Haldwani News: वन अनुसंधान केंद्र में हैं जुरासिक-पॉलीनेटर समेत 50 पार्क, कई खास पौधे जीत लेंगे दिल

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पवन सिंह कुंवर/ हल्द्वानी. अब आपको जीव जंतु या पेड़ पौधे के बारे में जानकारी लेनी है, तो आप उत्तराखंड में हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में आ सकते हैं. हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में जीव जंतुओं, डायनासोर पार्क से लेकर पेड़ पौधों की हर जानकारी मिल जाएगी. आपको यहां पेड़ पौधों से जुड़ी हुई जानकारी ही नहीं बल्कि वनस्पतियों पर होने वाली हर रिसर्च के बारे में भी जानकारी मिलेगी, यहां विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों पर कई रिसर्च की जा चुकी है. अगर आप भी पढ़ने लिखने की शौकीन है या फिर पेड़-पौधे जीव जंतु के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में आ सकते हैं.

वन अनुसंधान केंद्र के वन क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि हमारे द्वारा यहां लगातार पार्क विकसित करने का काम किया जा रहा है और यहां शहीद वाटिका से लेकर रामायण वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका, काशी वाटिका से लेकर आपको हर वह वाटिका मिलेगी, जिसके बारे में आप जानना चाहते हैं.

वन अनुसंधान केंद्र में है देश का पहला पॉलीनेटर पार्क
उत्तराखंड के हल्द्वानी में स्थित वन अनुसंधान केंद्र में देश का पहला पॉलीनेटर पार्क बनाया गया है. यह पार्क चार एकड़ जमीन पर बनाया गया है. इसे विकसित करने का उद्देश्य विभिन्न पॉलीनेटर प्रजातियों को संरक्षित करना और इनके महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है. साथ ही परागण के विभिन्न पहलुओं जैसे- उनके आवासों पर खतरे, प्रदूषण का उन पर प्रभाव आदि पर शोध को बढ़ावा देना भी है. इस पार्क में तितली, मधुमक्खी, पक्षियों और कीटों की 40 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं. साल 2020 में प्रख्यात तितली विशेषज्ञ पीटर स्मेटासेक ने इस पार्क का उद्घाटन किया था.

हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में एक ऐसे वाटिका बनाई गई है, जिस वाटिका में हर मर्ज का पौधा है. जिसमें शरीर के अलग-अलग अंगों की मर्ज की दवा मिलती है. सिर, पेट, श्वांस, त्वचा, अस्थि रोग ठीक करने वाले औषधीय पौधे उपलब्ध इस वाटिका में लगाए गए हैं. हल्द्वानी के वन क्षेत्राधिकारी मदन सिंह बिष्ट ने तैयार की है. ये वाटिका जिसमें शरीर के अलग-अलग अंगों की मर्ज की दवा मिलती है.

हल्द्वानी में वन अनुसंधान केंद्र (Uttarakhand Forest Research Institute Haldwani) में कृष्ण वाटिका बनाई गई है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के पांच पसंदीदा वृक्ष लगाए गए हैं. अगर आप भी श्री कृष्ण के पांच पसंदीदा वृक्षों के दीदार करना चाहते हैं तो हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र आ सकते हैं. दरअसल यहां भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े वृक्षों को संरक्षित किया गया है.

वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में बना देश का पहला जुरासिक पार्क
देश का पहला जुरासिक पार्क वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में बन कर तैयार हो गया है. वहीं, वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर मदन सिंह बिष्ट का कहना है कि केंद्र में कोई भी आकर डायनासोर पार्क के बारे में जानकारी और अन्य वनस्पतियों के बारे में भी जान सकता है. उत्तराखंड के हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र और लालकुआं के वन अनुसंधान केंद्र में नवग्रह वाटिका तैयार की गई है. इस वाटिका को तैयार करने का मुख्य उद्देश्य ग्रहों की शांति व इसके उपाय हैं. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आपके ग्रहों के हिसाब से आपके लिए कौन सा पौधा शुभ है और वह कैसे लाभदायक होगा, तो आप वन अनुसंधान केंद्र में आ सकते हैं.

अगर आप एक्वेटिक यानी जलीय पौधों का शौक रखते हैं तो आज हम आपके लिए ऐसी खबर लेकर आए हैं जिसको जानना आपके लिए बेहद जरूरी है. हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में अब आपको वाटर लिली और लोटस यानी कमल की कई प्रजातियां दिखने को मिलेंगी. ये देखने में बेहद मनमोहक भी होती हैं.

वाटर लिली और कमल जीत रहे दिल
हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र में एक्वेटिक जोन बनाया गया है, जिसमें आजकल 5 तरह की वाटर लिली खिली हुई हैं. एक्वेटिक जोन में कमल की करीब 15 प्रजातियां हैं, जो मनमोहक तो हैं ही साथ में उन छात्र-छात्राओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जो एक्वेटिक प्लांट यानी जलीय पौधों पर शोध कर रहे हैं. वाटर लिली 12 महीने खिलने वाला जलीय पौधा होता है जबकि कमल के अनेक रंग आपको फरवरी के बाद देखने को मिलेंगे. उत्तराखंड में हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र ने एक ऐसी अनोखी रामायण वाटिका तैयार कर डाली है, जिसमें रामायण काल में मौजूद वनस्पतियों को लगाया गया है. ये वे पेड़-पौधे हैं जिनका ज़िक्र वाल्मिकी रामायण में मिलता है. वन अनुसंधान केंद्र की इस वाटिका में 72 प्रकार के पौधे मौजूद हैं जिनमें जड़ी-बूटियों से लेकर फलदार और हरियाली देने वाले वृक्ष तक शामिल हैं.

वाटिका में त्रेता युग के 72 प्रकार के पेड़-पौधे
वन अनुसंधान केंद्र की वाटिका में त्रेता युग के 72 प्रकार के पेड़-पौधे मौजूद हैं. यहां के प्रभारी रेंजर मदन सिंह बिष्ट के मुताबिक भगवान राम ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान जिन पौधों के पेड़-पौधों को देखा वह आज भी हमारे आस-पास मौजूद हैं. अनुसंधान केंद्र ने इन्हें एक साथ लाकर इस रामायण वाटिका में लगाया है. बिष्ट के मुताबिक इन पेड़-पौधों के अस्तित्व से ही चित्रकूट, दंडकारण्य, पंचवटी, शबरी, किष्किंद्धा, अशोक वाटिका और द्रोणागिरी से पड़ाव हरे-भरे थे. जिनमें भगवान राम ने अपने चौहद वर्ष का वनवास पूरा किया.

Tags: Forest department, Uttarakhand news

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Author: Up Head Line

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