खाने-पीने के हैं शौकीन तो प्रयागराज की ये कचौरी जरूर करें ट्राई, ऐसा स्वाद जो जीवन भर रहेगा याद

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हाइलाइट्स

सुलाकी लाल श्री नाथ एंड संस की ये चर्चित दुकान सुलाकी चौराहा पर स्थित है.
मध्य इलाहाबाद/प्रयागराज में स्थित है यह 100 वर्ष पुरानी कचौड़ियों की दुकान.

देश के सबसे बड़े सूबे का सबसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शहर यानी प्रयागराज. आज उसी शहर में एक ऐसी जगह से मैं अपका परिचय करवाता हूं, जिसने भारत के आम से लेकर खास लोगों के दिलों पर राज किया है. इसके कद्रदानों की फेहरिस्त में कई पूर्व प्रधानमन्त्री, फिल्म अभिनेता और मिसाइल मैन कलाम साहब का नाम भी शामिल है. यहां का जायका ऐसा है कि जुबां से होकर दिल में उतर जाता है. प्रयागराज में कहते हैं कि यहां रहकर अगर आपने सुलाकी की कचौड़ियां नहीं खाईं, तो बाबा तुम्हारा प्रयागराज में रहना व्यर्थ हो गया.

ये हैं प्रयागराज के सुलाकी की स्वाद से भरपूर कचौड़ियां. (News18)

ये हैं प्रयागराज के सुलाकी की स्वाद से भरपूर कचौड़ियां. (News18)

हाल फिलहाल में ही मुझे महामना मदन मोहन मालवीय, हरबंस राय बच्चन और जवाहर लाल नेहरू जैसी महान विभूतियों की जन्मभूमि प्रयागराज जाने का मौका मिला. दरअसल माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के हत्याकांड के सिलसिले में मैं कवरेज के लिए प्रयागराज पहुंचा हूं. लगातार नया खोजने, कुछ नया ट्राई करने की आदत ने प्रयागराज की बहुचर्चित और इस पुरानी दुकान तक पहुंचाया. कई स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला मध्य इलाहाबाद/प्रयागराज में स्थित सुलाकी की लगभग 100 वर्ष पुरानी कचौड़ियों की दुकान के बारे में. सुलाकी लाल श्री नाथ एंड संस की ये चर्चित दुकान सुलाकी चौराहा पर स्थित है. साफ सुथरे शहर प्रयागराज में घूमते-घूमते मैं पहुंच गया सुलाकी की दुकान पर, समय हो रहा था दोपहर के 11 बजे. वहां मौजूद काफी लोगों की भीड़ ने मुझे चकित कर दिया, क्यूंकि मुझे लगा था अब इतने वक्त बेहद कम लोग ही होंगे क्योंकि कचौरी सुबह का नाश्ता होता है. इतनी भीड़ होने के बाबजूद भी यह की साफ सफाई ने मुझे बहुत प्रभावित किया. खास बात यह है कि इस दुकान का लुक आज भी वैसा ही है जैसा लोगों ने पहले इसके बारे में बताया था.

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पूर्वांचल के स्थानीय खानपान में जो अलग बात है वो ये कि यहां मसालों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, यहां स्वाद के साथ सेहत को वरीयता दी जाती है. सुलाकी कचौरी की दुकान पहुंचने पर पता चला कि देशी घी में बनी उड़द दाल कचौरी जो बिना प्याज और लहसुन की हैं. एक कचौड़ी की प्लेट की बात करें तो उसमें 4 पूड़ियों के साथ असीमित स्वादिष्ट देशी घी में बने आलू गड्ढ, दम आलू, कटहल की सब्जी, आलू बैंगन सब्जी और लौकी वाला रायता. खास बात ये है कि इन सबको परोसने के लिए फैंसी कटलरी के जगह देसी पत्ते से हस्तनिर्मित बायोडेग्रेडेबल प्लेट का इस्तेमाल किया जा रहा था. यहां विशेष तौर जुबान के जायके के साथ-साथ नेचर का भी ख्याल रखते है. ये यहां का पसंदीदा नाश्ता है, जिसे खाने वालों में स्थानीय लोगों की भीड़ ज्यादा नज़र आती है. पहला निवाला ही ऐसा जो मान को भा गया, वो गरम-गरम कचौरियों के साथ सब्जी का स्वाद ऐसा जो भूलने से भी ना भूला जाए. कटहल की सब्जी जो मेरी पसंदीदा है वो वास्तव में इतनी बेहतरीन थी कि शब्द कम पड़ जाएं. अविश्वसनीय स्वाद. स्वादिष्ट!

कचौरी और सब्जी वैसे तो देश के हर कोने में मिलती है, लेकिन प्रयागराज में मिलने वाली कचौरी आप यहीं खा सकते हैं. इसकी खासियत ये है कि यहां इसमें दाल भरी जाती है और उसे शुद्ध देशी घी में तला जाता है. पूरी प्लेट में कोई भी शरीर को नुकसान देने वाला आइटम नहीं होता है. स्वाद ऐसा की पेट भर गया, लेकिन नियत नहीं. इस प्रतिष्ठित दुकान पर आप सब्जी और रायता कितनी भी बार ले सकते हैं. एक प्लेट खत्म करने के बाद मेरा ध्यान आकर्षित किया देशी घी से बनी हुई जलेबियों ने. भाव पूछने पर पता चला की 400 रुपये प्रति किलो हैं, फिर क्या तुरंत टेस्ट कीं.

प्रयागराज के सुलाकी की दुकान पर लगे FSCCI के सर्टिफिकेट, जिनका पालन यहां पूरी तरह होता है. (News18)

प्रयागराज के सुलाकी की दुकान पर लगे FSCCI के सर्टिफिकेट, जिनका पालन यहां पूरी तरह होता है. (News18)

पेट पूजा करने के बाद मैंने इस शानदार प्रतिष्ठान के संचालक अमन गुप्ता (बुधीराम हलवाई द्वारा स्थापित इस पारिवारिक व्यवसाय में छठी पीढ़ी) से मुलाकात की. तो मेरा पहला सवाल था कि प्रयागराज में 120 रुपये की 4 कचौरियां आमतौर पर सामान्य से तो काफ़ी ज्यादा महंगी हैं तो उन्होंने बताया की अपने खाने की क्वालिटी से समझौता नहीं करना चाहता, क्योंकि ग्राहक का भरोसा ही उनके लिए सब कुछ है. उन्होंने कहा, साफ सफाई और क्लीनिंग पूरी प्रक्रिया के दौरान उच्चस्तरीय होती है, जबकि FSCCI के सर्टिफिकेट और अन्य मानकों का पालन यहां पूरी तरह होता है. उन्होंने बताया कि 150+ साल पुराने इस रेस्टोरेंट की टाइमिंग सातों दिन सुबह 7 बजे से रात 10 बजे होती है. इस दौरान कचौरी पूरे दिन मिलती है तो जलेबी सिर्फ सुबह 7 से 11 बजे तक मिलती है. अमन गुप्ता ने बताया कि जब अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से सांसद का चुनाव लड़ने आए तो उन्होंने चुनाव प्रचार की शुरुआत उनके दुकान से कचौरी खाकर ही की थी. उन्होंने कहा कि चाहें अटल बिहारी वाजपेई हों या अब्दुल कलाम, सभी ने ये कचौड़ी प्रयागराज आने पर विशेष तौर पर मंगाकर खाई थीं. मैं एक्सप्लोर करने वाला व्यक्ति हूं और बाहर कुछ नया ढूंढ़ने, खाने का शौकीन हूं. मैं बाहर शायद ही कभी किसी रेस्ट्रो या होटल में दो बार जाता हूं, लेकिन सुलाकी लाल श्री नाथ एंड संस मैं फिर से जा सकता हूं, खासकर उनकी कटहल की सब्जी के लिए.अंत मैंने भी इलाहाबादी स्टाइल में बोलना चहूंगा कि प्रयागराज में आए और सुलकी की कचौरियां न खाई तो आपका प्रयागराज आना फिजूल गया.

Tags: Food, Healthy food, Lifestyle

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Author: Up Head Line

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