हाइलाइट्स
8 मई 1945 को यूरोप में छह साल पुराने विनाशकारी द्वितीय युद्ध का समापन हुआ था.
8 मई 1945 को यूरोप में छह साल पुराने विनाशकारी द्वितीय युद्ध का समापन हुआ था.
आज फिर यूरोप युद्ध की एक और विभीषिका देख रहा है जो एक विश्व युद्ध में बदल सकता है.
यूरोप पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा है. रूस यूक्रेन के साथ युद्ध कर रहा है और इस युद्ध को 440 दिन हो गए हैं. और कई बार हालात ऐसे लगते हैं कि दुनिया विश्वयुद्ध में उलझ जाएगी. ऐसी स्थिति में 8 मई का दिन अहम हो जाता है क्योंकि 1945 को इसी दिन जर्मनी की हार के बाद यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध का खात्मा हुआ था और यह दिन विक्ट्री इन यूरोप या वी ई डे के तौर पर मनाया जाता है. यूरोप ही वह क्षेत्र था जिसने द्वितीय विश्व युद्ध की भीषण त्रासदी झेली थी जिसमें लाखों लोगों की जान चली गई थी.
एक बुरे दौर का खात्मा
8 मई 1945 को जर्मनी ने औपचारिक तौर पर अपनी हार स्वीकार कर ली थी जिससे यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त घोषित कर दिया गया था जिससे पूरे यूरोप ने छह साल के विभिषिका के बाद राहत की सांस ली थी. यह युद्ध जर्मनी के शासक हिटलर के पोलैंड पर हमले से 1939 में शुरू हुआ था.
युद्ध की आग में जलता रहा यूरोप
उसके बाद यूरोप लगातार युद्ध की विभीषिका में जलता रहा और जर्मन नाजियों के अत्याचारों की एक मिसाल देखने को मिली. एक समय ऐसा आया कि सोवियत संघ, ब्रिटेन और कुछ तटस्थ देशों को छोड़कर पूरे यूरोप पर ही जर्मनी का कब्जा हो गया था. लेकिन धीरे धीरे अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने मिलकर बाजीपलटना शुरू कर दी और यूरोप को हिटलर के चुंगल मुक्त कराया जो 60 लाख यहूदियों की हत्याओं का जिम्मेदार था.
बिना शर्त आत्म समर्पण की प्रक्रियाएं
30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने बर्लिन तक मित्र राष्ट्रों के प्रवेश के बाद आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद हिटलर के उत्तराधिकारी ग्रैंड एडिमरल कार्ल डोनित्ज ने तुरंत ही मित्र राष्ट्रों के सेना केसाथ समर्पण को लेकर बातचीत शुरू कर दी थी. उस समय से यूरोप के बाकी हिस्सों से भी जर्मनी की बिना शर्त समर्पण की खबरें एक के बाद एक आने लगी थी. और फिर सात मई को बर्लिन में निर्णायक समर्पण की औपचारिकताएं शुरू कीं.
उस दिन हजारों की संख्या में लोग लंदन की सड़क पर उतर कर जश्न मानने उतर आए थे. Wikimedia Commons)
जैसे ही हुआ जर्मनी के समर्पण का ऐलान
सात मई को जैसे ही जर्मनी के औपचारिक समर्पण का ऐलान हुआ, पूरे पश्चिमी दुनिया में खुशी का संचार फैल गया जिसमें यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका विशेष तौर पर शामिल थे. इसके अगले दिन ही लोगों ने व्यापक तौर पर जश्न मनाना शुरू कर दिया था. बीबीसी से ऐलान हुआ कि विक्ट्री इन यूरोप डे राष्ट्रीय अवकाश के तौर पर मनाया जाएगा. यूके में दस लाख लोग सड़कों पर उतर आए तो वहीं अमेरिका में भी हर तरफ जश्न का माहौल बन गया.
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कई और देशों में भी
इस दिन को ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी मनाया जाता है. अमेरिका में इस दिन वॉशिंगटन डीसी में 2004 में बने वार मेमोरियल पर लोग जाते हैं. द्वितीय विश्व युद्ध पर बनी कई फिल्मों को सिनेमाघरों में फेस्टिवल के तौर पर दिखाया जाता है. युद्ध में नाजीवाद का के विरोध में मानवता की ओर से ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, चीन और सोवियत संघ की सेनाएं मित्र राष्ट्र की सेनाएं तौर पर थी जिन्होंने एक के बाद एक यूरोप के सभी देशों को जर्मनी, इटली और जापान के चुंगल मुक्त कराया था.
विक्ट्री इन यूरोप डे को रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष को रोकने के एक अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
यह दिवस मनाने का एक बड़ा उद्देश्य
इस दिवस को कई लिहाज से अहम माना जाता है. इसे द्वितीय विश्व युद्ध के खात्मे के साथ दुनिया में संघर्ष की स्थिति को भी खत्म होने के दिन की तरह माना जाता है लेकिन सबसे अहम बात यही है कि इस युद्ध मे यूरोप के लगभग हर देश में भाग लिया था. और इस दिवस पर हर पक्ष वाले देश के लोग एक होकर चिंतन मनन करते हैं कि किन हालातों मे युद्ध शुरू होते है और वे फिर से ना भड़कें इसके लिए क्या करना चाहिए.
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रूस का कहना है कि वह नाटो के “बुरे इरादों वाले विस्तार” को यूक्रेन में सहन नहीं करेगा. वहीं अमेरिका की अगुआई में पश्चिमी देशों का कहना है कि यूक्रेन को खुद यह फैसला लेने का अधिकार है कि क्या वह किसी समूह का सदस्य बने या नहीं. इसी वजह से रूस और नाटो के बीच तनातनी में रूस ने यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के नाम पर हमला किया और यह संघर्ष अब तक जारी है. जबकि कोशिश इसकी भी पूरी हो रही है कि इस युद्ध के आग दूसरे इलाकों में ना फैले. फिर भी विक्ट्री इन यूरोप दिवस एक बड़ा अवसर जरूर है जिसका फायदा उठाकर इस सैन्यसंघर्ष को खत्म करने के सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 08, 2023, 06:20 IST








