सेना को इन देसी 3 आतंकियों की तलाश! राजौरी और पुंछ हमले में थे शामिल, विदेशी टेररिस्टों की कर रहे मदद

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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में हुए हमलों के पीछे तीन आतंकवादी बताए जा रहे हैं. यही तीनों आतंकी इन दोनों हमलों में शामिल विदेशी आतंकियों की मदद कर रहे हैं. जैसे कि उनके रास्ते और टारगेट का आसान करना. साथ ही उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था दो आतंकवादी संगठनों ने की. जबकि तीन आतंकवादी रियासी, पुंछ और डोडा के एक-एक पाकिस्तानी कमांडरों के साथ कोऑर्डिनेट कर रहे हैं.

स्थानीय आतंकवादी विदेशी आतंकियों की कर रहे हैं मदद
राजौरी और पुंछ के जुड़वां सीमावर्ती जिलों में आतंकी हमले करने में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) का हाथ था. जांच एजेंसियों द्वारा विकसित इनपुट से पता चला है कि राजौरी और पुंछ जिलों के वन क्षेत्रों में सक्रिय प्रत्येक तीन विदेशी आतंकवादियों के दो समूह हो सकते हैं और प्रत्येक दो स्थानीय आतंकवादियों द्वारा समर्थित हो सकते हैं. सेना ने अब आतंकियों की खोज अभियान में पैरा कमांडो को भी शामिल कर लिया है, जबकि आतंकवादियों का पता लगाने और उनका सफाया करने के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है.

रियाज, मोहम्मद अमीन और रफीक नाई मुख्य रूप से शामिल
सूत्रों के अनुसार, रियासी जिले की माहौर तहसील के रियाज अहमद उर्फ ​​कासिम, डोडा के ठाठरी के मोहम्मद अमीन उर्फ ​​खुबैब उर्फ ​​हारून और पुंछ जिले के मेंढर के रफीक नाई उर्फ ​​सुल्तान सक्रिय रूप से लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद संगठनों के पाकिस्तानी कमांडरों के साथ समन्वय कर रहे हैं.  कासिम, खुबैब और नाई वर्तमान में पाकिस्तान से काम कर रहे हैं और जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसियों में “मोस्ट वांटेड आतंकवादियों” की सूची में शामिल हैं.

अपने पुराने कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं ये तीनों आतंकवादी
राजौरी और पुंछ में विदेशी आतंकवादियों के लिए दो जिलों में अपने पिछले कनेक्शन का उपयोग करके “स्थानीय समर्थन आधार” बनाने में तिकड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. जबकि कासिम और नाई राजौरी और पुंछ के थे, खुबैब ने पाकिस्तान भागने से पहले इस क्षेत्र में काम किया था. हालांकि, स्थानीय आतंकवादियों की संलिप्तता के बारे में अलग-अलग संस्करण हैं. क्योंकि वर्तमान में राजौरी और पुंछ जिलों में कोई भी प्रमुख स्थानीय नाम सामने नहीं आया है, जो आतंक में शामिल हो गए हैं.

जंगलों को साफ करने में जुट गई है सेना
इस बात की भी संभावना है कि दक्षिण कश्मीर के आतंकी, जो पीर पंजाल रेंज के साथ सीमा साझा करते हैं, विदेशी आतंकवादियों की सहायता कर सकते हैं. क्योंकि वे दोनों क्षेत्र की स्थलाकृति से अच्छी तरह वाकिफ हैं. वहीं सैनिक अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस की मदद से जंगलों को साफ करने में लगे हुए हैं. पैरा कमांडो अब सक्रिय रूप से ऑपरेशन में शामिल हैं. अधिकारियों ने कहा कि हेलीकॉप्टर और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है और जब तक आतंकियों को मार गिराया नहीं जाता तब तक उनका इस्तेमाल जारी रहेगा.

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विदेशी आतंकियों को मिल रही है स्थानीय मदद
खुफिया सूत्रों ने बताया कि सक्रिय स्थानीय समर्थन के बिना विदेशी आतंकवादी या कश्मीरी आतंकवादी भी राजौरी और पुंछ जिलों में काम नहीं कर सकते. इसलिए, साथ ही, सुरक्षा बल उन ओजीडब्ल्यू को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो स्थलाकृति में विदेशी आतंकवादियों की सहायता कर रहे हैं, लक्ष्यों की पहचान कर रहे हैं, उनके लिए हर चीज सुविधाजनक बना रहे हैं और उन्हें भोजन और आश्रय प्रदान कर रहे हैं.

सेना जंगलों में चला रही है तलाशी अभियान
विदेशी आतंकवादी खानाबदोश लोगों के घरों में और गुफाओं में छिपे हो सकते हैं. हालांकि, उन्हें स्थानीय लोगों से भोजन मिलता रहता है, जिस पर उनका गुजारा होता है. एक आतंकवादी के मारे जाने के बाद से इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच कोई ताजा संपर्क नहीं हो पाया है और व्यापक तलाशी जारी है. राजौरी और पुंछ जिलों के विभिन्न स्थानों, विशेष रूप से जंगलों में कई तलाशी अभियान चल रहे हैं, जहां कडी में आईईडी विस्फोट करने के बाद आतंकी वहां से किसी दूसरे जंगल में भी जा सकते हैं. यही कारण है की अभी तक जख्मी आतंकी भी सेना के हत्थे नहीं चढ़ा है.

लगातार आतंकी वारदात को दिया अंजाम
5 मई को राजौरी जिले के कंडी जंगलों में रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल कर आतंकवादियो द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में पांच पैरा कमांडो शहीद हो गए और एक मेजर घायल हो गए. इससे पहले 20 अप्रैल को पुंछ जिले की मेंढर तहसील के भट्टा दुर्रिया में आतंकवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में पांच जवान शहीद हो गए थे और एक अन्य जवान घायल हो गया था. इससे पहले, इस साल 1 जनवरी को हुए आतंकवादी हमले में अल्पसंख्यक समुदाय के सात नागरिक मारे गए थे, जिनमें से दो नाबालिग थे और आधा दर्जन से अधिक घायल हो गए थे.

Tags: Jammu and kashmir

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Author: Up Head Line

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