
करौली. गर्मी की दस्तक के साथ ही लोग हवा के संसाधनों पर निर्भर रहना शुरू कर देते हैं. आज के इस आधुनिक जमाने में शायद कोई व्यक्ति हवा के संसाधनों से दूर होगा. लेकिन इस सबके बीच आज हम आपको बताने जा रहे हैं राजस्थान की एक ऐसी प्राचीन हवेली के बारे में जिसमें रहने वाले लोग आज भी 40 डिग्री से अधिक तापमान में हवा के एकमात्र संसाधनों के बिना बहुत ही सुकून से भीषण गर्मी से अपना कई पीढ़ियों से बचाव करते आ रहे हैं. जिसका सबसे बड़ा कारण है बहरदा गांव की इस 150 साल पुरानी हवेली की बनावट.
धनकुबेरों के गांव बहरदा में आज भी एक ऐसी हवेली मौजूद है. जो भीषण गर्मी के मौसम में भी अपनी अद्वितीय बनावट के कारण पूर्ण रूप से वातानुकूलित रहती है. भयंकर गर्मी के दिनों में इस हवेली की अंदर की ठंडक बिना किसी संसाधन के ए. सी की ठंडक को भी मात देती है. फिलहाल आसमान से आग बरसती हुई गर्मी में जो भी इस हवेली के अंदर प्रवेश करता है. जिसके बाद उसे गर्मी से मिलने वाली राहत का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता.
बढ़ई लोगों ने बनाई थी यह हवेली
हवेली में रहने वाले बुजुर्ग शंभू दयाल शर्मा का कहना है कि इस हवेली का निर्माण बढ़ई जनजाति के कारीगरों के हाथों से हुआ था. जब हवेली का निर्माण हुआ था उस वक्त हवेली की दीवार डबल बनाई गई थी और डबल दीवारों के अंदर मिट्टी व कंक्रीट को भरा गया था. साथ ही हवेली के पत्थरों की जुड़ाई चूने से होने के कारण भयंकर पड़ने वाली गर्मी में भी हवेली की दीवारों से तापमान अंदर नहीं आ पाता. इसी कारण यह हवेली गर्मियों में ठंडी तो सर्दियों में एकदम बर्फ की तरह रहती है. बुजुर्ग का कहना है कि करीब 150 साल पुरानी इस हवेली का हवामान भी ऐसा है कि बाहर से आने वाली हवा भी स्वत: ही ठंडी हो जाती है. बाहर चाहे कैसी भी गर्मी हो लेकिन हमें इस हवेली के अंदर कभी गर्मी महसूस नहीं होती है.
हवेली में गर्मी लगने का नहीं है कोई काम
गर्मी के मौसम में लोगों को ठंडक महसूस कराने वाली प्राचीन हवेली के बारे स्थानीय निवासी चंद्रकांत शर्मा बताते हैं कि यह हवेली डबल आसार की बनी हुई है. जिसमें गर्मी के अंदर आने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है. यह पूरी हवेली पत्थरों के द्वारा पुरानी कारीगरों के हाथों से बनाई गई है. वह बताते हैं कि गर्मियों के दिनों में भी इस हवेली में कूलर पंखा की जरूरत नहीं पड़ती है. हमारे गांव की यह प्राचीन हवेली बिना किसी संसाधन के पूर्ण रूप से वातानुकूलित रहती है.
जून के महीने में बनती है लोगों का सहारा
हवेली में रहने वाले नवल कुमार ने बताया कि जून के महीने में पड़ने वाली भयंकर गर्मी में भी हमारी हवेली एकदम ठंडी रहती है. इस तीन मंजिल की हवेली में आज भी एक पंखा तक नहीं हैं. उन्होंने बताया कि गर्मियों के दिनों में गांव के लोग हमारी हवेली में आकर भयंकर गर्मी से राहत पाते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 14, 2023, 14:24 IST









