
मोहित शर्मा/ करौली. सरकार द्वारा हर ग्राम पंचायत में एक मुख्य कार्यालय बनाया जाता है. जहां ग्राम पंचायत से संबंधित सभी कार्य एवं विकास योजनाएं तैयार की जाती है. लेकिन क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों के कार्यालयों का हाल बेहाल रहने के कारण लोग इनमें जाना भी पसंद नहीं करते हैं. करीब 3 साल पहले कुछ ऐसी ही कहानी थी ग्राम पंचायत वाटदा के मिनी सचिवालय की. जिसका हाल कभी गंदगी से इतना भी बदहाल रहता था कि पंचायत के लोग इसमें जाना तो दूर पैर रखना तक पसंद नहीं करते थे. लेकिन आज इसी पंचायत कार्यालय की तक़दीर, नवनियुक्त सरपंच के प्रयासों से कुछ ऐसी बदल गई है कि आज हर व्यक्ति इसकी खूबसूरती का दीवाना है. कभी दयनीय स्थिति में रहने वाला यह वाटदा ग्राम पंचायत का मॉडल कार्यालय शायद ही राजस्थान में कहीं देखा जा सकता है.
कार्यालय में लगे हुए 200 से ज्यादा पौधे
कभी आवारा पशुओं के झुंड का ठिकाना बनने वाले इस पंचायत कार्यालय का स्वरूप कुछ ऐसा बदल चुका है कि आज इसमें 200 से ज्यादा फलदार और छायादार पौधों से हरा भरा रहने के कारण दर्जनों मोरों का बोलबाला रहता है.
ढाई साल की मेहनत लाई रंग
ग्राम पंचायत वाटदा के सरपंच दीपक शर्मा ने बताया कि जब मैं चुनाव के बाद सरपंच बना और मैंने जब पहली बार पंचायत भवन में प्रवेश किया तो उस समय ग्राम पंचायत के कार्यालय की हालत बहुत ही दयनीय थी. उसी समय मेरे मन में विचार आया की पंचायत की सबसे महत्वपूर्ण जगह हैं राजीव गांधी सेवा केंद्र. जहां पर पंचायत के लोग अपने सभी कार्य और परेशानियां लेकर आते हैं. इसलिए मैंने सबसे पहले गांव के पंचायत कार्यालय को ही विकसित करने का निर्णय लिया. उन्होंने बताया कि हमारा इलाका पथरीला इलाका है. इसलिए हमने 5 -6 किलोमीटर दूर से मिट्टी मंगाकर पहले इस कार्यालय जरूरत के हिसाब से 3-4 फुट भरत करवाई थी. जिसके बाद कार्यालय में विभिन्न प्रकार के छायादार व फलदार सहित 50 वैरायटी के पौधे 200 पौधे लगवाए थे. तब जाकर 2 से ढाई साल बाद हमारे पंचायत कार्यालय की सूरत बदल पाई है.
हरियाली के रखरखाव के लिए 500 मीटर दूर से आता है पानी
सरपंच दीपक शर्मा ने बताया कि यहां पर पानी की बहुत समस्या थी. लेकिन हरियाली के रखरखाव के लिए और पौधों को जीवित रखने के कारण हम 500 मीटर दूर से बोरवेल के जरिए पाइप लाइन बिछाकर यहां तक पानी लाए थे. तब जाकर ढाई साल बाद यह पौधे विकसित हो पाए हैं.
अद्वितीय है पंचायत कार्यालय का ऐतिहासिक मुख्य द्वार :
करीब ढाई साल बाद अपना स्वरूप बदलने वाले इस पंचायत कार्यालय की सबसे बड़ी खासियत है इसमें लगा लाल पत्थर का ऐतिहासिक और अद्वितीय मुख्य द्वार. जो शायद ही कहीं देखने को मिल सकता है. सरपंच दीपक शर्मा के मुताबिक उनका गांव लगभग 500 साल से भी ज्यादा पुराना है. जहां आज भी कई प्राचीन हवेलियां बनी हुई है. जो आज पूरी तरह खंडहर हो चुकी है. उन्हीं हवेलियों में हमें यह गेट दबा हुआ मिला था. जिसके बाद इस गेट को हमने गांव के मिनी सचिवालय के मुख्य द्वार पर लगवा दिया.
आने वाली पीढ़ियों की भी बनी रहेगी याददाश्त
सरपंच ने बताया कि इस गेट को पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर लगवाने के पीछे सबसे बड़ी वजह है कि इससे ना केवल हमें बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी गांव की लाल पत्थर की ऐतिहासिक हवेलियों की याददाश्त हमेशा बनी रहेगी.
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FIRST PUBLISHED : May 15, 2023, 23:09 IST








