
गुलशन सिंह/बक्सर. सनातन धर्म में वट सावित्री पूजा सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना गया है. प्रत्येक साल इस पर्व को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है. वहीं जिलेभर में शुक्रवार को सुहागिनों ने वट सावित्रि का व्रत रखा.
इस दौरान सभी सुहागिन व्रती महिलाओं ने वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति के लिए लंबी आयु की भगवान से प्रार्थना की. इस क्रम में व्रती महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करने के बाद उसकी परिक्रमा भी की और अपने लिए अखंड सौभाग्य की कामना भी की.
जिले के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा
वट सावित्री पूजा को लेकर जासो रोड में स्थित शिव मंदिर के पास वट वृक्ष व सारीमपुर हनुमान मंदिर सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थित वट वृक्ष की हर्षोल्लास के साथ पूजा-अर्चना की गई. वट सावित्री पूजा व परिक्रमा करने के लिए महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिला. वट वृक्ष की पूजा करने वाली व्रती महिलाओं की भीड़ सुबह चार बजे से ही गंगा घाट पर स्नान के लिए पहुंचनी शुरू हो गई थी.
वहीं गंगा स्नान के बाद महिलाएं अहले सुबह से वट सावित्री की पूजा में लगी रहीं. सुहागिन महिलाओं द्वारा बरगद के पेड़ की फेरी लगाकर रक्षा सूत्र बांधते हुए वट सावित्री व्रत का पूजन किया गया. इस दौरान व्रत का पारण करने वाली महिलाओं ने वट सावित्री व्रत कथा को सुनकर अपने व्रत को पूर्ण किया.
पुराणों में वर्णित है वट सावित्री व्रत
सुहागिनों को वट सावित्री व्रत की कथा सुनाने वाले पंडित उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. उन्होंने बताया कि पूराणों के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है. इसलिए इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए पूजन करती हैं. उन्होंने बताया कि शस्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्योदय के साथ हीं व्रती महिलाओं को विधि-विधान से वट सावित्री की पूजन करनी चाहिए. ऐसा करने से विशेष फल प्राप्त होता है.
पंडित उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि पुराणों में वट सावित्री व्रत की कथा का वर्णन है. पुराणों के अनुसार वट सावित्री व्रत कथा में राजर्षि अश्वपति की एक ही संतान थीं सावित्री. वहीं सावित्री की शादी वनवासी राजकुमार सत्यवान से हुई थी. लेकिन जब नारद जी ने सावित्री को बताया कि उनका पति सत्यवान अल्पायु में है तो भी सावित्री चिंतित नहीं हुई और पतिव्रता स्त्री बनकर उन्होंने अपने पति सत्यवान की सेवा करने लगी.
पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन रखती है वट सावित्री व्रत
कथा के अनुसार एक दिन सत्यवान लकड़ियां काटने जंगल गए. वहां वह मूर्छित होकर गिर पड़े. जिसके बाद सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने गोद में पति का सिर रखकर सत्यवान को लेटा दिया. उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए. यमराज सत्यवान के जीव को दक्षिण दिशा की ओर लेकर जा रहे थे. तभी सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल देती है.
इस पर यमराज के कई बार मना करने पर वह नहीं मानी तो इस पर यमराज ने सावित्री पर खुश होकर वरदान मांगने के लिए कहा. तब सावित्री ने उन तीनों वरदान में यमराज से अपनी पति के लिए जीवन ही मांगा था. पंडित उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि उसी समय से हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत की परंपरा शुरू हुई और सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए पूरी श्रद्धा के साथ वट सावित्री पूजा करती आ रही है.
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FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 13:44 IST








