चिंतन, दर्शन, जीवन, सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मा
सारे घर का शोर-शराबा, सूनापन, तनहाई अम्मा।
सारे रिश्ते जेठ-दुपहरी, गर्म-हवा, आतिश, अंगारे
झरना, दरिया, झील, समंदर, भीनी-सी पुरवाई अम्मा।
उसने ख़ुद को खोकर; मुझ में एक नया आकार लिया है
धरती, अंबर, आग, हवा, जल जैसी ही सच्चाई अम्मा।
घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके-चुपके कर देती है, जाने कब तुरपाई अम्मा।
बाबूजी गुज़रे, आपस में सब चीजे तक़्सीम हुईं, तब
मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से आई अम्मा।
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Tags: Hindi Literature, Literature
FIRST PUBLISHED : May 14, 2023, 14:29 IST
Author: Up Head Line
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