19 मई को अखंड सौभाग्य का वट सावित्री व्रत, नोट कर लें पूजन सामग्री, इनके बिना अधूरी रह जाएगी पूजा

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हाइलाइट्स

19 मई शुक्रवार को यूपी, बिहार, झारखंड, दिल्ली, राजस्थान समेत उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत रखा जाएगा.
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी.

अखंड सौभाग्य का वट सावित्री व्रत 19 मई शुक्रवार को है. इस दिन यूपी, बिहार, झारखंड, दिल्ली, राजस्थान समेत उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत रखा जाएगा. ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी, इसलिए इस तिथि को हर साल वट सावित्री व्रत रखते हैं. जो महिलाएं पहली बार वट सावित्री व्रत रखने वाली हैं, उनको पूजन सामग्री और पूजा विधि के बारे में जान लेना चाहिए. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं वट सावित्री व्रत की पूजन सामग्री और पूजा विधि.

वट सावित्री व्रत 2023 पूजा सामग्री
1. एक वट वृक्ष, बरगद का फल
2. सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या तस्वीर
3. भिगा हुआ काला चना
4. कलावा या रक्षासूत्र या सफेद कच्चा सूत
5. सवा मीटर का कपड़ा, बांस का पंखा
6. लाल और पीले फूल
7. मिठाई, बताशा, मौसमी फल
8. मिट्टी का दीपक, धूप, दीप, अगरबत्ती
9. सिंदूर, अक्षत, रोली, सवा मीटर का कपड़ा
10. पान का पत्ता, सुपारी, नारियल
11. श्रृंगार सामग्री
12. जल कलश, पकवान, पूड़ी आदि.
13. स्टील या पीतल की थाली
14. वट सावित्री व्रत कथा की पुस्तक

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वट सावित्री व्रत और पूजा विधि
19 मई को प्रात: में स्नान के बाद लाल, पीले या हरे रंग की साड़ी पहनें और सोलह श्रृंगार करके अच्छे से तैयार हो जाएं. फिर पूजा सामग्री को एक थाली में सजाकर रख लें. उसके बाद शुभ मुहूर्त में पास में बरगद के पेड़ के पास जाएं.

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वहां पर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर दें. जो सुहागन पहली बार व्रत कर रही हैं, वे कपड़े या मिट्टी से बने दुल्हा-दूल्हन के जोड़े को रखकर पूजा करें. सावित्री और सत्यवान की पूजा अक्षत, रक्षासूत्र, फल, फूल, पान, सुपारी, मिष्ठाई, रोली, भीगे चने, धूप, दीप आदि से विधिपूर्वक करें. उसके बाद पंखे से हवा करें.

इसके बाद वट वृक्ष में कच्चा सूत या रक्षा सूत्र बांध दें और उसे पकड़ कर 7 बार वृक्ष की परिक्रमा करें. परिक्रमा खत्म होने के बाद सूत के दूसरे छोर को बांध दें. अब आप पेड़ के नीचे बैठकर वट सावित्री व्रत कथा सुनें. इसके बाद पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए प्रार्थना करें. फिर प्रसाद वितरण करें.

Tags: Dharma Aastha, Vat Savitri Vrat

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Author: Up Head Line

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