हाइलाइट्स
इसके पीछे खास वजह होती है शरीर के पसीने और उस पर इकट्ठा हो गए वैक्टीरिया की
बच्चा पैदा होते ही अलग गंध की प्रक्रिया शुरू कर देता है, ये लोगों के संपर्क में आने से भी
दुनिया में करोड़ों लोग हैं और हर किसी के शरीर की गंध भी अलग है. किसी के शरीर की गंध किसी दूसरे से बिल्कुल नहीं मिलती, जैसे हर किसी के फिंगर प्रिंट्स अलग होते हैं. आवाज भी अलग होती है. कहा जा सकता है हर मानव शरीर दूसरे शरीर से कई मामलों में बिल्कुल अलग और खास होता है. हर शरीर से अलग गंध आती है. कहा जाता है दो चेहरे भी कभी बिल्कुल एक जैसे नहीं होते. इसी तरह मानव शरीर के गंध का भी विज्ञान है.
हम किसी से मिलते हैं तो कई बार उसके शरीर से आने वाली खास गंध को भी महसूस करते हैं. कहा जाता है कि हर मानव के शरीर की गंध अलग और खास होती है. इसी वजह से गंध के आधार हर व्यक्ति की पहचान भी हो सकती है. पुलिस के खोजी कुत्ते इसी आधार पर लोगों को खोज निकालते हैं.
ये बात सही है कि हर शरीर की गंध में अंतर होता है. यहां तक कि जुड़वां बच्चों के शरीर से भी अलग – अलग तरह की स्मेल आती है. हमारे शरीर से आने वाली गंध का शरीर की कई बातों से खास रिश्ता होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है.
किसी भी व्यक्ति के शरीर से आने वाली विशेष गंध कुछ सीमा तक उसके शरीर की स्वेद ग्रंथियों से पैदा होने वाले पसीने पर निर्भर करती है लेकिन इस गंध की मुख्य वजह वो बैक्टीरिया हैं, जो शरीर की त्वचा के सतह पर होते हैं, वो पसीने के संपर्क में आकर खास गंध पैदा करते हैं.
बच्चे का शरीर पैदा होने के साथ अलग गंध ले चुका होता है. हालांकि ये गंध आने वाले समय के साथ कुछ कारणों से बदलती जाती है. (courtesy unsplash bhukya-jagadeesh)
बच्चा पैदा होते ही अलग गंध कैसे ले लेता है
बच्चा पैदा होने के बाद से बैक्टीरिया ग्रहण करने लगता है और बड़े होने के साथ ये संख्या बढ़ती चली जाती है. वैसे शरीर की त्वचा के गीले भागों में इन जीवाणुओं की संख्या सूखे भागों की तुलना में अधिक होती है.
इस गंध के पीछे होते हैं पसीना और बैक्टीरिया
ये बैक्टीरिया काफी हद तक हमारी शरीर की त्वचा की रक्षा भी करते हैं. ये वहां स्थायी तौर पर रहते हैं. जैसे त्वचा पर कुछ होता है, तो ये सक्रिय हो जाते हैं. ये ताजिंदगी त्वचा पर रहते हैं. हर शरीर के साथ रह रहे बैक्टीरिया पसीने के साथ आने पर खास गंध पैदा करते हैं. इसकी वजह से भी हर शरीर के बैक्टीरिया किसी ना किसी तौर पर कुछ डिफरेंट भी होते हैं.
हर जगह शरीर अपनी गंध छोड़ता है
वैसे बगैर पसीने के भी ये खास गंध पैदा करते हैं. जो हमारे शरीर से तब आती है, जब हम किसी के करीब आते हैं, वैसे भी हमारा शरीर हवा के संपर्क में आने पर भी अपनी गंध छोड़ता है. हम जहां कहीं आते जाते हैं, बैठते हैं, वहां हमारी गंध भी आती है.
कृति में लाखों-करोड़ों तरह के बैक्टीरिया हैं. प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा पर जमा होने वाले जीवाणु भी अलग – अलग किस्म के होते हैं. हम जो खाते पीते हैं, उसका असर भी शऱीर की गंध पर पड़ता है. कई बार शरीर गंध के जरिए बीमारियों का संकेत भी देता है. (shutterstock)
इसीलिए अलग और खास गंध
प्रकृति में लाखों-करोड़ों तरह के बैक्टीरिया हैं. प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा पर जमा होने वाले जीवाणु भी अलग – अलग किस्म के होते हैं. अलग गंध पैदा करते हैं. यही वजह है कि प्रत्येक व्यक्ति के शरीर से आने वाली गंध अलग और खास होती है. अगर आप कहीं जा रहे हों और खोजी कुत्ते को वहां लेकर आपकी गंध सूंघने का मौका मिले तो वो आपको खोज निकालेगा.
बॉडी की गंध किसी की तीखी और किसी की मीठी
ह्यूमन बॉडी से जो गंध आती है, उसमें कुछ का शरीर मीठा, कुछ नमकीन तो कुछ प्याज या तीखा सा गंध भी देता लगता है. हालांकि जरूरी नहीं कि हर शरीर की गंध के लिए पसीना या बैक्टीरिया ही जिम्मेदार हो, बल्कि कई बार हमारे क्रोमोसोम, खाना-पीना और बीमारी भी होती हैं. कई बार शरीर से दुर्गंध का आना किसी बीमारी का भी सूचक होता है.एफएमओ 3 नामक जीन में गड़बड़ी होने की वजह से इंसान को बदबू की शिकायत होती है.
अगर शरीर से निकले बदबू वाली गंध तो सावधान हो जाइए
एक नए शोध से पता चला है कि नाक में दम करने वाली शरीर की बदबू के लिए “फिश ओडोर सिंड्रोम” जिसे असामान्य जीन में गड़बड़ी भी कहा जाता है, शरीर में बदबू के लिए जिम्मेदार हो सकता है. क्लिनिकल भाषा में इसे ट्राईमिथाइलअमिनुरिया (टीएमए) कहा जाता है.
पसीने में बदबू क्यों आती है?
आपके पसीने से बदबू आने के कई कारण हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ दवाएं, पूरक या खाद्य पदार्थ आपके पसीने की गंध को खराब कर सकते हैं.
किसी व्यक्ति के सामान्य शरीर की गंध में बदलाव कई चिकित्सीय हालात और बीमारियों से भी जुड़ा होता है. ये इन बीमारियों की स्थिति में हो सकता है.
मधुमेह
गाउट
रजोनिवृत्ति
अतिसक्रिय थायराइड
यकृत रोग
गुर्दा रोग
संक्रामक रोग
यदि आपको मधुमेह है, तो शरीर की गंध में बदलाव मधुमेह से संबंधित कीटोएसिडोसिस का संकेत हो सकता है. कीटोन के उच्च स्तर के कारण आपका रक्त अम्लीय हो जाता है. आपके शरीर की गंध फलों जैसी हो जाती है. लीवर या किडनी की बीमारी के मामले में, आपके शरीर में टॉक्सिन के निर्माण के कारण आपकी गंध ब्लीच जैसी गंध दे सकती है.
क्या खाने भी शरीर की गंध पर असर डालते हैं
कहावत है, “आप जो खाते हैं वही बनते हैं,” ये बात शरीर की गंध पर भी लागू होती है. अगर आप सल्फर से भरपूर खाना खाते हैं तो शरीर से दुर्गंध आ सकती है. सल्फर से सड़े हुए अंडे जैसी गंध आती है. जब यह आपके शरीर से आपके पसीने में स्रावित होता है, तो अप्रिय गंध दे सकता है. सल्फर युक्त खाद्य पदार्थ ये हैं.
प्याज
लहसुन
पत्ता गोभी
ब्रॉकली
फूलगोभी
लाल मांस
शरीर की खराब गंध को बढ़ाने के पीछे कुछ ये खाद्य पदार्थ भी जिम्मेवार होते हैं
मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी)
कैफीन
करी या जीरा जैसे मसाले
गर्म चटनी या अन्य मसालेदार भोजन
अल्कोहल
अगर आप इन्हें इस्तेमाल नहीं करें या कम खाएं तो शरीर के गंध की खराब स्थिति में भी सुधार हो जाएगा.
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FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 10:50 IST








