
सौरभ वर्मा/रायबरेली. अभी तक आपने कई मंदिरों के बारे में सुना होगा और पढ़ा होगा जिसकी अपनी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं.आज हम आपको रायबरेली जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महराजगंज तहसील के मोन गांव के उस प्राचीन मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसकी कहानी बेहद ही दिलचस्प है, साथ ही लोगों की अटूट आस्था का यह प्रमुख केंद्र भी है. यहां पर रायबरेली जनपद ही नहीं आसपास के पड़ोसी जनपदों के लोग भी दर्शन करने के लिए आते हैं.
ओरी दास बाबा मंदि के बारे में लोगों में ऐसी मान्यता है कि यहां पर जलाभिषेक करने मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मंदिर परिसर में एक विशालकाय पीपल का पेड़ भी है,जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है. पीपल के पेड़ के बारे में लोग बताते हैं कि यह लगभग 150 वर्ष से भी पुराना है. मंदिर परिसर में स्थित पीपल का पेड़ भी लोगों के लिए अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है.
चोर हो जाता है बेहोश
वहीं मोन गांव के स्थानीय निवासी शारदा शरण पाण्डेय के मुताबिक यदि कोई भी व्यक्ति चोरी करने के उद्देश्य से आता है तो वह यही गश खाकर गिर जाता है. जब तक वह बाबा ओरिदास से माफी नहीं मांग लेता तब तक वहां से उठकर नहीं जा पाता है. कई बार यहां पर चोरी करने के उद्देश्य चोर घुसे लेकिन वहां यहां से कुछ ले नहीं जा सके, चोर मंदिर परिसर में ही बेहोश हो जाते है.
बसंत पंचमी पर लगता है तीन दिवसीय मेला
ओरी दास बाबा मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए मोन गांव के स्थानीय निवासी शारदा शरण पांडे बताते हैं कि यहां पर बसंत पंचमी के पावन पर्व पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है. जिसमें दूरदराज के लोग मेले में आते हैं साथ ही भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं.
लगभग 200 वर्ष पुराना है मंदिर
न्यूज 18 से बात करते हुए मंदिर के महंत झब्बू दास बताते हैं कि ओरी दास बाबा मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है. यहां पर रायबरेली जनपद सहित आसपास के पड़ोसी जनपदों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और बाबा ओरीदास उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं. साथ ही उन्होंने बताया यहां पर जलाभिषेक करने मात्र से ही मन्नत पूरी होती है.








