न मंगनी न सगाई, लड़कियों को नजर लड़ाने की खुलेआम छूट, मिनटों में बन जाता है सात जन्मों का रिश्ता, जानिए कहां होता है ऐसा गंधर्व विवाह

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हाइलाइट्स

आदिवासी गरासिया समाज में प्रचलित है यह परंपरा
माउंट आबू की नक्की झील पर लगता है इसके लिए मेला
बीते करीब 50 वर्षों से ज्यादा समय से यह परंपरा निभाई जा रही है

रिपोर्ट – प्रतीक सोलंकी

सिरोही. न मंगनी और न सगाई, न दान-दहेज का झंझट, मेले में लड़का और लड़की की मुलाकात होती है और वहीं पर दोनों एक-दूजे को पसंद करते हैं. फिर पूरा समाज इस नए प्रेमी जोड़े की धूमधाम से शादी करा देता है. देश-विदेश के सेलिब्रिटीज की शाही शादी के लिए मशहूर राजस्थान में विवाह की एक ऐसी भी परंपरा है, यह जानकर आपको ताज्जुब हो सकता है. प्रदेश के सिरोही जिले के आदिवासी समाज में यह अनूठी परंपरा आज भी शिद्दत के साथ निभायी जाती है. गंधर्व विवाह त्योहार का यह अनोखा रिवाज (Gandharva Vivah Festival) राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में होता है.

दो दिवसीय तर्पण और गंधर्व विवाह का त्योहार दोनों एक साथ मनाए जाते हैं. इसमें आदिवासी युवा और युवती परंपरा के अनुसार एक दूसरे का हाथ पकड़ कर साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं. यह त्योहार साल में 3 बार मनाया जाता है. इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए हजारों की संख्या में सैलानी नक्की झील पहुंचते हैं. आबूरोड के आदिवासी वनवासी गरासिया समाज में आज भी पुरानी परंपरा के अनुसार गंधर्व विवाह की मान्यता देखने को मिलती है. हाल ही में यह माउंट आबू की नक्की झील पर इसका आयोजन किया गया. यह बुद्ध पूर्णिमा और एकम को 2 दिन तक चला. इस मेले में पुरानी परंपरा के अनुसार लड़का और लड़की एक दूसरे को पसंद करके एक दूसरे का हाथ पकड़ कर साथ जीने मरने की कसम खाते हैं. उसके बाद सगे संबंधी एक दूसरे को मीठे की मनवार करके बधाई देते हैं.

50 वर्षों से ज्यादा समय से यह त्योहार मनाया जा रहा है
यह गंधर्व विवाह त्योहार बीते 50 वर्षों से ज्यादा समय से यहां मनाया जाता है. आज की 21वीं सदी में इस गंधर्व विवाह को लव-इन रिलेशनशिप का नाम से जाना जाता है. दो दिन तक चलने वाले इस मेले में गरासिया समाज के कई युवा बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं. परिवार में किसी की मौत हो जाने के बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन नक्की झील में करते हैं. इसके साथ ही अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए इस महीने में लड़का और लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं.

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लड़का लड़की का हाथ पकड़कर अपने घर ले जाता है
उसके बाद लड़का लड़की का हाथ पकड़कर अपने घर ले जाता है. उसके बाद लड़की के परिवार वाले लड़के के घर पर जाकर एक दूसरे का मुंह मीठा करा कर इस गंधर्व विवाह की अनुमति देते हैं. इस मेले के अंदर युवतियां आदिवासी भाषा में पारंपरिक गानों के साथ नृत्य कर आकर्षण का केंद्र बनती हैं. इस नजारे को देखने के लिए सैंकड़ों सैलानी यहां पर आते हैं.

Tags: Marriage news, Rajasthan news, Sirohi news, Unique wedding

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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