Pakistan Conspiracy: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ सैन्य कानून और गोपनीयता अधिनियम के तहत केस चलाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. साफ है कि अगर वह दोषी साबित हो जाते हैं तो उन्हें फांसी या उम्रकैद की सजा हो सकती है. हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पीएम खान को गिरफ्तार करने की आलोचना करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था. इसके बाद पाकिस्तानी सेना और मौजूदा सरकार ने उनके खिलाफ मिलिट्री एक्ट और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत मुकदमा चलाने का फैसला किया.
पाकिस्तान में आर्मी एक्ट की धारा-59 के तहत अगर किसी व्यक्ति को दोषी पाया जाता है तो उसे मौत की सजा सुनाई जाती है. पाकिस्तान की सेना मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और दिग्गज नेताओं के खिलाफ कई बार इस कानून का इस्तेमाल कर चुकी है. वहीं, ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धारा-3 के तहत दोषी पाए जाने पर मौत या उम्रकैद की सजा होती है. मजेदार बात ये है कि इस कार्रवाई के सबूत या धाराएं सार्वजनिक भी नहीं की जाती हैं. इन दोनों कानूनों का इस्तेमाल कर सेना पाकिस्तान के बड़े से बड़े व्यक्ति को मुसीबत में डाल सकती है.
सजा के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य ही काफी
आर्मी एक्ट के क्लॉज डी की उपधारा-1 के तहत उन लोगों के खिलाफ केस चलाया जाता है, जिन पर पाकिस्तान के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप लगाया जाता है. वहीं, देश के खिलाफ हथियार उठाने, सुरक्षा बलों पर हमला करने, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए देश-विदेश से फंड का लेनदेन करने वालों पर भी इसी उपधारा के तहत मामला चलाया जाता है. ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धारा-3 के तहत अगर किसी के खिलाफ जासूसी का आरोप साबित हो जाता है तो 14 साल कैद की सजा का प्रावधान किया गया है. इसमें ठोस सबूत नहीं मिलने के बाद भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को ही पर्याप्त मानकर फैसला सुना दिया जाता है.
पाकिस्तानी सेना और सरकार ने इमरान खान के खिलाफ मिलिट्री एक्ट के तहत मुकदमा चलाने का फैसला किया.
पूर्व प्रधानमंत्री पर मिलिट्री में मुकदमा क्यों
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जब पूर्व पीएम इमरान खान के पक्ष में फैसला सुनाया तो सेना और सरकार ने उनके खिलाफ मिलिट्री कोर्ट में मुकदमा चलाने का षड्यंत्र रचा. इसके पीछे भी अहम वजह है. दरअसल, पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट ने पिछले तीन साल में सुनवाई के लिए लाए गए मुकदमों में से 99 फीसदी से ज्यादा आरोपियों को सजा सुनाई है. साफ है कि अगर इमरान खान को मिलिट्री कोर्ट में ले जाया जाता है तो उनका बचकर निकल पाना नामुमकिन हो जाता है. बीते तीन साल में मिलिट्री कोर्ट 345 लोगों को मौत की सजा सुना चुका है, जिनमें से 56 की सजा पर अमल भी हो चुका है. वहीं, 296 लोगों को मिलिट्री कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है.
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पाक के कई पूर्व पीएम को जाना पड़ा जेल
पाकिस्तान में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री को जेल जाना पड़ा. पाकिस्तान में सितंबर 1956 से अक्टूबर 1957 तक प्रधानमंत्री रहे हुसैन शहीद सुहरावर्दी को भी जेल जाना पड़ा था. दरअसल, उन्होंने आयूब खान की सत्ता पर कब्जा करने की कोशिशों का समर्थन करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन पर इलेक्टिव बॉडी डिस-क्वालिफिकेशन ऑर्डर यानी दब्डो के उल्लंघन के आरोप लगाए गए. उन्हें जनवरी 1962 में गिरफ्तार किया गया और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया. इसके बाद 1973 से 1977 तक पीएम रहे जुल्फीकार अली भुट्टो पर सितंबर 1977 में आरोप लगाया कि उन्होंने 1974 में राजनीतिक विरोधी की हत्या का षड्यंत्र रचा था.
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जुल्फीकार अली भुट्टो को दी गई फांसी
लाहौर हाईकोर्ट ने जुल्फीकार अली भुट्टो की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताकर बरी कर दिया. महज तीन दिन के भीतर उनको मार्शल लॉ रेगुलेशन 12 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. बता दें कि पाकिस्तान में इस कानून के तहत लॉ एनफोर्समेंट एजेंसीस किसी भी व्यक्ति पर देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को खतरा बताकर गिरफ्तार कर सकती हैं. इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया व्यक्ति किसी भी अदालत में नहीं जा सकता है. आखिरकार भुट्टो मुकदमा हार गए और 4 अप्रैल 1979 को फांसी दे दी गई थी. वहीं, उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो को सरकार की निंदा करने पर 1986 में गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि, बाद में बेनजीर दिसंबर 1988 से अगस्त 1990 और फिर अक्टूबर 1993 से नवंबर 1996 तक दो बार पीएम रहीं. बेनजीर भुट्टो की मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं. वह आखिरी समय तक कोर्ट केसेस में उलझी रहीं.

पूर्व पीएम जुल्फीकार अली भुट्टो को फंसी तो बेनजीर भुट्टो की कई बार गिरफ्तारी की गई.
शरीफ को दी ‘देश निकाला’ की सजा
पाकिस्तानी सेना के जनरल परवेज मुशर्रु 1999 में तख्तापलट के बाद सत्ता में आए थे. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को ‘देश निकाला’ दे दिया था. इसके बाद नवाज शरीफ सितंबर 2007 में ही पाकिस्तान लौट पाए. हालांकि, उन्हें देश लौटते ही गिरफ्तार कर लिया गया. फिर उनको यह कहर सऊदी अरब के जेद्दाह भेज दिया गया कि अभी उनके देश निकाला के तीन साल बचे हुए हैं. इसके बाद 2018 में एनएबी ने उन्हें और उनकी बेटी मरियम नवाज को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. मरियम नवाज को भ्रष्टाचार का दोष्ज्ञी ठहराते हुए 10 साल की सजा दी गई. वहीं, नवाज शरीफ को दो महीने बाद छोड़ दिया गया. इसी साल उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया और भ्रष्टाचार का दोषी ठहराते हुए 7 साल कैद की सजा दी गई. साल 2019 के आखिर में उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी दी गई. फिर वह कभी पाकिस्तान नहीं लौटे.
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ओर भी पूर्व पीएम हुए हैं गिरफ्तार
साल 2019 में ही पूर्व पीएम शाहिद खकान अब्बासी को भ्रष्टाचार के मामले में एनएबी ने गिरफ्तार किया गया. वह जमानत पर जेल से बाहर हैं. मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में इमारान खान के पीएम रहते सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था. वह सात महीने जेल में रहे. मार्च 2023 में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ जज को धमकी देने और तोशाखाना गबन के आरोप में दो गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए. तब उनकी गिरफ्तारी रोकने के लिए उनकी पार्टी पीटीआई के कार्यकर्ता उनके घर के बाहर जमा हो गए. फिर 9 मई 2023 को इमरान खान को हिरासत में ले लिया गया. उन पर अल कादिर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया.
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FIRST PUBLISHED : May 16, 2023, 20:12 IST








