करते हैं. बकौल आनंद इसकी शुरुआत उन्होंने 3 वर्ष पहले की थी. कृषि वैज्ञानिकों से सलाह तथा बीज लेकर उन्होंने इसकी फार्मिंग शुरू की थी, जो आज पूरी तरह से सफल है.
500 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकता है प्रॉन्स
आनंद ने बताया कि डेढ़ एकड के एक तालाब में वो झींगे की फार्मिंग करते हैं. इस पैमाने में झींगे की फार्मिंग के लिए बीजों में तकरीबन 8 हजार की लागत आती है. उसके बाद उनकी फीडिंग, जरूरत पड़ने पर कुछ जरूरी दवाइयों का छिड़काव तथा मजदूरों के खर्चे को मिलाकर 6 महीने में कुल 30 हजार रुपए की लागत आती है. जिससे उन्हें 80 हजार रुपए की आय होती है.
दूसरे लफ्जों में अगर बात की जाए, तो 6 महीने में कुल 30 हजार रुपए की लागत से आनंद 80 हजार रुपए की कमाई कर लेते हैं. यहां समझने वाली बात यह है कि फार्मिंग के बाद आनंद इसे कुछ खास ग्राहकों से 500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेच देते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 20:02 IST








