चुरू के इस किसान ने परंपरागत खेती छोड़ शुरू की अनार की बागवानी, अब अच्छे मुनाफे की आस

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नरेश पारीक/ चूरू. बदलते वक्त के साथ खेती किसानी में भी किसान नवाचारों के दम पर नित नए प्रयोग कर रहे हैं और खेती के दम पर अपनी और अपने परिवार की स्थिति सुधारने में लगे हैं. ऐसे ही एक किसान है ओमप्रकाश जिन्होंने चार साल पहले परंपरागत खेती छोड़ करीब 7 बीघा जमीन पर अनार की बागवानी शुरू की और अब इसी साल के आखिर में अनार की पहली फसल लेनें की तैयारी कर रहे हैं.

तारानगर तहसील के चंगोई गाँव निवासी बीए पास ओमप्रकाश कस्वा बताते हैं कि जबसे सोचना, समझना शुरू किया खेत देखा उसमे परंपरागत खेती के अलावा कभी कुछ नया प्रयोग नही किया जिससे मौसम आधारित फसलें तो होती लेकिन मेहनत के मुकाबले मुनाफा नही होता कभी, जिसके बाद किसी ने औषधिय पौधों की बागवानी की राय दी लेकिन मौसम के साथ यहां खारा पानी सबसे बड़ी चुनोती था जिसके बाद अनार की बागवानी का ख्याल आया और महाराष्ट्र के नासिक से करीब 1700 अनार के पौधे मंगवाए और अनार की बागवानी शुरू की.

चंगोई निवासी ओमप्रकाश ने बताया की महाराष्ट्र के नासिक की सरकारी नर्सरी से अनार के ये पौधे मंगवाए और 42 रुपए प्रति पौधे का खर्च आया और खाद के साथ ड्रिप सिस्टम लगवाया जिसमे कुल खर्च करीब 4 लाख रुपए आया.39 वर्षीय ओमप्रकाश अब अपनी अनार की पहली फसल लेने के लिए उत्साहित हैं और बताते हैं कि इसी साल के आखिर तक वो अनार की पहली फसल लेंगे.

आर्गेनिक खाद डालते हैं पौधों में

अनार की फसल अच्छी हो इसके लिए ओमप्रकाश कस्वा ने रासायनिक खाद काम मे ना लेकर आर्गेनिक खाद काम मे ली.कस्वा बताते हैं की ड्रम के अंदर पानी और गुड़ का घोल तैयार किया जाता है फिर उसमें छाछ और आक,धतूरा,लहसुन और नीम के पत्ते डाल दो हफ़्तों तक बंद रखा जाता है और फिर घोल को छानकर उसका पौधों के ऊपर छिड़काव किया जाता है ताकि पौधों में कीड़े ना लगे और फसल बिना किसी रासायनिक खाद के तैयार हो सके.कस्वा ने बताया कि पौधों की जल्दी ग्रोथ के लिए वह देशी गाय का गोबर,गोमूत्र और बेसन,गुड़ की खाद तैयार कर उसे पौधों की जड़ो में देते हैं.

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FIRST PUBLISHED : May 18, 2023, 16:17 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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