महासागर क्यों मिलते हैं बहुत ही कम कीड़े, जापानी वैज्ञानिकों ने सुलझाई गुत्थी

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ये सच है कि महासागरीय जीवन में जितने जीव हैं उनकी संख्या और विविधता धरती पर रहने वाले जीवों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है. लेकिन बहुत से लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि धरती की तुलना मे समुद्र और महासागरों में कीड़ों की संख्या बहुत ही कम है. आखिर इसकी वजह क्या है, यह अभी तक स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका था. अब जापान के वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब खोज निकालने का दावा किया है जिसमें उन्होंने कहा कि कीड़े एक तरह की रसायन प्रणाली पर काम करते हैं जिससे उन्हें अपने लिए एक खोल बनाने में मदद मिलती है जो धरती पर बहुत उपयोगी होता है, लेकिन महसागारीय वातावरण में अनुकूल नहीं होता है.

खास एन्जाइम जिम्मेदार
वैज्ञानिकों  का कहना है कि इसके लिए खास तरह का एमसीओ2 एन्जाइम जिम्मेदार है. यही एन्जाइम कीटों की उनके खोल को कठोर बनाने में मददगार होता है और यही कारण है की समुद्री वातावरण में कीटों की संख्या ज्यादा देखने को क्यों नहीं मिलती है. जबकि यही विशेषता उन्हें धरती पर एक सफल जीव के तौर पर स्थापित किए हुए है.

खास तरह की रासायनिक प्रणाली
इस अवधारणा का प्रस्ताव जापान के टोक्यो मैट्रोपॉलिटियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दिया है. इससे पहले उन्होंने दर्शाया था कि कीटों में एक खास तरह की रासायनिक प्रणाली विकसित कर ली है जिससे वे अपने खोल को कठोर कर लेते हैं और इसके लिए वह आणविक ऑक्सीजन और मल्टिकॉपर ऑक्सीडेज 2 (एमसीओ2) एनजाइम का उपयोग करती है.

बहुत अहम होते हैं कीट
वैज्ञानिकों की दलील है कि इससे प्रणाली का कीटों को समुद्री जीवन में नुकसान होता है जबकि इससे उन्हें जमीन पर रहने में फायदा मिलता है. एमसीओ2 कीटों के विकासक्रम की जान समझा जाता है. कीटों के बारे में कहा जाता है क वे ग्रह के बहुत ही सफलतम जीवों में से एक हैं. वे धरती के बहुत सारे जानवरों का भोजन होते हैं और उनका वैश्विक पारिस्थतिकी तंत्र पर गहरा असर होता है.

अनुवांशिकीय विकास का आधार
लेकिन इतने अहम होने के बाद भी खटकने वाली बात यह है कि जहां कीटों के पूर्वज महासागरों के ही हैं. अब उनकी महासागरों में संख्या नहीं के बराबर है जबकि धरती पर इनकी बहुतायत है और कई पारिस्थितिकी तंत्रों में बड़ी प्रमुख भूमिका है. यह पहेली लंबे समय से वैज्ञानिकों को उलझाए हुए थी. अब जाकर सुनाकी एसानो की अगुआई में वैज्ञानिकों ने इस सवाल का अनुवांशिकीय विकास के आधार पर जवाब खोजा है.

समुद्री ही थे कीटों के पूर्वज
ताजा आणविक फिलोजेनेटिक्स से पता चलता  है कि क्रस्टेशियनस और कीट दोनों ही एक ही परिवार पैनक्र्स्टेसिया से आते हैं. कीट वे शाखा है जिसने समुद्र छोड़ दिया था और धरती को अपना लिया था. लेकिन दोनों के बाह्यढांचे में मोम की परत होती है और उनमें कठोर क्यूटाइल होती है. इससे पहले इसी टीम ने ही दर्शाया था कि धरती पर आते समय उनमें एमसीओ2 नाम का एन्जाइम बनाने वाला जीन पनपा था.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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