
गुलशन सिंह/बक्सर. शहर के बाइपास रोड स्थित बुढ़िया काली माता मंदिर का वार्षिकोत्सव वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के नवमीं तिथि को भक्तिमय महौल में मनाया गया. इसको लेकर आयोजन समिति ने पूर्व में तैयारी पूरी कर ली थी. वहीं वार्षिकोत्सव में नगर के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. इस दौरान मां का भव्य श्रृंगार कर पूजा तथा आरती की गई. इसके बाद मां काली को छप्पन भोग लगाया गया. इस दौरान दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. सभी ने भक्ति भाव से माता को नमन किया तथा विश्व कल्याण की प्राथना की.
महामारी से मुक्ति मिलने पर लोगों ने शुरू की थी पूजा
मंदिर के पुजारी आचार्य सर्वेश कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि बुढ़िया काली माता को नगर माता कहा जाता है. उन्होंने बताया कि मान्यता है कि तकरीबन 100 साल पूर्व जब नगर में महामारी फैली थी, तभी बुढ़िया काली माता की पूजा से नगरवासियों को महामारी से मुक्ति मिली थी. तब से इन्हें नगर माता कहा जाता है. उन्होंने बताया कि पूर्व में मां काली की प्रतिमा एक छोटे से कमरे में स्थापित थी. 2013 में नगर वासियों द्वारा विशाल मंदिर बनवाया गया और मां की पिंडी की स्थापना वैशाख कृष्णपक्ष नवमी को ही हुई थी. तब से हर वर्ष मां काली की धूमधाम से वार्षिकोत्सव सह स्थापना दिवस मनाया जाता रहा है.
मंदिर के प्रति लोगों में है विशेष आस्था
मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर में शीश नवाजने वाले भक्तों की माता रानी कल्याण करती है. यही कारण है कि जब भी मंदिर में कोई कार्यक्रम होता है तो भक्तों की भीड़ लग जाती है. उन्होंने बताया कि इस अवसर पर मां काली का भव्य श्रृंगार किया गया. जिसके बाद मंदिर कमिटी के अध्यक्ष अशोक कुमार सर्राफ, जितेंद्र राय व सोनी राय द्वारा मां काली की भव्य पूजन मंदिर के पुजारी कृष्णा उपाध्याय, बबलू उपाध्याय, अवकाश उपाध्याय व चीकू उपाध्याय ने पूर्ण किया.
लगभग एक घंटे तक चले पूजन के दौरान अंत में मां की भव्य आरती और प्रसाद वितरण कार्य संपन्न हुआ. पूजन के दौरान शिवजी खेमका, विनोद वर्मा, लक्ष्मी प्रसाद समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे. स्थापना दिवस पर होने वाले पूजन के दौरान मंदिर के आस-पास पूजा के लिए प्रसाद, नारियल के अलावा अन्य छोटे-छोटे अस्थाई दुकानें लगी हुई थी.
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FIRST PUBLISHED : May 16, 2023, 17:20 IST








